Delhi में 200 टन गोबर से बनेगी गैस, CM Rekha Gupta ने गोयला डेयरी में किया बायोगैस प्लांट का उद्घाटन

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में अब डेयरियों से निकलने वाला गोबर गंदगी और प्रदूषण का कारण नहीं बनेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गोयला डेयरी रोड पर 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस प्लांट का उद्घाटन किया है। इस प्लांट का मुख्य उद्देश्य गोबर का सही तरीके से निस्तारण करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। डेयरी क्षेत्रों में गोबर का सही प्रबंधन न होने से नालों में गंदगी पहुंचती है, जिससे बदबू और यमुना नदी का प्रदूषण बढ़ता है। गोयला डेयरी का यह नया संयंत्र कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सफाई व्यवस्था में सुधार और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने में मदद मिलेगी।

गोबर से बनेगी ग्रीन गैस

इस बायोगैस प्लांट में प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का प्रोसेसिंग किया जाएगा। गोबर से संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) और जैविक खाद तैयार की जाएगी। तैयार की गई गैस का इस्तेमाल वाहन ईंधन के रूप में किया जा सकेगा, जिससे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी। यह पहल न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक साबित होगी।

यमुना को प्रदूषण से बचाने का प्रयास

इस परियोजना का एक बड़ा उद्देश्य डेयरियों से निकलने वाले गोबर को नालों के जरिए यमुना तक पहुंचने से रोकना है। दिल्ली में डेयरी कचरे के बेहतर प्रबंधन से कई फायदे होंगे। नालों में गोबर जाने से रोकने में मदद मिलेगी, जिससे डेयरी इलाकों में गंदगी और बदबू कम होगी। इसके अलावा, गोबर से बनी खाद का उपयोग खेती और बागवानी में किया जा सकेगा। यह स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को भी बढ़ावा देगा, जिससे दिल्ली में ऊर्जा की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी।

दिल्ली में और संयंत्र लगाने की योजनाएं

गोयला डेयरी के अलावा, दिल्ली में नांगली और घोघा डेयरी में भी बायोगैस संयंत्रों पर काम चल रहा है। नांगली डेयरी का 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला संयंत्र सितंबर 2025 में शुरू किया जाएगा। गोयला डेयरी का यह नया संयंत्र भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसके वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि रोजाना कितना गोबर इकट्ठा होता है और संयंत्र अपनी निर्धारित क्षमता से कितना काम कर पाता है।

कचरा प्रबंधन में सुधार की दिशा में कदम

इस बायोगैस प्लांट के उद्घाटन से दिल्ली में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने और यमुना को साफ रखने की कोशिशों को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद करेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेगी। गोबर का सही प्रबंधन और उसका उपयोग इस बात का उदाहरण है कि कैसे कचरे को संसाधन में बदला जा सकता है।
इस बायोगैस प्लांट से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इससे न केवल ऊर्जा का उत्पादन होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह परियोजना दिल्ली में स्वच्छता और ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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