हर 7 दिन में एक नशेड़ी पायलट की पहचान, डोप टेस्ट पर क्यों बदलेगा नियम?

The CSR Journal Magazine
भारत में पायलटों की फिटनेस पर नजर रखने के लिए सरकार नए डोप टेस्ट मानकों पर विचार कर रही है। मौजूदा 10% रैंडम टेस्टिंग के बजाय, हर पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट कराने का सुझाव चर्चा में है। इस बदलाव का उद्देश्य विमान की सुरक्षा को और बेहतर बनाना है। हाल ही में एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में हुई घटना के बाद इसे तेजी से अमल में लाने की बातें चल रही हैं।

पहले की घटनाएं और सुरक्षा की चिंता

जोकि कई मौकों पर यह साबित हो चुका है कि परीक्षण में लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। 2015 से 2018 के बीच, 181 पायलट ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे। इसी तरह, 2020 से जून 2022 तक 210 पायलट और क्रू मेंबर सस्पेंड हुए। औसतन हर 7 दिन में एक पायलट जांच में फेल हो रहा है।

क्या मौजूदा व्यवस्था में कमी है?

प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, अब हर पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट होना अनिवार्य होगा। मौजूदा नियम के तहत, एयरलाइंस को केवल 10% पायलटों का रैंडम टेस्ट करना पड़ता है। इस प्रणाली में कुछ पायलट वर्षों तक जांच के दायरे से बाहर रह सकते हैं, जिससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

फुकेत-दिल्ली घटना का बढ़ता प्रभाव

4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में एक गंभीर टर्बुलेंस की घटना घटी। इस घटना ने पायलटों के डोप टेस्ट को लेकर नया संशय खड़ा कर दिया और सरकार ने इस संबंध में अपनी नीति की समीक्षा शुरू कर दी है।

क्या होगा नए नियमों का असर?

100% डोप टेस्टिंग को लेकर सरकार को सुरक्षा लाभ और इसके एयरलाइंस पर पड़ने वाले ऑपरेशनल असर का भी ध्यान रखना होगा। नए नियम लागू होने से हर साल पायलटों का टेस्ट अनिवार्य हो जाएगा, लेकिन टेस्ट का समय पहले से निर्धारित नहीं होगा। इस बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि सभी पायलटों की नियमित जांच हो रही है या नहीं।

आगे की राह

सरकार और DGCA इस बदलाव की संभावनाओं पर गहनता से विचार कर रहे हैं। अगर नए नियम लागू होते हैं, तो यह पायलटों की फिटनेस की स्थिति को एक मजबूत आधार देगा। यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ एयरलाइंस के संचालन पर प्रभाव का भी अध्ययन किया जा रहा है।

बदलाव की आवश्यकता क्यों?

यात्री विमान में बैठते समय मानते हैं कि कॉकपिट में मौजूद पायलट पूरी तरह से फिट और जागरूक हैं। अगर कोई पायलट डोप टेस्ट में फेल होता है, तो यह न केवल यात्रियों के लिए खतरा है, बल्कि यह एयरलाइंस की विश्वसनीयता पर भी विचारणीय है। इसलिए, नए नियमों का उद्देश्य स्पष्ट रूप से सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

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