IAS छोड़ने वाली दिव्या मित्तल करेंगी राजनीति, लेकिन किसी दल के साथ नहीं

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद राजनीतिक यात्रा की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगी, बल्कि एक मंच पर आम लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं। उनका उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है। दिव्या मित्तल का कहना है कि उन्हें कुछ समय लगा अपने इस फैसले को स्पष्ट करने में।

उत्तर प्रदेश से शुरू करेंगे नए सफर की शुरुआत

दिव्या का कहना है कि उत्तर प्रदेश ने उन्हें परिवार का हिस्सा बना लिया है। वे इसे केवल एक कार्यस्थल नहीं मानतीं। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश ने हमेशा देश को दिशा दी है। लोगों को बदलाव की जिम्मेदारी खुद उठाने का आग्रह किया गया है। उनका मानना है कि हमें एक मसीहा की उम्मीद में बैठने के बजाए सक्रियता से आगे बढ़ना चाहिए।

बतौर अधिकारी अनुभव साझा किया

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का एक अनुभव साझा किया, जिसमें एक महिला ने हिम्मत जुटाकर स्कूल की अगली कक्षा शुरू कराने की मांग की। यह महिला अपने गांव के लिए जरूरी शिक्षा की उपलब्धता के लिए संघर्ष कर रही थी, लेकिन उसे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया और सवाल उठाया कि जब सब कुछ सुलझा था, तो काम क्यों नहीं हुआ।

राजनीति में रखा नया नजरिया

अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए दिव्या ने कहा कि उनका दल या पद हासिल करने का लक्ष्य नहीं है, बल्कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी समस्याएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। उन्होंने प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए कहा कि समस्या अक्सर इरादे की कमी की होती है, न कि संसाधनों की।

बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित

दिव्या ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बरसात में कई गांवों का संपर्क टूट जाता है और लोग वर्षों से इंतजार करते रह जाते हैं। सड़क, पुल और गड्ढों की समस्याएं सिर्फ आमजन के लिए नहीं, बल्कि जवाबदेही का सवाल भी हैं।

युवाओं की शिक्षा और भविष्य

दिव्या मित्तल ने पेपर लीक जैसी समस्याओं पर भी बात की, जो आज के युवाओं की मेहनत को प्रभावित कर रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई, कहा कि जल्द ही कई काम बदल सकते हैं, जिससे रोजगार के अवसरों पर खतरा मंडरा रहा है।

नई राजनीति का सपना, उदासीनता और महिला शक्ति

दिव्या ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को बदलना नहीं है; उन्हें उम्मीद है कि वे राजनीति के काम करने के तरीकों को बदल सकती हैं। उनकी चार प्रमुख शब्द हैं – इरादा, न्याय, फिक्र और सोच। वे यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि राजनीति में जनता की आवाज सुनी जाए। दिव्या ने अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर चल रहे अफवाहों का जिक्र किया और कहा कि इससे महिलाओं को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्हें विश्वास है कि वे इस दबाव से प्रभावित नहीं होंगी।

बाहुबल और पूंजी का नहीं, लोगों की ताकत की राजनीति

राजनीतिक संसाधनों पर टिप्पणी करते हुए, दिव्या ने कहा कि उन्हें चुनावी राजनीति के लिए बड़ा आर्थिक संसाधन नहीं चाहिए। उनका मानना है कि आर्थिक संसाधनों का विकास में उपयोग होना चाहिए। वह जातिगत और धार्मिक समीकरणों से परे रहने की इच्छा रखती हैं।

अस्तित्व में आमूलचूल परिवर्तन का लक्ष्य

दिव्या मित्तल ने कहा कि 15 सितंबर से उनका आईएएस का सफर खत्म हुआ। उन्होंने अपने परिवार, लेखन, शिक्षण और समाज सेवा के नए लक्ष्यों की ओर भी इशारा किया। उनका एकल जीवन का यह चैप्टर अब राजनीति में सक्रियता के साथ बदलने वाला है।

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