अब उज्बेकिस्तान में भी चलेगा भारतीय UPI, PM मोदी के दौरे में 11 ऐतिहासिक समझौते

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने का काम किया है। दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का फैसला किया है। इस दौरे के दौरान 11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए हैं।

संस्कृति और आयुर्वेद पर जोर

इस यात्रा में संस्कृति, आयुर्वेद, खनिज संसाधन, पर्यटन, शिक्षा, पर्यावरण, वित्त और वैज्ञानिक शोध जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत 2026 से 2030 तक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर समझौता हुआ है। यह कार्यक्रम दोनों देशों के सांस्कृतिक संपर्क और आदान-प्रदान को और मजबूत करेगा।

ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों का संरक्षण

भारत उज्बेकिस्तान के प्राचीन बौद्ध स्थलों—फयाज टीपा और करा टीपा के संरक्षण में भी मदद करेगा। यह दोनों स्थल उज्बेकिस्तान के तेरमेज क्षेत्र में स्थित हैं, और भारत के विदेश मंत्रालय व उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के बीच लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

खनिज संसाधनों में सहयोग

खनिज संसाधनों और खनन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत के खान मंत्रालय और उज्बेकिस्तान के खनन उद्योग एवं भूविज्ञान मंत्रालय के बीच भूविज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इस क्षेत्र में एक साझेदारी कार्यक्रम 2026 से 2028 के लिए शुरू किया जाएगा।

UPI की बड़ी घोषणा

इसके अलावा, भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र, UPI को उज्बेकिस्तान में विस्तार देने का भी निर्णय लिया गया है। एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर (NIPC) के बीच एक वाणिज्यिक समझौता हुआ है। इसके माध्यम से भारतीय UPI ऐप से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय QR कोड UZQR को स्कैन कर व्यापारिक भुगतान किया जा सकेगा। यह भारतीय तकनीक का एक बड़ा कदम है।

शिक्षा और पर्यावरण में समझौतें

भारत और उज्बेकिस्तान के वित्त मंत्रालयों के बीच आर्थिक और वित्तीय संवाद को शुरू करने के लिए भी एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। भारत ने अरल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए 10 लाख डॉलर देने की घोषणा की है।

हिंदी भाषा के लिए छात्रवृत्तियां

हिंदी भाषा के प्रचार के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति के तहत 100 छात्रवृत्तियां देने की घोषणा की गई है। साथ ही, ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में आईसीसीआर संस्कृत चेयर स्थापित की जाएगी।

उज़्बेकिस्तान के साथ संबंधों में मजबूती

समग्रतः, यह यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन समझौतों से न केवल दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा, बल्कि सांस्कृतिक सरोकार और आर्थिक विकास में भी मदद मिले

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