यूपी के स्कूलों में अब बच्चे बनेंगे ‘बाल प्रहरी’, साइबर ठगी और मानव तस्करी पर रखेंगे नजर

The CSR Journal Magazine
बच्चों को साइबर ठगी, मानव तस्करी और फर्जी नौकरी के झांसे से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के स्कूलों में नई पहल शुरू होने जा रही है। माध्यमिक विद्यालयों में अब ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब’ बनाए जाएंगे। इन क्लबों के जरिए कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को ‘बाल प्रहरी’ के रूप में तैयार किया जाएगा। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें बच्चे सिर्फ खुद सुरक्षित रहने के तरीके नहीं सीखेंगे, बल्कि अपने स्कूल और आसपास के दूसरे बच्चों को भी जागरूक करेंगे। यानी विद्यार्थी ही विद्यार्थियों तक साइबर सुरक्षा और मानव तस्करी से बचाव का संदेश पहुंचाएंगे।

हर कक्षा से चुने जाएंगे एक छात्र और एक छात्रा

माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देश के अनुसार हर विद्यालय में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब बनाया जाएगा। क्लब के अध्यक्ष स्कूल के प्रधानाचार्य होंगे, जबकि एक वरिष्ठ शिक्षक को समन्वयक की जिम्मेदारी दी जाएगी। कक्षा 9, 10, 11 और 12 से एक छात्र और एक छात्रा चुने जाएंगे। इस तरह प्रत्येक स्कूल में कुल आठ विद्यार्थी बाल प्रहरी के रूप में क्लब का हिस्सा बनेंगे। इनमें चार छात्र और चार छात्राएं होंगी। पीलीभीत में इस योजना का दायरा काफी बड़ा है। जिले में 38 राजकीय, 25 सहायता प्राप्त और 180 वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। इन स्कूलों में 30 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पंजीकृत हैं।

साइबर ठगी और फर्जी नौकरी के जाल को समझेंगे बच्चे

बाल प्रहरियों को साइबर अपराध के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि ठग फर्जी कॉल, अनजान लिंक, मैसेज और दूसरे तरीकों से लोगों को किस तरह अपने जाल में फंसाते हैं। इसके साथ ही फर्जी नौकरी के ऑफर, विदेश में नौकरी दिलाने का लालच और नौकरी के नाम पर पैसे की मांग जैसे मामलों से भी सावधान रहने की जानकारी दी जाएगी। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत, निजी जानकारी साझा करने और संदिग्ध लिंक खोलने के खतरों के बारे में भी बच्चों को समझाया जाएगा। मानव तस्करी के मामलों में संदिग्ध गतिविधियों को पहचानना और ऐसी स्थिति सामने आने पर किसे सूचना देनी है, इसकी जानकारी भी प्रशिक्षण का हिस्सा होगी।

पुलिस और विशेषज्ञ बताएंगे बचने के तरीके

बाल प्रहरी का काम किसी संदिग्ध व्यक्ति से खुद भिड़ना नहीं होगा। अगर उन्हें स्कूल या आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है तो वे इसकी जानकारी शिक्षक या संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को देंगे। इसके लिए पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और विशेषज्ञों की मदद से प्रशिक्षण दिया जाएगा। कोशिश रहेगी कि बच्चों को सिर्फ किताबी जानकारी न मिले, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में सुरक्षित रहने के व्यावहारिक तरीके भी समझाए जाएं। जिला विद्यालय निरीक्षक विजय कुमार सिंह के अनुसार, क्लब के जरिए विद्यार्थियों को साइबर अपराध और मानव तस्करी के खतरों को समझने और उनसे बचने के उपायों की जानकारी दी जाएगी।

साइबर ठगी होने पर 1930, आपात स्थिति में 112

बच्चों को शिकायत और मदद के लिए उपलब्ध जरूरी नंबरों की जानकारी भी दी जाएगी। अगर किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो 1930 पर शिकायत की जा सकती है। वहीं किसी आपात स्थिति में पुलिस की मदद के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। स्कूलों को क्लब के गठन और उसकी गतिविधियों का रिकॉर्ड भी रखना होगा। कार्यक्रमों की जानकारी, फोटो और दूसरी रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद गतिविधियों का विवरण राज्य स्तर के पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा।

बच्चों को ‘शिकार’ नहीं, सुरक्षा की कड़ी बनाने की कोशिश

इस पूरी पहल का सबसे अहम हिस्सा यही है कि बच्चों को केवल संभावित खतरे से बचने की सलाह नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें जागरूकता फैलाने वाली सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। एक बाल प्रहरी अपने साथियों को साइबर ठगी, फर्जी नौकरी और मानव तस्करी के खतरों के बारे में बताएगा। जरूरत पड़ने पर वह किसी शिक्षक या जिम्मेदार व्यक्ति तक सूचना पहुंचाने में भी मदद करेगा।

बाल प्रहरी क्यों हैं खास?

डिजिटल दौर में बच्चों की इंटरनेट और सोशल मीडिया तक पहुंच तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ साइबर ठगी, फर्जी नौकरी, ऑनलाइन लालच और मानव तस्करी जैसे खतरे भी सामने हैं। ऐसे में स्कूलों में बनने वाले एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब बच्चों को इन खतरों को पहचानने और समय रहते सही कदम उठाने के लिए तैयार कर सकते हैं। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता की मजबूत कड़ी भी बन सकते हैं।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/ app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/store/ apps/details?id=com. inventifweb.newspin& pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos