दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर गेटवे टू नोएडा, 4526 करोड़ की लागत से बनेगा कन्वेंशन और हैबिटेट सेंटर

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दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर बनेगा ‘गेटवे टू नोएडा’, ₹4526 करोड़ की लागत से वैश्विक पहचान पाएगा कन्वेंशन और हैबिटेट सेंटर

नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-94 में देश के सबसे बड़े मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट के लिए जारी किया टेंडर, PPP मॉडल पर 7 साल में बनकर तैयार होगा वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर! दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित नोएडा का प्रवेश द्वार अब एक नए और बेहद भव्य रूप में नजर आने वाला है। नोएडा प्राधिकरण ने दिल्ली-नोएडा बॉर्डर के ठीक पास सेक्टर-94 में एक विशाल ‘कन्वेंशन और हैबिटेट सेंटर’ (Noida Convention and Habitat Centre) बनाने की महात्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है।  लगभग ₹4,526 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट को ‘गेटवे टू नोएडा’ के नाम से जाना जाएगा। प्राधिकरण ने इस परियोजना को विकसित करने के लिए डेवलपर का चयन करने हेतु रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) यानी टेंडर जारी कर दिए हैं।  25 एकड़ (लगभग 1,01,171 वर्ग मीटर) के विशाल भूखंड पर बनने वाली यह परियोजना पूरी तरह से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित होगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे सात वर्षों के भीतर पूरी तरह से क्रियाशील (Operational) करने का लक्ष्य रखा गया है।

कैसा होगा ‘गेटवे टू नोएडा’ का स्वरूप?

यह सिर्फ एक कन्वेंशन सेंटर नहीं होगा, बल्कि इसे एक आर्किटेक्चरली कंट्रोल्ड मिक्स्ड-यूज कॉम्प्लेक्स (Mixed-Use Complex) के रूप में डिजाइन किया गया है। इसमें संस्कृति, व्यापार, मनोरंजन, खुदरा और प्रीमियम आवास का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।  प्रस्ताव के अनुसार, प्रोजेक्ट के विभिन्न हिस्सों का निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) इस प्रकार विभाजित किया गया है।

इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (Convention Centre)

यह 18,762 वर्ग मीटर के निर्मित क्षेत्र में फैला होगा। इसमें वैश्विक स्तर की व्यापारिक बैठकें, कॉर्पोरेट एक्सपो और अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित किए जा सकेंगे। प्राधिकरण ने शर्त रखी है कि इस हिस्से को काम शुरू होने के 30 महीनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।

हैबिटेट सेंटर और लक्जरी होटल (Habitat Centre & Hotel)

ये दोनों हिस्से अलग-अलग 29,507 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। हैबिटेट सेंटर दिल्ली के प्रसिद्ध India Habitat Centre की तर्ज पर काम करेगा, जहां सांस्कृतिक गतिविधियां, कला दीर्घाएं (Art Galleries) और बौद्धिक विमर्श के लिए क्लब होंगे। वहीं, फाइव-स्टार होटल अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की मेजबानी करेगा।

कमर्शियल और रिटेल स्पेस (Commercial & Retail Space)

बिजनेस हाउसेज के लिए 1.10 लाख वर्ग मीटर में आधुनिक कॉर्पोरेट कार्यालय (Offices) और सुसज्जित सर्विस अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, 65,437 वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रीमियम रिटेल आउटलेट्स, शॉपिंग आर्केड और फूड कोर्ट विकसित किए जाएंगे।

प्रीमियम आवासीय टावर (Residential Development)

परिसर में 1.75 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में आवासीय टावरों का निर्माण किया जाएगा। नियम के मुताबिक, आवासीय उपयोग को कुल निर्मित क्षेत्र (BUA) के अधिकतम 40 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है।

ओखला पक्षी विहार मेट्रो स्टेशन से सीधी कनेक्टिविटी

इस परियोजना की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी रणनीतिक स्थिति और कनेक्टिविटी है। यह दिल्ली से नोएडा में प्रवेश करते ही कालिंदी कुंज और महामाया फ्लाईओवर के करीब स्थित है। यातायात को सुगम बनाने के लिए इस परिसर को दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन पर स्थित ओखला पक्षी विहार मेट्रो स्टेशन (Okhla Bird Sanctuary Metro Station) से सीधे जोड़ा जाएगा। RFP के अनुसार, डेवलपर को मेट्रो स्टेशन से सीधे इस कॉम्प्लेक्स के भीतर तक एक एलिवेटेड फुट ओवरब्रिज (FOB) या पेडेस्ट्रियन लिंक बनाना होगा। इस कनेक्टिविटी के कारण, दक्षिण दिल्ली, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) और जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आने वाले आगुंतक बिना सड़क जाम में फंसे सीधे मेट्रो से इस सेंटर के अंदर प्रवेश कर सकेंगे।

राजस्व और संचालन का गणित: प्राधिकरण को बंपर कमाई की उम्मीद

नोएडा प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट को वित्तीय रूप से बेहद आकर्षक बनाया है। PPP मॉडल के तहत, सफल बोलीदाता (Developer) और नोएडा प्राधिकरण मिलकर एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का गठन करेंगे। डेवलपर ही इस पूरे ढांचे के डिजाइन, वित्तपोषण (Financing), निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा। प्राधिकरण के वित्तीय अनुमानों के अनुसार, ‘गेटवे टू नोएडा’ से राजस्व की बंपर प्राप्ति होगी।
7 वर्षों के बाद: प्राधिकरण को लगभग ₹6,890 करोड़ का कुल राजस्व मिलने की उम्मीद है।
10 वर्षों के बाद: यह कमाई बढ़कर ₹10,324 करोड़ तक पहुंच सकती है।
15 वर्षों के बाद: प्रोजेक्ट से होने वाली कुल संचयी आय ₹17,292 करोड़ के आंकड़े को छू सकती है।
चूंकि परियोजना के लेआउट और बिल्डिंग प्लान को नोएडा प्राधिकरण पहले ही मंजूरी दे चुका है, इसलिए डेवलपर का चयन होते ही जमीन पर वास्तविक निर्माण कार्य बिना किसी देरी के तुरंत शुरू किया जा सकेगा। इच्छुक कंपनियों के लिए टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख 18 सितंबर 2026 तय की गई है।

रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट प्रोफाइल को लगेगा पंख

इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्टर-94 में इस अंतरराष्ट्रीय केंद्र की स्थापना से नोएडा के रियल एस्टेट बाजार और कॉर्पोरेट छवि को भारी बूस्ट मिलेगा।  दिल्ली-NCR में अभी तक बड़े आयोजनों के लिए प्रगति मैदान का Bharat Mandapam या द्वारका का Yashobhoomi ही मुख्य विकल्प थे। अब नोएडा के पास अपना खुद का वैश्विक व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र होगा। इस घोषणा के बाद से ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के शुरुआती सेक्टर्स (विशेषकर सेक्टर-94) में लक्जरी आवासीय अपार्टमेंट्स और हाई-राइज सोसाइटियों के लिए खरीदारों की पूछताछ और जमीनों की मांग में तेजी देखी जा रही है। यह प्रोजेक्ट नोएडा को उद्योग, व्यापार और पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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