मुंबई के फुटपाथों पर BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े का एक्शन: 3 घंटे पैदल चलीं, अतिक्रमण पर कसा शिकंजा

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मुंबई में ‘पैदल यात्री पहले’ की मुहिम तेज, अश्विनी भिड़े ने तीन घंटे पैदल घूमकर परखी फुटपाथों की हकीकत

 मुंबई में पैदल चलने वालों को सुरक्षित, सुविधाजनक और अतिक्रमण मुक्त रास्ता उपलब्ध कराने की दिशा में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने सोमवार को दक्षिण मुंबई के विभिन्न इलाकों में करीब तीन घंटे तक पैदल घूमकर फुटपाथों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने केवल सड़क किनारे से निरीक्षण करने के बजाय फुटपाथ पर चलकर यह समझने की कोशिश की कि आम पैदल यात्री को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।यह निरीक्षण BMC की ‘Pedestrian First’ सोच के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य मुंबई के करीब 320 किलोमीटर लंबे फुटपाथ नेटवर्क को अतिक्रमण, अव्यवस्था और पैदल यात्रियों के रास्ते में आने वाली बाधाओं से मुक्त कर उन्हें दोबारा चलने योग्य बनाना है। इस अभियान में फुटपाथ पर दुकानों का विस्तार, अवैध कब्जे, असुविधाजनक ढांचे और अन्य बाधाओं की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

नाना चौक से ताड़देव तक पैदल निरीक्षण

अश्विनी भिड़े ने दक्षिण मुंबई के अलग-अलग BMC वार्डों में आने वाले कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का निरीक्षण किया। D वार्ड में उन्होंने नाना चौक, ग्रांट रोड रेलवे स्टेशन, नौशीर भरूचा क्रॉस लेन, शंकरशेठ मार्ग यानी भाजी गली और ताड़देव रोड का जायजा लिया। इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग रोजाना रेलवे स्टेशनों, बाजारों, अस्पतालों, दुकानों और कार्यालयों तक पहुंचने के लिए पैदल चलते हैं। ऐसे में फुटपाथ की स्थिति सीधे तौर पर आम नागरिक के दैनिक जीवन और सड़क सुरक्षा से जुड़ी हुई है। इसके बाद निरीक्षण E वार्ड की तरफ बढ़ा। यहां डॉ. आनंद राव नायर रोड, BYL नायर अस्पताल के आसपास का इलाका, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रोड, नाथ पाई मार्ग और संत सावता मार्ग का निरीक्षण किया गया। अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों के आसपास फुटपाथों का व्यवस्थित होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बुजुर्गों, मरीजों, उनके परिजनों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की आवाजाही रहती है।

B और C वार्ड में भी पहुंचीं BMC कमिश्नर

निरीक्षण का दायरा B वार्ड और C वार्ड तक भी रहा। B वार्ड में लोकमान्य तिलक मार्ग, सिंदूर ब्रिज, ओल्ड बंगालीपुरा लेन, रघुनाथ महाराज स्ट्रीट और काजी सैयद स्ट्रीट का निरीक्षण किया गया। इसके बाद C वार्ड के जगन्नाथ शंकरशेठ मार्ग, धोबीतलाव लेन, महर्षि कर्वे रोड, मरीन लाइन्स और चंदनवाड़ी क्षेत्र में फुटपाथों की स्थिति देखी गई। इस विस्तृत निरीक्षण से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि BMC केवल किसी एक इलाके में फुटपाथ सुधार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दक्षिण मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में पैदल यात्रियों के लिए एक बेहतर और अधिक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार करने पर जोर दे रही है।

8 अगस्त को भी किया था निरीक्षण

अश्विनी भिड़े का यह पहला फुटपाथ निरीक्षण नहीं है। इससे पहले 8 अगस्त को भी उन्होंने मुंबई के फुटपाथों का निरीक्षण किया था। लगातार किए जा रहे इन निरीक्षणों से संकेत मिलता है कि BMC प्रशासन फुटपाथों को लेकर केवल कागजी योजना बनाने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति की निगरानी करना चाहता है। आमतौर पर शहरों में सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह कई बार अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, दुकानों के विस्तार और खराब रखरखाव के कारण सीमित हो जाती है। ऐसे में BMC की ‘Pedestrian First’ पहल शहरी नियोजन के नजरिए से महत्वपूर्ण हो सकती है।

फुटपाथ सिर्फ चलने की जगह नहीं, शहर की बुनियादी जरूरत

मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में फुटपाथ केवल पैदल चलने की सुविधा नहीं है। यह सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भी है। रेलवे स्टेशन या बस स्टॉप से अपने घर, कार्यालय, बाजार या अस्पताल तक पहुंचने के लिए लाखों लोग रोजाना कुछ दूरी पैदल तय करते हैं। यदि फुटपाथ पर अतिक्रमण हो, जगह-जगह गड्ढे हों या पैदल चलने की जगह पर वाहन खड़े हों, तो लोगों को मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ता है। इससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है और पहले से ही भारी यातायात वाली मुंबई की सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी वजह से फुटपाथों को व्यवस्थित करने का सीधा संबंध सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और बेहतर शहरी जीवन से भी है।

