ऑटो वालों से किराये की बहस खत्म! ठाणे स्टेशन पर शुरू हुई प्रीपेड रिक्शा सेवा, ठाणे स्टेशन पर यात्रियों को बड़ी राहत
ठाणे रेलवे स्टेशन से ऑटो-रिक्शा लेने वाले यात्रियों के लिए परिवहन विभाग ने नई प्रीपेड ऑटो सेवा शुरू की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्टेशन के बाहर यात्रियों और ऑटो चालकों के बीच किराये को लेकर होने वाली बातचीत, मोलभाव, छोटी दूरी के लिए यात्रा से इनकार और अधिक किराया वसूलने जैसी शिकायतों को कम करना है। नई व्यवस्था में यात्री पहले अपना गंतव्य बताएगा, निर्धारित किराया जमा करेगा और उसके बाद कतार में मौजूद पंजीकृत ऑटो चालक को यात्री लेने की सूचना दी जाएगी। इस तरह यात्रा शुरू होने से पहले ही किराया तय हो जाएगा और यात्री को रास्ते में किराये को लेकर बातचीत करने की जरूरत नहीं होगी।
ठाणे परिवहन विभाग के अनुसार यह सुविधा फिलहाल स्टेशन क्षेत्र सुधार योजना (SATIS) के तहत बनाए गए निर्धारित स्थान से संचालित की जा रही है। इसके लिए अलग कार्यालय बनाया गया है, जहां पहुंचकर यात्री अपना गंतव्य बताएगा और यात्रा का भुगतान करेगा। भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कतार में मौजूद पंजीकृत ऑटो चालक को यात्री की जानकारी दी जाएगी। चालक निर्धारित व्यवस्था के अनुसार यात्री को लेने पहुंचेगा और उसे गंतव्य तक पहुंचाएगा।
पहले भुगतान, फिर ऑटो की सुविधा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यात्री को स्टेशन से बाहर निकलकर अलग-अलग ऑटो चालकों से किराये के बारे में पूछताछ करने या मोलभाव करने की जरूरत नहीं होगी। प्रीपेड काउंटर पर गंतव्य बताने के बाद यात्री को पहले से तय किराये की जानकारी मिलेगी। भुगतान के बाद उसे ऑटो उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था में ऑटो चालक और यात्री के बीच किराये को लेकर सीधे बातचीत की आवश्यकता नहीं होगी। परिवहन विभाग का मानना है कि इससे उन परिस्थितियों को कम किया जा सकेगा जिनमें यात्री को गंतव्य बताने के बाद चालक यात्रा करने से इनकार कर देता है या किराये को लेकर विवाद हो जाता है। खासकर स्टेशन से कम दूरी वाले स्थानों के लिए ऑटो नहीं मिलने की शिकायतें लंबे समय से यात्रियों की प्रमुख समस्याओं में रही हैं।
करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क, चालक को मिलेगा लाभ
प्रीपेड सेवा में यात्रियों को सामान्य निर्धारित किराये की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। परिवहन विभाग के उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रोहित काटकर के अनुसार यह अतिरिक्त राशि संबंधित ऑटो चालकों को प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक ऑटो चालकों को इस व्यवस्था से जोड़ना है। अधिकारियों के मुताबिक ऑटो चालक की रोजाना की कमाई पर असर न पड़े, इसलिए व्यवस्था में बदलाव करते हुए भुगतान की राशि चालक के खाते में उसी दिन के भीतर भेजने का प्रावधान किया गया है। यानी यात्री के लिए सेवा का खर्च सामान्य किराये से कुछ अधिक होगा, लेकिन इसके बदले उसे पहले से तय किराया, ऑटो की उपलब्धता और बिना मोलभाव यात्रा की सुविधा मिलेगी। दूसरी ओर चालक को भी प्रीपेड सेवा में शामिल होने के लिए अतिरिक्त राशि का लाभ मिलेगा।
करीब 100 ऑटो चालक पहले ही जुड़े
सेवा शुरू होने के समय ठाणे में करीब 100 ऑटो चालकों ने इसमें पंजीकरण कराया था। परिवहन विभाग को उम्मीद है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया और सेवा के इस्तेमाल के आधार पर आने वाले समय में और चालक इस व्यवस्था से जुड़ेंगे। अधिक चालक जुड़ने से यात्रियों को ऑटो उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी। यदि व्यवस्था लोकप्रिय होती है तो इसे और व्यापक बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल इसका संचालन ठाणे रेलवे स्टेशन से शुरू किया गया है।
