सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जज प्रज्वल खतिवाड़ा, कहा- शिकायत करने पर मुझ पर ही बिठा दी जांच

The CSR Journal Magazine

सिक्किम हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उठाया कदम

नई दिल्ली: सिक्किम के जिला जज प्रज्वल खतिवाड़ा ने हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के खिलाफ शिकायत की, तो उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई शुरू की गई। जज खतिवाड़ा ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा उन्हें जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ को चुनौती दी है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने खिलाफ चल रही विजिलेंस जांच को भी सवाल उठाया।

जज खतिवाड़ा ने दी जानकारी

प्रज्वल खतिवाड़ा, जो कि 2005 के सिक्किम न्यायिक सेवा परीक्षा के टॉपर हैं, ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया है कि उन्हें 12 दिसंबर 2025 को पूर्व जज के खिलाफ औपचारिक शिकायत करने के बाद परेशान किया गया। शिकायत की प्रतियां भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों को भेजी गई थीं। शिकायत के बाद, जज को अचानक कई प्रशासनिक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा।

परेशानियों का सामना करने का आरोप

जज खतिवाड़ा ने आरोप लगाया है कि शिकायत के बाद से उनके साथ कई असामान्य घटनाएं हुईं। इनमें उनका अचानक तबादला, सुरक्षा कवर हटाना, और उनके निजी मामलों पर मातहत कर्मचारियों से पूछताछ करना शामिल है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि इन सभी घटनाओं का उद्देश्य उन्हें मानसिक रूप से परेशान करना था। इसके साथ ही, जज की ‘एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट’ (ACR) भी गुम हो गई है, जिसके आधार पर उनका काम का मूल्यांकन होता है।

शिकायतें और जांच की मांग

खतिवाड़ा ने राष्ट्रपति को संबोधित एक गुमनाम शिकायत का भी उल्लेख किया, जिसमें उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह पत्र उनकी रैंक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है। जज ने अपनी याचिका में मांग की है कि विजिलेंस जांच को रोका जाए और सभी सबूतों को उनके सामने पेश किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने विजिलेंस इंस्पेक्टर शरद सुब्बा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की है, जिनके खिलाफ उन्होंने पहले ही शिकायत दर्ज की थी।

सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम

अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है। जज प्रज्वल खतिवाड़ा की याचिका में अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं, जो न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वच्छता पर भी सवाल उठाते हैं। यह मामला पूरे देश में न्यायपालिका में काम करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।

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