दिल्ली में लोकतंत्र का सबसे बड़ा शुद्धि अभियान: हर तीसरा वोटर SIR ड्राफ्ट लिस्ट की मुख्य धारा से गायब

The CSR Journal Magazine

दिल्ली में 47 लाख मतदाता वोटर लिस्ट से होंगे बाहर! SIR का पहला चरण पूरा, बड़ा बदलाव सामने

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिल्ली में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-Special Intensive Revision) अभियान का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण सोमवार, 17 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और दिल्ली की राजनीति में हलचल पैदा करने वाले हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अशोक कुमार के कार्यालय से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख से अधिक मतदाताओं (यानी करीब 33 प्रतिशत) के नाम आगामी 24 अगस्त को जारी होने वाली मसौदा (ड्राफ्ट) मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जा सकेंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि दिल्ली का हर तीसरा मतदाता फिलहाल आधिकारिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की मुख्य धारा से बाहर हो गया है।

47.62 लाख Uncollectable नाम

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की कुल मतदाता संख्या 1,45,10,299 है। इस व्यापक अभियान के दौरान घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने और उन्हें डिजिटल रूप में संकलित करने की 45 दिनों की लंबी प्रक्रिया के बाद केवल 97,47,879 मतदाताओं (67.18 प्रतिशत) के ही ‘गणना प्रपत्र’ (Enumeration Forms) सफलतापूर्वक जमा और डिजिटाइज किए जा सके हैं। शेष बचे लगभग 47.62 लाख मतदाताओं के प्रपत्र या तो वापस नहीं मिले, या वे अपने पते पर उपलब्ध नहीं पाए गए, जिसके कारण उन्हें चुनाव आयोग की तकनीकी भाषा में ‘एकत्र न किए जा सकने वाले’ (Uncollectable) प्रपत्रों की श्रेणी में डाल दिया गया है।

आंकड़ों की जुबानी: डिजिटल होने और छूटने का गणित

इस पूरे पुनरीक्षण अभियान की जटिलता और विशालता को इसके आंकड़ों से समझा जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने इस शुद्धि अभियान के लिए पूरी दिल्ली में लगभग 13,000 बूथ स्तर के अधिकारियों BLOs को तैनात किया था। इन अधिकारियों का मुख्य कार्य दिल्ली के प्रत्येक पंजीकृत नागरिक के घर जाकर उनके विवरण को सत्यापित करना और एक आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र सौंपना था, ताकि वर्ष 2002 के मूल आधार डेटाबेस से कड़ियों को जोड़ा जा सके। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, हालांकि फॉर्म वितरण की दर दिल्ली के सभी 13 जिलों में शत-प्रतिशत रही, यानी अधिकारियों ने सभी पंजीकृत घरों तक पहुंचने का पूरा प्रयास किया, लेकिन उन प्रपत्रों को वापस प्राप्त करने और उनके डिजिटलीकरण की गति में भारी क्षेत्रीय असमानता देखी गई। सोमवार रात जैसे ही BLO ऐप तक अधिकारियों की पहुंच बंद हुई, दिल्ली के 32.82 प्रतिशत वोटरों का भविष्य एक अनिश्चितता के दौर में चला गया, क्योंकि अब वे सीधे तौर पर ड्राफ्ट सूची में दिखाई नहीं देंगे।

आखिर क्यों बाहर हो रहे हैं 33 प्रतिशत मतदाता?

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के विवरण न मिल पाने के पीछे दिल्ली की विशिष्ट जनसांख्यिकीय और भौगोलिक प्रकृति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली जैसे महानगर में 33 प्रतिशत मतदाताओं का नाम प्रभावित होना पूरी तरह से ‘अपेक्षित’ था। इसके पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण रेखांकित किए गए हैं।

प्रवासी और फ्लोटिंग आबादी का उच्च घनत्व

दिल्ली देश की प्रशासनिक और आर्थिक राजधानी होने के कारण देश भर के प्रवासी मजदूरों, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और छात्रों का मुख्य केंद्र है। यह आबादी अक्सर रोजगार और शिक्षा के सिलसिले में दिल्ली आती-जाती रहती है और बिना अपना स्थायी पता अपडेट कराए एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में या अपने गृह राज्य में स्थानांतरित (Shift) हो जाती है।

शहरी क्षेत्रों में किराएदारों का बार-बार बदलना

दिल्ली के मध्यमवर्गीय और रिहायशी इलाकों में किराए पर रहने वाले लोग अमूमन हर एक-दो साल में अपना मकान बदल लेते हैं। पुराने पते पर वोटर आईडी कार्ड बने रहने और नए पते पर पंजीकरण न कराने के कारण बीएलओ को भौतिक सत्यापन के दौरान वे लोग पुराने ठिकानों पर नहीं मिले।

मृत्यु और नाम का दोहराव (Duplicate Entries)

