PM मोदी के हाथों प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट का शुभारंभ, दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति का जीर्णोद्धार

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इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर से बहरीन के श्रीनाथजी तक… PM मोदी के नेतृत्व में मंदिरों का जीर्णोद्धार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने ‘विरासत और विकास’ की नीति के तहत विदेशों में स्थित प्राचीन भारतीय और हिंदू मंदिरों का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार और संरक्षण किया है। इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर से लेकर बहरीन के श्रीनाथजी तक की यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Heritage Diplomacy) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका उद्देश्य सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को पुनर्जीवित करना है।

सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

पीएम मोदी आज इंडोनेशिया के 1000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट का शुभारंभ करेंगे। यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी ने 2014 के बाद से कई देशों में प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ किया है। प्रम्बानन मंदिर का महत्व इस बात में है कि यह केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय और इंडोनेशियाई संस्कृति की साझा विरासत का प्रतीक है।

संस्कृति, कला और वास्तुकला संरक्षण

दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में भारतीय संस्कृति, कला और वास्तुकला के संरक्षण में भारत सरकार का योगदान बेहद ऐतिहासिक और गहरा है। ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और सांस्कृतिक कूटनीति के तहत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस क्षेत्र के कई देशों में दुनिया के सबसे बड़े और प्राचीन मंदिरों को नया जीवन दिया है।

प्रम्बानन मंदिर का महत्व

यह मंदिर इंडोनेशिया के योग्यकार्ता में स्थित है और 9वीं शताब्दी में बनाया गया था। इसमें 240 मंदिर शामिल हैं, जो शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित हैं। रामायण की कहानी पत्थरों पर उकेरी गई है, जो इसे और भी विशेष बनाती है। कई बार भूकंप और विस्फोटों से यह क्षतिग्रस्त हुआ था, लेकिन इसे सहेजने की लगातार कोशिशें होती रही हैं। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया है, जो इसकी महत्ता को दर्शाता है।

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का जीर्णोद्धार

इंडोनेशिया के योग्याकार्ता में स्थित प्रम्बानन मंदिर (Prambanan Temple Complex) 1,000 साल से भी अधिक पुराना यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस जीर्णोद्धार कार्य में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इंडोनेशिया की संस्थाओं के साथ मिलकर आधुनिक और पारंपरिक एनास्टाइलोसिस तकनीक का उपयोग कर रहा है।

बहरीन के श्रीनाथजी मंदिर का पुनर्विकास

मनामा में स्थित श्रीनाथजी मंदिर (Shreenathji Temple) खाड़ी देशों (Gulf region) में स्थित सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक है।  इसका इतिहास 200 साल से भी अधिक पुराना है। 2019 में अपनी ऐतिहासिक बहरीन यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने इस मंदिर के $4.2 मिलियन (लगभग 35 करोड़ रुपये) के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था। लगभग 45,000 वर्ग फुट में बनने वाले इस भव्य तीन मंजिला परिसर में प्रार्थना कक्ष के अलावा, सामुदायिक कार्यक्रम और भारतीय शादियों के आयोजन की भी आधुनिक सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।

कंबोडिया में भारत का ऐतिहासिक योगदान

कंबोडिया भारत के विदेशी धरोहर संरक्षण प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। यहाँ भारत ने कई महत्वपूर्ण काम किए हैं-
दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्मारक अंकोरवाट का जीर्णोद्धार भारत का पहला और सबसे बड़ा विदेशी संरक्षण प्रोजेक्ट था। ASI की टीम ने 1986 से 1993 के बीच बेहद कठिन परिस्थितियों (जब वहाँ गृहयुद्ध और खमेर रूज का खतरा था) में काम किया। भारत ने मंदिर के मुख्य गर्भगृह से हानिकारक वनस्पतियों को हटाया, जल निकासी की व्यवस्था सुधारी और पत्थरों पर उकेरी गई रामायण-महाभारत की प्राचीन नक्काशी (bas-reliefs) को संरक्षित किया।

ता प्रॉम मंदिर (Ta Prohm)

वर्ष 2004 से ASI लगातार इस ‘ट्री टेम्पल’ के संरक्षण में जुटा हुआ है। यह मंदिर अपनी विशाल पेड़ों की जड़ों से घिरे होने के कारण प्रसिद्ध है। भारत यहाँ प्रकृति और वास्तुकला के बीच संतुलन बनाते हुए ढांचे को मजबूती दे रहा है।

प्रीह विहियर मंदिर (Preah Vihear)कंबोडिया

थाईलैंड सीमा पर स्थित भगवान शिव के इस 11वीं सदी के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण के लिए भारत ने 2018 में कंबोडिया के साथ समझौता किया और इसके पुनरुद्धार पर काम कर रहा है।

