Bihar में जल स्रोतों का तेजी से हो रहा विनाश, 9 हजार तालाब और झीलें गायब

The CSR Journal Magazine
बिहार में जल से जुड़े स्रोतों का तेजी से अतिक्रमण किया जा रहा है। भू माफिया की गतिविधियों ने जल निकायों पर खतरा बढ़ा दिया है। हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य में 1,045 तालाबों पर अतिक्रमण हो चुका है। देशभर में पानी की कमी की समस्या बढ़ती जा रही है, मगर इससे निपटने में लापरवाही भी साफ नजर आ रही है। यहाँ की जल स्रोतों से जुड़ी जनगणना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि करीब 9 हजार जल स्रोत गायब हो चुके हैं।

आंकड़ों का असली चेहरा

हाल ही में आई जल निकाय जनगणना (The 2nd Census of Water Bodies, 2023-24) के आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार में कुल 45,793 जल स्रोतों में से केवल 36,856 ही बाकी रह गए हैं। यह गंभीर स्थिति साफ करती है कि पानी के संकट को लेकर राज्य में कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में 85 फीसदी जल स्रोत पाए जाते हैं, जिनमें लगभग 91 फीसदी तालाब हैं।

सरकारी आंकड़े बेतरतीब

सरकार के स्वामित्व में 45 फीसदी जल स्रोत हैं, लेकिन राजस्व और भूमि सुधार विभाग के पास यह जानकारी नहीं है कि इनमें से कितने पर अतिक्रमण किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि जल निकाय जनगणना के नतीजों की समीक्षा की जा रही है। अतिक्रमण-मुक्त तालाबों की जानकारी भी दी जाएगी।

तालाबों और जलाशयों की स्थिति

जनगणना के अनुसार, 2018-19 में बिहार में 35,027 तालाबों में से अब केवल 33,618 बच गए हैं। यह दर्शाता है कि 1,409 तालाब पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। इसी प्रकार टैंकों की संख्या 4,221 से घटकर 859 हो गई है, जबकि झीलों की संख्या भी 2,693 से घटकर 258 रह गई है। जलाशयों की संख्या 2,156 से घटकर केवल 315 रह गई है।

राजनीतिक विवाद और अतिक्रमण का मुद्दा

राज्य में जल स्रोतों पर हो रहे अतिक्रमण से संबंधित सवालों पर बिहार विधानसभा में चर्चा हुई। मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि केवल 5 तालाबों पर अतिक्रमण हुआ है, जबकि विधायक IP गुप्ता ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अब जनगणना ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है।

भू माफिया की सक्रियता

जल से जुड़े सोर्सों का तेजी से अतिक्रमण हो रहा है, जिसे भू माफिया द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। जल शक्ति मंत्रालय की जनगणना से स्पष्ट होता है कि अगस्त 2023 के एक आदेश में हाई कोर्ट ने बताया था कि राज्य में 1,045 तालाबों पर अतिक्रमण हो चुका है। मान लिया गया है कि यह अतिक्रमण नई समस्याओं को जन्म दे रहा है। इन जल निकायों के गायब होने से कृषि और जलवायु पर असर पड़ रहा है।

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