तिरंगा फाड़ा, पैरों तले कुचला, मोहन भागवत के इवेंट के बाहर खालिस्तानियों का बवाल

The CSR Journal Magazine
न्यूयॉर्क शहर के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के दौरान खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथियों ने जमकर हंगामा किया। सिख प्रदर्शनकारियों ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान करते हुए उसे फाड़कर पैरों तले कुचल दिया। इसके साथ ही वहां खालिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। इस दृश्य ने कार्यक्रम में मौजूद भारतीय प्रवासियों को कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

भारतीय प्रवासियों का मजबूत जवाब

भारतवंशियों ने खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों का कड़ा विरोध किया और उन्हें पाकिस्तान और चीन का एजेंट बताया। जोहरान ममदानी के नेतृत्व में उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी प्रशासन पर भी सवाल उठाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने RSS और भाजपा पर आरोप लगाया कि वे भारत को एक हिंदू राष्ट्र में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या देख रही थी पुलिस?

दिलचस्प बात यह रही कि इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस बल ने भारतीय तिरंगे के अपमान को रोकने की कोशिश नहीं की। यह स्थिति तब बनी जब प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे को गिरफ्तार करने के बजाय उसके अपमान को नजरअंदाज किया। इस कार्रवाई ने भारतीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया।

अन्य धार्मिक समूहों का समर्थन

प्रदर्शन में सिख समूहों के अलावा मुस्लिम और ईसाई धार्मिक संगठनों ने भी भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया। इस समय डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ब्रैड लेंडर भी समर्थन देने आए थे, लेकिन उन्हें वहां अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उन पर यहूदी समर्थक होने का आरोप लगाया और उन्हें वहाँ से जाने के लिए कहा।

हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया

सिख प्रदर्शनकारियों के विरोध के बाद हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने बयान जारी किया कि उन्हें इस तरह की घटना की पहले से उम्मीद थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि “न्यूयॉर्क के लोगों को खालिस्तानियों की धमकियों से लेकर यहूदियों के खिलाफ नफरत भरी झड़पों तक, मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन सच में बहुत बुरे थे।” इस पोस्ट में ये भी कहा गया कि “हमें खुशी है कि हमारी सुरक्षा चेतावनियों को गंभीरता से लिया गया और कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।”

घटनाओं का सिलसिला

जनसामान्य में इस प्रदर्शन की चर्चा है, कई लोगों ने इसे ‘भारत की साख पर हमला’ बताया है। खालिस्तान समर्थक यह दावे कर रहे हैं कि भारतीय प्रशासन सिखों, मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ साजिश कर रहा है, जो कि उनके विचारों के खिलाफ है। इस सुरक्षा संकट ने न्यूयॉर्क शहर में एक नई बहस को जन्म दिया है।

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