दो साल से प्रस्ताव पर चल रही थी प्रक्रिया
ठाणे के उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रोहित काटकर के अनुसार प्रीपेड ऑटो सुविधा का प्रस्ताव करीब दो वर्षों से विचाराधीन था। प्रशासनिक और तकनीकी स्तर की कई चुनौतियों के कारण इसे लागू करने में समय लगा। अंततः आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद इसे शुरू किया गया है। यह व्यवस्था इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि ठाणे रेलवे स्टेशन शहर के प्रमुख परिवहन केंद्रों में शामिल है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन से यहां पहुंचते हैं और स्टेशन से अपने घर, कार्यालय, बाजार या अन्य स्थानों तक जाने के लिए ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ अधिक होने के कारण ऑटो की उपलब्धता और किराये को लेकर होने वाली शिकायतों का सीधा असर यात्रियों के अनुभव पर पड़ता है।
किराये को लेकर विवाद रोकने की कोशिश
स्टेशन के बाहर ऑटो लेने के दौरान आम तौर पर यात्री और चालक के बीच सबसे पहले गंतव्य और किराये को लेकर बातचीत होती है। कुछ मामलों में यात्री को अपेक्षित किराये से अधिक राशि बताई जा सकती है, जबकि कुछ मामलों में चालक छोटी दूरी के लिए जाने से मना कर सकता है। प्रीपेड व्यवस्था इन दोनों स्थितियों को कम करने की कोशिश करती है। यात्री पहले काउंटर पर गंतव्य बताएगा और भुगतान करेगा। चालक को भी यात्री के गंतव्य और यात्रा की जानकारी व्यवस्था के माध्यम से मिलेगी। इस तरह यात्रा शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच किराये को लेकर सहमति स्थापित हो जाएगी। इस व्यवस्था का एक फायदा यह भी हो सकता है कि यात्री को स्टेशन परिसर के बाहर खड़े कई ऑटो चालकों से बार-बार बातचीत करने की जरूरत न पड़े। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं, पहली बार ठाणे आने वाले यात्री और सामान लेकर चलने वाले लोगों के लिए यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो सकती है।
सेवा का संचालन सिटीफ्लो के माध्यम से
इस पूरी व्यवस्था की योजना और प्रबंधन Cityflo के माध्यम से किया जाएगा। यात्री की बुकिंग और भुगतान के बाद संबंधित पंजीकृत ऑटो चालक को सूचना भेजी जाएगी। चालक कतार में अपनी बारी के अनुसार यात्री को लेने पहुंचेगा। व्यवस्था में कतार का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चालकों के बीच यात्रियों को लेकर प्रतिस्पर्धा कम करने में मदद मिल सकती है। यात्री सीधे किसी पसंदीदा चालक से सौदा करने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध ऑटो प्राप्त करेगा।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नई सेवा के तहत यात्रियों के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत स्पष्ट रखी गई है। स्टेशन पर प्रीपेड सुविधा के निर्धारित काउंटर पर पहुंचने के बाद यात्री को अपना गंतव्य बताना होगा। इसके बाद निर्धारित किराया बताया जाएगा और भुगतान किया जाएगा। भुगतान के बाद पंजीकृत ऑटो चालक को यात्री को लेने की सूचना दी जाएगी। यात्रा शुरू होने के बाद किराये को लेकर बातचीत की आवश्यकता नहीं होगी। इससे यात्री को यात्रा की कुल लागत पहले से पता रहेगी। यह व्यवस्था उन यात्रियों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है जिन्हें स्टेशन से बाहर निकलने के बाद ऑटो उपलब्ध कराने में परेशानी होती है।
