गुरुद्वारे में मोहन भागवत के स्वागत पर विवाद, ब्रिटिश सिखों ने दी सफाई

The CSR Journal Magazine
लंदन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया ब्रिटेन दौरे ने सिख प्रवासी समुदाय में असहमति की लहर पैदा कर दी है। भागवत के स्वागत को लेकर सिख समूहों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह मामला लंदन के खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे में हुई एक सभा से जुड़ा है, जहां वह हाल ही में गए थे। इस दौरे के बाद कई सिख संगठनों ने अपना विरोध जताया है।

गुरुद्वारे का बचाव

गुरुद्वारे ने भागवत के दौरे का पालन करते हुए सफाई दी है। गुरुद्वारे के अध्यक्ष ने कहा कि यह दौरा सिर्फ धार्मिक दर्शन के लिए था। उन्होंने उल्लेख किया कि गुरुद्वारा सभी के लिए एक खुला स्थान है, जहां किसी भी राजनीतिक या वैचारिक दृष्टिकोण को महत्व नहीं दिया गया। उनके अनुसार, केवल सिख मर्यादा का पालन होना आवश्यक है।

सिख फेडरेशन का विरोध

सिख फेडरेशन (UK) ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। फेडरेशन के अध्यक्ष भाई अमरीक सिंह ने कहा कि RSS एक धार्मिक संगठन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और वैचारिक आंदोलन है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि कोई भी माफी या स्पष्टीकरण इस घटना के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, खासकर जब भागवत की सभा में संगत का उपस्थित न होना एक गंभीर मुद्दा है।

विभिन्न राय का होना

गुरुद्वारे के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने कहा कि भागवत ने संगत को न तो संबोधित किया और न ही किसी प्रमुखता का दावा किया। उन्होंने कहा कि सभी सिखों की RSS के बारे में राय एक जैसी नहीं है, और कुछ लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देखना बेहतर मानते हैं। उनकी बातें एक ऐसे वातावरण को प्रोत्साहित करने वाली हैं, जहां संवाद की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा सके।

संघर्ष का समाधान

गुरुद्वारे के अध्यक्ष ने बताया कि उनका उद्देश्य सभी के लिए एक अच्छा माहौल बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति को गुरुद्वारे में आने की अनुमति को राजनीतिक समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस मुद्दे ने सिख समुदाय में विभाजन की भावना को उजागर किया है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि एक खुला संवाद जरूरी है।

समुदाय की आवाज

सिख समुदाय के भीतर, अलग-अलग दृष्टिकोण रखना एक आम बात है। भाई अमरीक सिंह ने कहा कि बातचीत से ही समस्याओं का समाधान हो सकता है। इससे समाज में एकता और सहिष्णुता का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि समुदाय के सदस्य एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें, चाहे वे कितने भी भिन्न क्यों न हों।

राजनीति से अलग समझने की जरूरत

गुरुद्वारे के शीर्ष नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को उनके विचारों और राजनीतिक मान्यताओं से परे देखा जाना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि धार्मिक स्थलों को केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए ही सीमित रखा जाए। इस वक्त बीजेपी और RSS की विचारधारा को लेकर चल रही बहस ने एक बार फिर से सिख समुदाय को दो हिस्सों में बांटने का काम किया है।

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