इंटरनेशनल ट्रेड शो में चमकी यूपी की नारी शक्ति; 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों ने लगाए स्टॉल

The CSR Journal Magazine

यूपी ट्रेड फेयर में 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों का जादू

बदलाव की यह तस्वीर वाकई में उत्साहजनक है। कभी जो महिलाएं अपने पति या पिता के नाम से जानी जाती थीं, अब वे अपने फर्म और ब्रांड के नाम से पहचान बना रही हैं। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो में ये महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने उत्पादों के साथ मौजूद रहें। यह सशक्तिकरण का एक नया रूप है, जहां महिलाएं अब केवल आयोजनों की सजावट नहीं, बल्कि अपने काम के जरिए सामने आ रही हैं।

नए अवसरों की तलाश

इस ट्रेड शो का मंच देशी-विदेशी खरीदारों से सीधे संवाद करने का है। 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों ने अपने स्टॉल्स पर अपनी मेहनत और हुनर का प्रदर्शन किया है। यह मौका उनके लिए एक नई पहचान और अवसरों की तरफ बढ़ने का है। आज जिन हाथों ने रसोई और खेती में मेहनत की है, वही हाथ अब व्यवसाय के नए द्वार खोल रहे हैं।

एक नई पहचान की कहानी

आगरा की जरी-जरदोजी, अयोध्या की हर्बल चाय, कन्नौज का इत्र और आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी जैसे उत्पाद इस बात के गवाह हैं कि महिलाएं अपने काम से अपनी पहचान बना रही हैं। गाजियाबाद की अंजलि ने भी चित्रकारी को उद्यम का रूप दिया। अब वह दूसरों के लिए रोजगार उत्पन्न कर रही हैं और इस तरह सशक्तिकरण का असली मतलब सामने आ रहा है।

सहायता से स्वरोजगार की ओर

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर उन्होंने अपने कारोबार की शुरुआत की है। समूहों में शामिल होकर महिलाएं न केवल अपनी झिझक को छोड़ रही हैं, बल्कि व्यापार की बारीकियां भी सीख रही हैं। इस तरह वे अपने उत्पादों को न केवल बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं।

ट्रेड शो का महत्व

इस प्रकार के बड़े आयोजन न केवल बिक्री के आंकड़ों को बढ़ाते हैं, बल्कि महिला उद्यमियों को बाजार की जरूरतों को समझने का भी अवसर देते हैं। खरीदारों से सीधा फीडबैक मिलने से महिलाएं अपने उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बना सकती हैं। इसी तरह, यह अनुभव उन्हें ब्रांडिंग और मार्केटिंग में भी मदद करता है।

उद्यमिता का नया चेहरा

उत्तर प्रदेश का महिला उद्यमिता का यह नया चेहरा देखकर अच्छा लगता है। महिलाएं अब पारंपरिक दायरों से निकलकर नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। सिद्धार्थनगर की सरोज देवी केले के रेशे से उत्पाद तैयार कर रही हैं, जो कृषि अपशिष्ट को नए रूप में प्रस्तुत करते हैं। इस तरह की नवाचारों से समाज की सोच में बदलाव आ रहा है।

सरकार का सहयोग

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। जिला ग्रामोद्योग विकास और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद दी है। ये योजनाएं उनकी जरूरतों को समझकर ही बनाई गई हैं, जो उनके उद्यम में मदद करती हैं।

महिला उद्यमिता का भविष्य

महिलाएं अब केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद नहीं कर रही, बल्कि खुद का एक सफल उद्यम खड़ा कर रही हैं। चाहे वह ‘सॉल फॉर अर्थ’ हो या ‘अंजलि क्रिएशन’, ये सभी नाम महिला उद्यमिता की एक नई कहानी बुनते हैं। यह बदलाव न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में, बल्कि समाज में भी सकारात्मक असर डाल रहा है।

सशक्तिकरण का असली मापदंड

महिला सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ आता है, जब महिलाएं अपने हुनर के दम पर पहचान बनाती हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में महिला उद्यमियों की भागीदारी इस बदलाव का प्रतीक है। यह एक नई सोच और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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