वियतनाम (माई सन सैंक्चुअरी)चंपा साम्राज्य की विरासत

वियतनाम के क्वांग नाम प्रांत में स्थित माई सन सैंक्चुअरी (Mỹ Sơn Sanctuary) प्राचीन चंपा साम्राज्य के शिव मंदिरों का केंद्र है। ASI ने 2017 में यहाँ संरक्षण कार्य शुरू किया था। खुदाई के दौरान भारतीय विशेषज्ञों को 9वीं शताब्दी का एक विशाल शिवलिंग भी मिला, जिसे भारत ने सुरक्षित पुनर्जीवित किया। वर्तमान में 2025 से 2029 के चरण के तहत ‘E-F टावर कॉम्प्लेक्स’ की 11 संरचनाओं को संरक्षित किया जा रहा है।

लाओस (वैट फू मंदिर)पहाड़ी शिव मंदिर

लाओस के चम्पासक प्रांत में स्थित वैट फू (Vat Phou) एक प्राचीन खमेर-हिंदू शिव मंदिर है। भारत सरकार यहाँ 2009 से लगातार जीर्णोद्धार का काम कर रही है। इसके दूसरे चरण का कार्य लगभग ₹24 करोड़ की अनुमानित लागत से 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य है।

म्यांमार (आनंद मंदिर)भूकंप से हुए नुकसान की मरम्मत

म्यांमार के ऐतिहासिक शहर बागन में स्थित प्रसिद्ध आनंद मंदिर (Ananda Temple) और कई बौद्ध पैगोडा जो 2016 के भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गए थे, उन्हें भारत के ASI विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से पूरी तरह से ठीक और मजबूत किया है। भारत द्वारा विदेशों में किया जा रहा यह काम केवल पत्थरों को जोड़ना नहीं है, बल्कि कूटनीतिक रूप से उन देशों को यह याद दिलाना है कि सदियों पहले व्यापार, संस्कृति और विचारों के माध्यम से हमारे पूर्वज एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

एशिया में अन्य प्रमुख मंदिर और धरोहर संरक्षण

पीएम मोदी की ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ के तहत भारत ने कई अन्य एशियाई देशों में भी प्राचीन भारतीय मंदिरों का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार किया है-
लाओस: भारत ने विश्व प्रसिद्ध वैट फू मंदिर (Vat Phou Temple) के जीर्णोद्धार में सहायता की, जो लगभग 1,000 साल पुराना शिव मंदिर है।
श्रीलंका: 1971 के युद्ध के दौरान नष्ट हुए ऐतिहासिक रामना काली मंदिर (Ramna Kali Temple) के पुनर्निर्माण में भारत ने वित्तीय अनुदान सहायता प्रदान की।
बांग्लादेश: नटोर के 300 साल पुराने जॉय काली माता मंदिर और अन्य प्राचीन हिंदू धर्मस्थलों के पुनर्विकास में भारत ने अहम भूमिका निभाई है।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति

यह संरक्षण परियोजना भारत की एक्ट ईस्ट नीति और दक्षिण-पूर्व एशिया में सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा है। मोदी सरकार ने विभिन्न देशों के साथ मिलकर सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया है। 2014 से अब तक भारत ने कई प्राचीन हिंदू मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों का जीर्णोद्धार किया है, जो साझा विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

चुनौतियाँ और प्रयास

2014 में भारत ने वियतनाम के प्रसिद्ध माई सोन अभयारण्य के जीर्णोद्धार कार्य को आरंभ किया, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के महत्वपूर्ण शिव मंदिरों में से एक है। इसमें भारत ने सम्पूर्ण सरकारी समर्थन प्रदान किया। 2015 में श्रीलंका के तिरुकेथीस्वरम मंदिर की मदद की गई, जिसे भगवान शिव को समर्पित किया गया है। इसके बाद, म्यांमार के बागान में भूकंप से टूटे स्मारकों की मरम्मत के लिए समझौता हुआ, जो भारतीय कूटनीति का एक और उदाहरण है।

साझा विरासत का पुनर्निर्माण

2017 में नेपाल में आए भूकंप के बाद भारत ने 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद से 28 सांस्कृतिक स्थलों का जीर्णोद्धार शुरू किया। बांग्लादेश में भी भारत ने कई मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद दी। 2021 में बांग्लादेश के रामना काली मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया, जो पाकिस्तान की सेना द्वारा नष्ट किया गया था। यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।

भारत का प्रयास

ये सभी प्रयास इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में गंभीर है और इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेशों में स्थित इन ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्धार न केवल प्राचीन भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के वैश्विक प्रसार को दर्शाता है, बल्कि संबंधित देशों के साथ द्विपक्षीय कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

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