‘सामान्य बुखार’ बताकर इंश्योरेंस कंपनी ने किया महिला का क्लेम खारिज, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

The CSR Journal Magazine

इंश्योरेंस कंपनी ने कहा, “बुखार घर पर ठीक हो जाएगा,” 65000 की पॉलिसी का क्लेम हुआ रिजेक्ट!

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस मामले में एक महिला ने आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस और पॉलिसीबाजार के जरिए ₹65,000 की वार्षिक प्रीमियम वाली पॉलिसी ली थी, लेकिन कंपनी ने उसके भाई के 5-7 दिनों के अस्पताल के क्लेम को “सामान्य बुखार है, घर पर ठीक हो जाएगा” कहकर खारिज कर दिया।यह घटना इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग बीमा कंपनियों के रवैये पर भारी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर गरमाई बहस

हाल ही में एक मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हुआ, जिसने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया को फिर से चर्चा का विषय बना दिया है। एक महिला ने 65000 रुपये की हेल्थ पॉलिसी ली थी और उसके बाद जब वह बुखार से पीड़ित हुई, तो उसने क्लेम की रीक्वेस्ट दी। क्लेम का रिजेक्शन महिला के लिए एक बड़ा झटका था, जिससे कई लोग हैरान हैं।

यूजर्स ने उठाए सवाल

इस घटना के बाद कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इंश्योरेंस कंपनी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कहा कि मामला बिना पूरी जानकारी के समझा जा रहा है। ये प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है।

क्लेम रिजेक्शन का कारण

महिला का क्लेम इसलिए रिजेक्ट हुआ क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी ने दावा किया कि बुखार एक सामान्य स्थिति है, जो घर पर भी ठीक हो सकती है। इस तरह के तर्क ने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है क्योंकि यह हेल्थ इंश्योरेंस के उद्देश्य पर सवाल उठाता है।

कंपनी का पक्ष

इंश्योरेंस कंपनी ने अपने बयान में कहा कि वे सभी दावों की समीक्षा गंभीरता से करते हैं और उनके नीतियों के तहत ही क्लेम का निपटारा किया जाता है। कंपनी ने इस मामले में किसी भी तरह की गलती से इनकार किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसी सामान्य समस्याओं के लिए इंश्योरेंस होना चाहिए?

लोगों की भिन्न-भिन्न राय

कुछ यूजर्स ने महिला के लिए सहानुभूति व्यक्त की, जबकि अन्य ने कहा कि उन्हें पहले शर्तों को समझना चाहिए था। इस विषय पर चर्चा बढ़ती जा रही है, जिससे यह पता चलता है कि हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े मामलों में जागरूकता जरूरी है। कई लोगों ने सुझाव दिया कि ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है।

नैतिकता का सवाल

यह मामला केवल एक क्लेम के रिजेक्ट होने का नहीं बल्कि इंश्योरेंस सिस्टम की नैतिकता का भी है। क्या हेल्थ इंश्योरेंस केवल गंभीर बीमारियों के लिए होता है, या सामान्य बीमारियों का भी इसमें समावेश होना चाहिए? यह चर्चा अब लोगों के बीच एक गंभीर विचार का विषय बन गई है।

क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें

लिखित कारण मांगें (Written Rejection Letter): बीमा कंपनी से क्लेम खारिज करने का आधिकारिक और स्पष्ट कारण लिखित में मांगें। मौखिक बातों पर निर्भर न रहें।
अस्पताल से स्पष्टीकरण लें (Justification from Hospital): यदि डॉक्टर ने मरीज को 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती (Active Line of Treatment) किया था, तो उनसे ‘क्रीटीकेलिटी सर्टिफिकेट’ या लिखित स्पष्टीकरण लें कि मरीज को घर पर ठीक क्यों नहीं किया जा सकता था।
ग्रीवेंस सेल में अपील करें (Grievance Redressal): बीमा कंपनी की आंतरिक शिकायत निवारण टीम (Grievance Redressal Officer) के पास सभी मेडिकल दस्तावेजों और डॉक्टर के नोट के साथ दोबारा अपील दर्ज करें।
बीमा लोकपाल से संपर्क करें (Insurance Ombudsman): यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर जवाब नहीं देती या आप उनके फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप बीमा लोकपाल (Ombudsman Website) के पास बिना किसी शुल्क के अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कंज्यूमर कोर्ट (Consumer Forum): लोकपाल से राहत न मिलने पर आप कंज्यूमर कमीशन (National Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हालिया अदालती फैसलों के अनुसार, बीमा कंपनियां केवल संदेह या मनमाने तर्कों के आधार पर वैध मेडिकल क्लेम खारिज नहीं कर सकती हैं।

क्लेम रिजेक्ट होने के मुख्य तकनीकी कारण

24 घंटे भर्ती रहने का नियम: ज्यादातर पॉलिसियों में क्लेम के लिए न्यूनतम 24 घंटे अस्पताल में एडमिट होना जरूरी है।ओपीडी (OPD) उपचार: यदि डॉक्टर ने केवल जांच और दवाइयां लिखी हैं जो घर पर संभव थीं, तो कंपनी उसे एक्टिव ट्रीटमेंट नहीं मानती।दस्तावेजों की कमी: डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन, डिस्चार्ज समरी या बिलों में विसंगति होना।

भविष्य का सवाल

यह मामला केवल शुरुआत है और इससे संबंधित चर्चा आने वाले समय में और बढ़ सकती है। हेल्थ इंश्योरेंस के महत्व को समझने के लिए इस प्रकार की घटनाओं का पता लगाना जरूरी होगा। इससे लोगों को भी यह समझने में मदद मिलेगी कि उन्हें अपनी स्वास्थ्य पॉलिसी के बारे में आगे चलकर कैसे निर्णय लेना चाहिए।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos