7 साल की उम्र में ‘मैथ्स जीनियस’ ने रचा इतिहास! 16 साल के छात्रों वाली GCSE परीक्षा में हासिल किया Grade 8

The CSR Journal Magazine

अंग्रेजों के देश में 7 साल के भारतीय मूल के जिव्यान ने रचा कीर्तिमान! आंध्र प्रदेश मूल के परिवार का बेटा अब A-Level Maths और Further Maths की तैयारी में

उम्र महज सात साल, लेकिन गणित की समझ ऐसी कि ब्रिटेन में आमतौर पर 16 वर्ष की उम्र के आसपास दी जाने वाली कठिन GCSE Higher Mathematics परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर ली। भारतीय मूल के जिव्यान रेड्डी ध्रुवा ने ब्रिटेन की Pearson Edexcel GCSE Higher Mathematics परीक्षा में Grade 8 प्राप्त कर एक असाधारण उपलब्धि दर्ज की है। जिव्यान ने तीन प्रश्नपत्रों में कुल 240 में से 196 अंक हासिल किए। ब्रिटेन की GCSE ग्रेडिंग प्रणाली में Grade 9 सर्वोच्च स्तर है, जबकि Grade 8 भी बेहद उत्कृष्ट परिणाम माना जाता है। जिव्यान ने यह परीक्षा मई 2026 में दी थी और परिणाम GCSE Results Day के दौरान घोषित हुआ।

जिस परीक्षा को देते हैं किशोर, उसे 7 साल में किया पास

GCSE यानी General Certificate of Secondary Education ब्रिटेन की महत्वपूर्ण माध्यमिक शिक्षा योग्यताओं में से एक है। इसे आमतौर पर करीब 16 वर्ष की उम्र के विद्यार्थी देते हैं। ऐसे में सात वर्षीय जिव्यान का लगभग नौ साल पहले ही GCSE Higher Mathematics परीक्षा में बैठना और Grade 8 हासिल करना बेहद असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है। जिव्यान की सफलता केवल कम उम्र में परीक्षा देने तक सीमित नहीं रही। उसने 196 अंक हासिल कर यह भी साबित किया कि उसकी गणितीय क्षमता उम्र से कहीं आगे है।

नर्सरी से पहले ही दिखने लगी थी गणित में खास रुचि

जिव्यान के पिता ध्रुवा कुमार रेड्डी कट्टा के अनुसार, बेटे की गणित में असाधारण रुचि बहुत कम उम्र में ही दिखाई देने लगी थी। परिवार ने महसूस किया कि नर्सरी शुरू होने से पहले ही जिव्यान संख्याओं और गणितीय अवधारणाओं को तेजी से समझने लगा था। किसी विषय को एक बार समझाने के बाद वह केवल उत्तर तक सीमित नहीं रहता था, बल्कि उसके पीछे के पैटर्न और कारणों को समझने की कोशिश करता था। जिव्यान के लिए गणित का मतलब केवल फॉर्मूले याद करना नहीं है। उसे कठिन समस्याओं को हल करना और एक ही प्रश्न के अलग-अलग संभावित समाधान तलाशना पसंद है।

Grade 8 से खुश, लेकिन लक्ष्य था Grade 9

अपनी उपलब्धि पर जिव्यान बेहद खुश था। उसने बताया कि शुरुआत में उसका लक्ष्य Grade 9 हासिल करना था, इसलिए Grade 8 मिलने पर उसे थोड़ी निराशा भी हुई। लेकिन बाद में वह अपने परिणाम से बेहद खुश हुआ। यह बात जिव्यान की महत्वाकांक्षा और सीखने की इच्छा को भी दर्शाती है। सात साल की उम्र में GCSE पास करने के बावजूद उसकी नजर अब अगले स्तर पर है।

मुख्यधारा के स्कूल से Home Education तक का सफर

जिव्यान पहले लंदन के एक मुख्यधारा के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। लेकिन फरवरी 2026 तक स्कूल में पढ़ाई उसकी क्षमता और सीखने की गति के अनुरूप चुनौतीपूर्ण नहीं लग रही थी। इसके बाद उसके माता-पिता ने उसे Home Education देने का फैसला किया, ताकि वह अपनी क्षमता और गति के अनुसार पढ़ाई कर सके। परिवार का कहना है कि घर पर पढ़ाई को पारंपरिक कक्षा जैसा बनाने के बजाय उसे अधिक रोचक और व्यावहारिक रखा गया। इसमें कस्टमाइज्ड गेम्स, शैक्षणिक ऐप्स, पजल, डायग्राम, बातचीत, व्यावहारिक उदाहरण और AI आधारित लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल किया गया।

माता-पिता मूल रूप से आंध्र प्रदेश के

जिव्यान के माता-पिता मूल रूप से आंध्र प्रदेश से हैं और परिवार पिछले लगभग पांच वर्षों से पश्चिमी लंदन के साउथ रुइस्लिप इलाके में रह रहा है।जिव्यान के पिता तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े क्षेत्र में काम करते हैं और जिव्यान की पढ़ाई में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। परिवार ने होम एजुकेशन की जिम्मेदारियों को आपस में बांटकर उसकी पढ़ाई और सामान्य बचपन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।

अब अगला लक्ष्य A-Level Maths और Further Maths

GCSE में शानदार प्रदर्शन के बाद जिव्यान अब अगले शैक्षणिक चरण की ओर बढ़ रहा है। उसका अगला लक्ष्य A-Level Mathematics और Further Mathematics की पढ़ाई करना है।इतनी कम उम्र में आगे की पढ़ाई के बारे में उसकी स्पष्ट रुचि ने लोगों को चौंकाया है। परिवार के अनुसार, जिव्यान लगातार नए विषयों और कठिन गणितीय समस्याओं के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहता है।

गणित के साथ रोबोट बनाने का सपना

जिव्यान की रुचि केवल गणित तक सीमित नहीं है। उसका सपना बड़ा होकर रोबोट और ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो लोगों की मदद कर सके।वह ऐसी उपयोगी तकनीक बनाने की इच्छा रखता है, जिसका फायदा अधिक से अधिक लोगों को मिल सके और जो आम लोगों के लिए भी सुलभ हो।उसका यह सपना गणित, विज्ञान और तकनीक के प्रति उसकी व्यापक रुचि को दर्शाता है।

माता-पिता बोले—पहले वह 7 साल का बच्चा है

जिव्यान की असाधारण सफलता के बावजूद उसके माता-पिता इस बात पर जोर देते हैं कि वह सबसे पहले एक सामान्य सात वर्षीय बच्चा है। परिवार नहीं चाहता कि उसकी जिंदगी केवल परीक्षाओं, अंकों और उपलब्धियों तक सीमित हो जाए। माता-पिता के अनुसार, उसे खेलने, दोस्त बनाने, गलतियां करने और सामान्य बचपन जीने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। जिव्यान की रुचियों में शतरंज, फुटबॉल, टेनिस, डांस और अन्य गतिविधियां भी शामिल हैं। परिवार यह सुनिश्चित करता है कि होम एजुकेशन के बावजूद उसका दूसरे बच्चों के साथ सामाजिक संपर्क बना रहे।

‘करियर का फैसला उसे खुद करने देंगे’

जिव्यान फिलहाल रोबोट और उपयोगी तकनीक बनाने का सपना देखता है, लेकिन उसके माता-पिता उस पर किसी निश्चित करियर का दबाव नहीं डालना चाहते। परिवार का मानना है कि जैसे-जैसे वह बड़ा होगा, उसे अपनी रुचियों को समझने और अपने भविष्य का रास्ता खुद चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। माता-पिता के लिए उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि केवल Grade 8 नहीं, बल्कि उसकी जिज्ञासा और सीखने की निरंतर इच्छाहै।

उम्र नहीं, जिज्ञासा और सीखने की इच्छा बनी ताकत

जिव्यान की कहानी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि हर बच्चे की सीखने की गति और क्षमता अलग हो सकती है। कुछ बच्चे पारंपरिक शिक्षा प्रणाली की गति के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जबकि कुछ को अधिक चुनौतीपूर्ण और व्यक्तिगत सीखने के अवसरों की जरूरत होती है। जिव्यान के मामले में परिवार ने उसकी रुचि को समझा और उसे आगे बढ़ने के लिए उपयुक्त वातावरण देने की कोशिश की। हालांकि उसकी कहानी को हर बच्चे के लिए एक समान मॉडल के रूप में नहीं देखा जा सकता, लेकिन यह जरूर दिखाती है कि बच्चों की जिज्ञासा और व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचानना उनकी प्रतिभा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बचपन न छिन जाए

ब्रिटेन में सात वर्षीय भारतीय मूल के जिव्यान रेड्डी ध्रुवा का GCSE Higher Mathematics परीक्षा में Grade 8 हासिल करना एक असाधारण शैक्षणिक उपलब्धि है। 240 में 196 अंक, सामान्य GCSE उम्र से करीब नौ साल पहले परीक्षा में सफलता और अब A-Level Maths तथा Further Maths की तैयारी—जिव्यान की यात्रा उसकी गणितीय प्रतिभा और सीखने की गहरी रुचि को दर्शाती है। लेकिन इस सफलता की सबसे दिलचस्प बात शायद यह है कि उसका परिवार उपलब्धियों के साथ-साथ उसके बचपन को भी उतनी ही अहमियत दे रहा है। मैथ्स जीनियस बनने की चर्चा के बीच जिव्यान की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है—प्रतिभा को आगे बढ़ाइए, लेकिन बचपन को पीछे मत छोड़िए।

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