यौन उत्पीड़न न्यायपालिका का ‘डर्टी सीक्रेट’, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील बोलीं- कई महिला जज शिकार, कोई नहीं बोलता

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने भारतीय न्यायपालिका में यौन उत्पीड़न को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि यह एक ‘काला रहस्य’ है, जिसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता। जयसिंह का दावा है कि कई महिला जजें अपने पुरुष सहयोगियों के द्वारा यौन शोषण का शिकार हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक महिला जज के खिलाफ ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि उसे अपनी नौकरी खोनी पड़ी, केवल इसलिए क्योंकि उसने एक पुरुष जज की डिमांड का विरोध किया।

जजों की हायरार्की और उत्पीड़न

इंदिरा जयसिंह ने कहा, “मैंने कई महिला जजों से उनके अनुभव साझा किए हैं। ये महिलाएं मेरे पास यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर आई हैं। इसी कारण मैंने अपनी किताब में यह लिखा कि न्यायपालिका में यौन उत्पीड़न एक डर्टी सीक्रेट है।” उन्होंने न्यायपालिका की हायरार्की को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया और बताया कि किस तरीके से यह उत्पीड़न सामने आता है।

जिला अदालतों की महिलाओं का दर्द

जयसिंह ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि महिला जजों को अक्सर एक ही रंग की साड़ी पहनकर विशेष अवसरों पर उपस्थित रहने के लिए कहा जाता है। “जब एक हाई कोर्ट का जज रिटायर होता है, तो जिला अदालतों की महिला जजों को ‘लाइन अप’ किया जाता है,” उन्होंने बताया। यह प्रथा न्यायपालिका में एक संस्कृति की तरह बन गई है, जो महिलाओं के लिए नकारात्मक परिणाम लेकर आती है।

नौकरी के साथ यौन शोषण का खतरा

इंदिरा जयसिंह ने बताया कि एक महिला जज को एक पुरुष जज द्वारा यौन शोषण का शिकार होना पड़ा। “उसे कहा गया कि मेरी शादी की 25वीं सालगिरह की पार्टी में आओ और एक आइटम नंबर पर डांस करो। जब उसने मना किया, तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया,” उन्होंने कहा। ये घटनाएं यह दर्शाती हैं कि न्यायपालिका में महिला जजें कितनी कठिनाईयों का सामना कर रही हैं।

महिला जजों की आवाज दबाने की कोशिश

इससे पहले वरिष्ठ वकील डॉ एस मुरलीधर ने भी इस मुद्दे को उठाया था और बताया कि महिला जजों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसकी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, न्यायपालिका की संरचना में बदलाव की आवश्यकता है।

ब्लैक मार्क पर भारत की न्यायपालिका

इंदिरा जयसिंह के अनुसार, यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक समस्या है, जो महिला जजों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। ऐसी स्थिति में, उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि न्यायपालिका में महिलाओं को समानता और सुरक्षा मिल सके। इन मुद्दों के बारे में बात करने से ही स्थिति में सुधार संभव है।

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