कई मामलों में मतदाताओं की मृत्यु हो जाने के बाद भी उनके नाम मतदाता सूची से विधिवत नहीं हटाए गए थे। इसके अतिरिक्त, एक ही मतदाता के दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों या दिल्ली और उनके गृह राज्यों में दोहरे पंजीकरण की पुरानी समस्याओं को भी इस ‘SIR’ प्रक्रिया ने पकड़ लिया है। ऐसे सभी मतदाता जिनके विवरणों का सत्यापन भौतिक रूप से नहीं हो सका, उन्हें चुनाव आयोग ने एएसडीडीओ (ASDDO – Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others) यानी ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव’ की श्रेणी में वर्गीकृत किया है।

रोहिणी शीर्ष पर, तुगलकाबाद सबसे फिसड्डी

दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और जिलों से आए अंतिम आंकड़ों में बहुत बड़ी भिन्नता देखने को मिली है। कुछ क्षेत्रों ने जहां तकनीकी और प्रशासनिक रूप से बेहतरीन प्रदर्शन किया, वहीं कुछ वाणिज्यिक और घनी आबादी वाले इलाके इस दौड़ में पिछड़ गए।

रोहिणी ने मारी बाजी

उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी निर्वाचन क्षेत्र ने पूरी दिल्ली में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यहाँ कुल 1,50,398 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,25,478 मतदाताओं के प्रपत्रों का सफलतापुर्वक डिजिटलीकरण किया गया, जो कि कुल संख्या का 83.43 प्रतिशत है। इस क्षेत्र में केवल 24,920 प्रपत्रों को ही ‘एकत्र नहीं किए गए’ की श्रेणी में रखा गया है। रोहिणी के अलावा शकूरबस्ती (81.26 प्रतिशत), राजौरी गार्डन (79.14 प्रतिशत), मंगोलपुरी (78.76 प्रतिशत) और उत्तम नगर (77.76 प्रतिशत) ऐसे निर्वाचन क्षेत्र रहे जहां डिजिटलीकरण की दर काफी ऊंची रही।

तुगलकाबाद और ओखला में सबसे कम भागीदारी

इसके विपरीत, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली का तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र डिजिटलीकरण और फॉर्म जमा करने के मामले में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। यहाँ केवल 52.15 प्रतिशत वोटरों के ही प्रपत्र सत्यापित हो सके, जबकि शेष 47.85 प्रतिशत मतदाता अपने पते पर अनुपलब्ध या अप्राप्य पाए गए। इसी तरह, मुस्लिम-बहुल ओखला निर्वाचन क्षेत्र दूसरा सबसे कम प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जहाँ महज 54.66 प्रतिशत फॉर्म जमा हो सके। कस्तूरबा नगर (56 प्रतिशत) और कालकाजी (57 प्रतिशत) का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा। यदि जिला स्तर पर बात करें, तो आउटर नॉर्थ (बाहरी उत्तरी दिल्ली) जिला 75.66 प्रतिशत की डिजिटाइजेशन दर के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद पश्चिम जिला (73.17 प्रतिशत) और दक्षिण-पश्चिम जिला (73.03 प्रतिशत) का स्थान आता है। वहीं दूसरी ओर, साउथ ईस्ट (दक्षिण-पूर्वी) दिल्ली जिला सबसे निचले पायदान पर रहा, जहाँ 15.57 लाख कुल प्रपत्रों में से केवल 8.71 लाख (55.94 प्रतिशत) प्रपत्र ही सत्यापित और डिजिटाइज किए जा सके। इसके बाद नई दिल्ली जिला (60.68 प्रतिशत), दक्षिण दिल्ली (61.05 प्रतिशत) और मध्य दिल्ली (61.87 प्रतिशत) का स्थान रहा।

अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में जागरूकता का मिलाजुला असर

चुनाव आयोग के आंकड़ों में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि दिल्ली के कई अल्पसंख्यक-बहुल विधानसभा क्षेत्रों में प्रपत्रों को जमा करने और डिजिटल करने के प्रति मतदाताओं में तुलनात्मक रूप से अधिक सतर्कता और सक्रियता देखी गई है।सीईओ कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मुस्तफाबाद में 71.91 प्रतिशत, मटिया महल में 75.5 प्रतिशत, सीलमपुर में 76.63 प्रतिशत, बाबरपुर में 73 प्रतिशत और बल्लीमारान में 67.35 प्रतिशत प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया है, जो कि दिल्ली के औसत से काफी बेहतर या उसके आसपास है। हालांकि, इसी श्रेणी में आने वाले चांदनी चौक निर्वाचन क्षेत्र में यह दर केवल 61.02 प्रतिशत रही, जो कि इस क्षेत्र की घनी व्यापारिक आबादी और स्थानीय विस्थापन को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्थानीय सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों के कारण लोग बीएलओ को अपने फॉर्म सौंपने के प्रति अधिक गंभीर थे।

नाम कटने के खतरे के बीच मतदाताओं के लिए क्या है उम्मीद?

