अदियाला जेल से शिफा अस्पताल पहुंचे Imran khan, इलाके में फैली सुरक्षा चादर

The CSR Journal Magazine
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया है। इमरान खान को पिछले साल भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर आरोपों में 17 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके समर्थक और पार्टी के प्रवक्ता जुल्फी बुखारी ने इस ट्रांसफर की पुष्टि की है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सड़कों को किया गया बंद

इस्लामाबाद में शिफा अस्पताल के पास पुलिस की भारी तैनाती की गई है। इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। अस्पताल से जुड़ने वाली सड़कों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं और वहां आम नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इमरान खान के समर्थकों का कहना है कि वे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं और उन्हें बेहतर इलाज मिलने की आशा है।

समर्थकों का इकट्ठा होना, खुशियों का माहौल

इमरान खान के समर्थक अस्पताल के बाहर इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने लाल फूलों की पंखुड़ियां वहां खड़ी गाड़ियों पर फेंकीं और इमरान खान के प्रति अपना समर्थन जताया। एक समर्थक यूनुस कुरैशी ने कहा कि वे उस व्यक्ति के लिए आए हैं जिसने पाकिस्तान के लिए बहुत कुछ किया है। वहीं, 52 वर्षीय बिलाल ने उम्मीद जताई कि पूर्व क्रिकेट कप्तान को उचित चिकित्सा मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

इमरान खान के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें तात्कालिक चिकित्सा की आवश्यकता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि खान को दो दिनों के अंदर अस्पताल में भर्ती कराया जाए। इससे पहले, उन्हें आंखों के इलाज के लिए भी अस्पताल ले जाया गया था।

परिवार से मिलने की अनुमति, खिलाड़ियों के साथ जुड़ाव

कोर्ट ने आदेश दिया है कि इमरान खान को हफ्ते में एक बार अपने परिवार से मिलने की अनुमति मिलेगी। उन्हें अपने बेटों से टेलीफोन पर बात करने का भी अवसर दिया जाएगा। इसके साथ ही, विशेषज्ञों का एक पैनल इमरान खान के इलाज के लिए तैयार किया जाएगा। उनके परिवार की डॉक्टर उजमा खान को भी इसमें शामिल होने की इजाज़त दी गई है।

इमरान खान का राजनीतिक सफर और चुनौतियाँ

इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाया गया, जो कि उनके और देश की सेना के बीच तनाव की वजह से हुआ। उनके कब्जे में आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जो उनकी लोकप्रियता का सबूत था।

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