तुकराम मुंडे के बाद अश्विनी भिड़े भी एक्शन मोड में

अश्विनी भिड़े का यह सक्रिय निरीक्षण ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे अपनी सख्त कार्रवाई के कारण लगातार सुर्खियों में हैं। FDA की ओर से खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर होटल, रेस्टोरेंट, खाद्य प्रतिष्ठानों और अन्य कारोबारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। FDA के अनुसार 25 मई से 31 जुलाई के बीच राज्य में 3,137 होटल, रेस्टोरेंट, ईटरी और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया तथा 165 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए। इसी अवधि में करीब 28.66 लाख किलोग्राम असुरक्षित खाद्य सामग्री, जिसकी कीमत लगभग ₹55.72 करोड़ बताई गई, जब्त या नष्ट की गई।

बड़े नामों पर चला मुंडे का वार

इसी सख्ती के बीच तुकाराम मुंडे ने बॉलीवुड सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को ‘विमल इलायची’ विज्ञापन के संबंध में कारण बताओ नोटिस दिए हैं। FDA का आरोप है कि इस तरह का विज्ञापन प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के ब्रांड को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने वाली सरोगेट एडवरटाइजिंग हो सकता है। महाराष्ट्र FDA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी तुकाराम मुंडे को वर्तमान में महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

लेकिन सख्ती के साथ प्रक्रिया भी जरूरी

जहां एक ओर तुकाराम मुंढे की कार्रवाई को लेकर चर्चा है, वहीं FDA की कुछ कार्रवाइयों पर अदालतों में भी सवाल उठे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुछ मामलों में लाइसेंस निलंबन को लेकर उचित प्रक्रिया और सुनवाई के अवसर की आवश्यकता पर जोर दिया है। इससे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक संदेश सामने आता है—सख्त कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। यही बात शहरी प्रशासन पर भी लागू होती है। फुटपाथ से अतिक्रमण हटाना आवश्यक हो सकता है, लेकिन कार्रवाई पारदर्शी, नियमों के अनुरूप और नागरिकों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए।

मुंबई के लिए क्या बदल सकता है?

अगर BMC की ‘Pedestrian First’ पहल योजनाबद्ध तरीके से लागू होती है, तो इसके कई सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। सबसे पहला फायदा पैदल यात्रियों को होगा। रेलवे स्टेशन, बाजार और अस्पताल जैसे क्षेत्रों में फुटपाथ खुलने से लोगों को सड़क पर चलने की जरूरत कम होगी। दूसरा फायदा सड़क सुरक्षा का हो सकता है। पैदल यात्री सड़क के बजाय फुटपाथ का इस्तेमाल करेंगे तो वाहनों और पैदल चलने वालों के बीच टकराव की संभावना घट सकती है। तीसरा प्रभाव सार्वजनिक परिवहन पर पड़ सकता है। मुंबई में बड़ी संख्या में लोग ट्रेन, बस और मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं। इन परिवहन साधनों तक पहुंचने के लिए सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध होने से सार्वजनिक परिवहन का अनुभव बेहतर हो सकता है। चौथा फायदा शहर की समग्र छवि और शहरी सौंदर्य को मिल सकता है। व्यवस्थित फुटपाथ किसी भी आधुनिक महानगर की पहचान होते हैं।

असली चुनौती कार्रवाई के बाद निगरानी की

हालांकि फुटपाथ खाली कराना अभियान का पहला चरण है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि अतिक्रमण हटने के कुछ समय बाद वही स्थिति दोबारा न बने। इसके लिए नियमित निरीक्षण, स्थानीय स्तर पर जवाबदेही, उचित पार्किंग व्यवस्था, दुकानदारों के लिए स्पष्ट नियम और फुटपाथों का लगातार रखरखाव जरूरी होगा। केवल एक दिन कार्रवाई करके समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता। मुंबई में फुटपाथों का मुद्दा लंबे समय से यातायात, अतिक्रमण और शहरी नियोजन से जुड़ा रहा है। ऐसे में BMC कमिश्नर का खुद पैदल चलकर स्थिति देखना प्रशासन की प्राथमिकताओं को जमीन पर समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

कार्यवाई के नतीजों का इंतजार

मुंबई की सड़कों पर आम नागरिक के लिए जगह केवल कारों और दोपहिया वाहनों की नहीं हो सकती। महानगर में रहने वाले करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में पैदल चलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अश्विनी भिड़े का तीन घंटे तक पैदल चलकर फुटपाथों का निरीक्षण करना इसी सोच को प्रशासनिक स्तर पर मजबूती देने वाला कदम है। अब निगाह इस बात पर होगी कि निरीक्षण के दौरान सामने आई समस्याओं पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और 320 किलोमीटर के फुटपाथ नेटवर्क को वास्तव में कितना पैदल यात्री-अनुकूल बनाया जा पाता है।

मुंबई की जरूरत ‘Pedestrian First’

यदि BMC अतिक्रमण हटाने के साथ फुटपाथों का डिजाइन, रखरखाव, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और लगातार निगरानी भी सुनिश्चित करती है, तो मुंबई में ‘Pedestrian First’ सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि शहर की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने वाला स्थायी बदलाव बन सकता है।

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