३३ प्रतिशत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में न होने की खबर से निश्चित रूप से दिल्ली की जनता के बीच एक घबराहट और असमंजस का माहौल बन गया है, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कोई अंतिम सूची नहीं है और किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक का मताधिकार स्थायी रूप से नहीं छीना जा रहा है। आयोग ने उन मतदाताओं के लिए एक बेहद पारदर्शी और सुलभ ‘दावे और आपत्ति’ प्रक्रिया की घोषणा की है, जिनके नाम इस शुरुआती चरण में बाहर हो गए हैं।

आगामी महत्वपूर्ण तिथियां और समयसीमा (टाइमलाइन)

24 अगस्त, 2026: मतदाता सूची के इस विशेष गहन पुनरीक्षण की आधिकारिक मसौदा (ड्राफ्ट) सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसी दिन ASDDO श्रेणी के तहत आने वाले संदिग्ध नामों की एक अलग सूची भी सार्वजनिक की जाएगी।
24 अगस्त से 23 सितंबर, 2026: यह एक महीने की अवधि उन सभी मतदाताओं के लिए संजीवनी साबित होगी जिनका नाम लिस्ट में नहीं है। इस दौरान मतदाता अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे और नए सिरे से नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
24 अगस्त से 22 अक्टूबर, 2026: इस दो महीने की अवधि के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों की गहन जांच करेगा, मतदाताओं को नोटिस जारी कर विसंगतियों को दूर करेगा और उनका कानूनी निपटारा करेगा।
27 अक्टूबर, 2026: दिल्ली की अंतिम और पूर्ण रूप से संशोधित मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का प्रकाशन किया जाएगा, जो आगामी चुनावों का मुख्य आधार बनेगी।

वोटर लिस्ट में दोबारा नाम शामिल कराने की चरणबद्ध प्रक्रिया

यदि 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट लिस्ट में आपका नाम गायब मिलता है, तो आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे-
फॉर्म-6 का उपयोग: जिन मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हैं, वे ‘दावे और आपत्ति’ की अवधि (24 अगस्त से 23 सितंबर) के दौरान नए पंजीकरण या पते के सुधार के लिए फॉर्म-6 (Form 6) भर सकते हैं।
नोटिस का जवाब और भौतिक सत्यापन: जिन लोगों ने अधूरे फॉर्म जमा किए थे या जिनकी जानकारी वर्ष 2002 के आधार डेटा से मेल नहीं खा रही है, उन्हें CEO कार्यालय से नोटिस भेजे जाएंगे। मतदाताओं को इन नोटिसों का जवाब तय समय में देना होगा, जिसके बाद बूथ स्तर के अधिकारी BLO पुनः उनके घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध

मतदाता भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) या वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा वे अपने क्षेत्र के एसडीएम (SDM) कार्यालय या स्थानीय मतदाता पंजीकरण केंद्र पर जाकर ऑफलाइन मोड में भी प्रपत्र जमा कर सकते हैं।

सत्यापन के लिए आवश्यक दस्तावेज

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त होंगे, वे अपनी पात्रता और पते को प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का पुराना वोटर कार्ड नंबर (विशेषकर वर्ष 2002 का रिकॉर्ड), आधार कार्ड, बिजली या पानी का बिल, पासपोर्ट, बैंक पासबुक और राशन कार्ड जैसे वैध आधिकारिक दस्तावेजों का उपयोग कर सत्यापन प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में गरमाया माहौल

दिल्ली जैसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील राज्य में, जहाँ एक-एक वोट चुनावी गणित को बदलने की क्षमता रखता है, एक साथ 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की खबर ने राजनीतिक दलों के कान खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस अभियान और डिजिटलाइजेशन की धीमी रफ्तार पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में नाम अंतिम सूची तक नहीं जुड़ पाते हैं, तो इसका सीधा असर दिल्ली के आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों के समीकरणों पर पड़ेगा। विभिन्न दलों ने अब अपने कार्यकर्ताओं और ‘बूथ लेवल एजेंट्स’ (BLAs) को सक्रिय कर दिया है, ताकि 24 अगस्त के बाद बड़े पैमाने पर फॉर्म-6 भरवाकर अपने समर्थकों के नाम मतदाता सूची में वापस जुड़वाए जा सकें।

लोकतंत्र का सफाई अभियान

निर्वाचन आयोग का यह ‘SIR’ अभियान लोकतंत्र की नींव को मजबूत और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में एक साहसिक और आवश्यक कदम है, बशर्ते प्रशासनिक मशीनरी यह सुनिश्चित करे कि इस तकनीकी शुद्धि की आड़ में दिल्ली का कोई भी वास्तविक और वैध नागरिक अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार ‘वोट’ से वंचित न रह जाए। आगामी 24 अगस्त से शुरू होने वाला एक महीना दिल्ली के इन 47 लाख नागरिकों के लिए परीक्षा की घड़ी होगी, जहाँ उन्हें अपनी लोकतांत्रिक सजगता का परिचय देते हुए मतदाता सूची में अपनी जगह वापस सुनिश्चित करनी होगी।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos