कोकण की जमीन पर फिर गरमाया विवाद, राज ठाकरे ने कहा- ‘पैरों तले जमीन गई तो अस्तित्व भी खत्म समझो’

The CSR Journal Magazine
कोकण में कृषि जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि दूसरे राज्यों से आने वाले कुछ लोग स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर नियमों को दरकिनार करते हुए कोकण में जमीन खरीद रहे हैं। अब सिंधुदुर्ग में कृषि जमीन की खरीद से जुड़े मामलों की जांच की खबर सामने आने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है। राज ठाकरे ने अपने बयान में कहा कि वह कई वर्षों से इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कोकण की शेतजमीन यानी कृषि भूमि को नियमों के खिलाफ दूसरे राज्यों के लोगों को बेचे जाने के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने मराठी लोगों से अपनी जमीन को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।

सिंधुदुर्ग में जमीन खरीद की जांच

हाल की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंधुदुर्ग में गैर-किसानों द्वारा कृषि जमीन खरीदने के मामलों की जांच कोकण विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है। जांच का एक प्रमुख मुद्दा यह है कि क्या जमीन खरीदने वाले लोग वास्तव में किसान थे और क्या जमीन की खरीद महाराष्ट्र के कुळ कानून यानी कृषि भूमि से जुड़े नियमों के मुताबिक हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ खरीदारों ने दूसरे राज्यों में किसान होने के प्रमाणपत्र के आधार पर जमीन खरीदने का दावा किया है। इन प्रमाणपत्रों की राजस्व विभाग द्वारा जांच की जा रही है। समिति को जमीन के हिस्सों की बिक्री से जुड़े कुछ अन्य मामलों की जानकारी भी मिली है। महाराष्ट्र के भूमि अभिलेख विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गैर-किसान द्वारा कृषि जमीन खरीदने पर महाराष्ट्र कुळवहिवाट और शेतजमीन अधिनियम, 1948 की धारा 63 के तहत प्रतिबंध हैं, हालांकि निर्धारित शर्तों के तहत सक्षम अधिकारी अनुमति दे सकते हैं।

राज ठाकरे ने फिर उठाया जमीन का मुद्दा

राज ठाकरे इससे पहले भी कोकण की जमीन को लेकर चिंता जताते रहे हैं। अगस्त 2026 में रायगढ़ में उन्होंने लोगों से कोकण की जमीन नहीं बेचने की अपील की थी और कहा था कि उन्हें विकास का विरोध नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों की जमीन और भविष्य का सवाल भी महत्वपूर्ण है। अब एक बार फिर उनके बयान के जरिए यह मुद्दा सामने आया है। राज ठाकरे का कहना है कि अगर स्थानीय लोगों के हाथ से जमीन निकलती गई तो आने वाली पीढ़ियों के सामने पहचान और अस्तित्व का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, जमीन खरीद से जुड़े हर मामले को केवल खरीदार के मूल राज्य के आधार पर नहीं देखा जा सकता। किसी भी लेनदेन की वैधता संबंधित जमीन के रिकॉर्ड, खरीदार की पात्रता, अनुमति और लागू कानूनों के आधार पर तय होती है। सिंधुदुर्ग में चल रही जांच का अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ है।
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