आत्मा, अनुष्ठान, फिर गोलियां… आजमगढ़ कांड के पीछे 2018 की कहानी क्या है?

The CSR Journal Magazine
आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में एक आश्चर्यजनक घटना ने सभी को हिला दिया। मंगलवार की शाम एक घर में पूजा-पाठ चल रहा था। अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी। इस हादसे में एक महिला की हत्या और दो पुरोहितों की हत्या हुई। घटना के समय घर में तीन छोटे बच्चे भी थे। घटनास्थल पर पुलिस और रिश्तेदार मौजूद थे, लेकिन कमरे के अंदर स्थित अरविंद सिंह ने हथियार उठाया और सभी को बंधक बना लिया।

एक दुःखद मोड़

पुलिस ने अरविंद को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। लगभग 7 घंटे तक बातचीत चलती रही, तभी अचानक अंदर से गोली चली। इस पर पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया। दरवाजा तोड़ने के बाद पुलिस ने अरविंद पर फायरिंग की, जिसमें वह घायल हुआ। उसकी 8 साल का बेटा शौर्य भी गोली लगने से घायल हुआ, जिसका इलाज के दौरान निधन हो गया।

अनुष्ठान का असली कारण क्या था?

इस घटना का सच यही नहीं है। खुद परिवार के सदस्यों का कहना है कि अरविंद के लिए घर में महामृत्युंजय जाप किया जा रहा था। परिवार का मानना था कि अरविंद पर कोई ‘साया’ है। इसी धारणा के चलते पूजा की जा रही थी। अरविंद ने जैसे ही पूजा के दौरान विवाद शुरू किया, मामला गंभीर हो गया। पत्नी बबीता ने पुरोहितों से लड़ाई की, जिससे अरविंद ने पहले पत्नी को फिर पुरोहितों को गोली मार दी।

गोलियों की दास्तान

अरविंद के पास उस रिवॉल्वर का इतिहास भी है, जिससे उसने गोली चलाई। यह रिवॉल्वर उसके बड़े भाई सुनील सिंह की थी, जो पहले ही एक हत्या की शिकार हो चुके थे। परिवार के मुताबिक, सुनील की हत्या के बाद अरविंद का व्यवहार बहुत बदल गया था। उसे पूजा-पाठ से चिढ़ होने लगा था। 2018 में सुनील की हत्या के बाद अरविंद की मानसिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी।

क्या थी घटना की पृष्ठभूमि?

परिवार ने बताया कि 2015 में बभीता ने दो पड़ोसियों के खिलाफ केस दायर किया था। इसके कारण दोनों आरोपी 20 साल की सजा काट रहे थे। इस केस की सुनवाई के दौरान सुनील की हत्या हुई। परिवार का कहना है कि इन घटनाओं का सीधा संबंध अरविंद के व्यवहार में बदलाव से था।

एक परिवार की त्रासदी

मामले की जड़ें 2018 में बिछी हैं। अरविंद की पत्नी बबीता ने पूजा-पाठ करने के लिए पुरोहितों को घर बुलाया था। लेकिन जैसे ही अरविंद वहां पहुंचा, विवाद शुरू हुआ। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अरविंद ने अपनी पत्नी और पुरोहितों पर गोलियां चला दी। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन अंततः एक परिवार की सामूहिक हत्या का मामला बन गया।

सवालों के घेरे में पूरी घटना

यह मामला कई सवाल छोड़ गया है। क्या यह अनुष्ठान वास्तव में अरविंद की रक्षा के लिए था? या फिर कोई और राज इस परिवार के भीतर छिपा है? अरविंद के भाई की हत्या, उसके मानसिक स्वास्थ्य में बदलाव, और उस रिवॉल्वर का इतिहास सभी को जांचने की आवश्यकता है। यह घटना एक अनुष्ठान से शुरू होकर गोलियों तक पहुंच गई, जिसने एक ही परिवार के कई सदस्यों की जिंदगी ले ली।

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