ऑटो चालकों के लिए भी प्रोत्साहन
किसी भी प्रीपेड परिवहन व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पर्याप्त संख्या में चालक उससे जुड़ें। यदि चालक इस व्यवस्था को अपनी आय के लिए कम लाभकारी मानते हैं तो सेवा का विस्तार मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से परिवहन विभाग ने करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया है। अधिकारी के मुताबिक यह राशि चालक को प्रोत्साहन के तौर पर दी जाएगी। साथ ही भुगतान को उसी दिन चालक के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इससे चालकों को अपनी दैनिक कमाई के संदर्भ में इस सेवा को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पहले भी लागू हो चुकी है ऐसी व्यवस्था
ठाणे में प्रीपेड ऑटो की व्यवस्था पहले भी लागू की गई थी। इसी तरह लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) पर भी कुछ वर्ष पहले ऐसी सुविधा शुरू की गई थी। ठाणे परिवहन विभाग के अनुसार बाद में अलग-अलग कारणों से ये व्यवस्थाएं बंद हो गई थीं। अब नई व्यवस्था को तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों के साथ फिर शुरू किया गया है। इस बार व्यवस्था को तकनीकी माध्यम से संचालित करने और भुगतान को सीधे चालक के खाते तक पहुंचाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इससे सेवा के संचालन और भुगतान संबंधी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित रखने का प्रयास किया गया है।
स्टेशन से शुरू, आगे विस्तार की संभावना
फिलहाल इस सेवा की शुरुआत ठाणे रेलवे स्टेशन से की गई है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया और सेवा की लोकप्रियता के आधार पर अधिक ऑटो चालकों को इससे जोड़ा जाएगा तथा इसके दायरे को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। यदि पर्याप्त संख्या में चालक इस व्यवस्था से जुड़ते हैं और यात्रियों को नियमित रूप से ऑटो उपलब्ध होने लगता है तो स्टेशन से बाहर निकलने के बाद परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकती है। वहीं, सेवा की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि काउंटर पर यात्रियों को कितनी तेजी से सेवा मिलती है, भुगतान व्यवस्था कितनी सुचारु रहती है और कतार प्रबंधन किस तरह किया जाता है।
यात्रियों को अब किराये की अनिश्चितता से राहत की उम्मीद
ठाणे रेलवे स्टेशन पर शुरू की गई प्रीपेड ऑटो सेवा का मूल उद्देश्य यात्रा शुरू होने से पहले किराया और वाहन दोनों सुनिश्चित करना है। यात्री को पहले से पता रहेगा कि उसे कितना भुगतान करना है और भुगतान के बाद उसे पंजीकृत ऑटो उपलब्ध कराया जाएगा। करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क के बदले यात्रियों को निश्चित किराया और बिना मोलभाव यात्रा की सुविधा मिलेगी, जबकि अतिरिक्त राशि चालकों के लिए प्रोत्साहन के रूप में काम करेगी। शुरुआत में करीब 100 चालक इस व्यवस्था से जुड़ चुके हैं और प्रशासन को उम्मीद है कि संख्या आगे बढ़ेगी।
अगर व्यवस्था नियमित रूप से संचालित होती है और पर्याप्त संख्या में ऑटो चालक इससे जुड़ते हैं, तो ठाणे स्टेशन पर ऑटो सेवा को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल इसका सबसे बड़ा बदलाव यही है कि यात्री को पहले किराया पता चलेगा, भुगतान होगा और उसके बाद तय प्रक्रिया के तहत ऑटो मिलेगा—यानी स्टेशन से निकलते ही किराये को लेकर होने वाली अनिश्चितता और मोलभाव की स्थिति को कम करने का प्रयास।
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