मुंबई के पुनर्विकास को रफ्तार, मोतीलाल नगर में बड़े घर और BDD चॉल में नए आशियाने

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मुंबई में मोतीलाल नगर का होगा कायाकल्प, 3,702 परिवारों को मिलेंगे 1,600 वर्ग फुट के घर; BDD चॉल के 557 परिवारों को 6 नवंबर को चाबियां

मुंबई में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास की दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं चर्चा में हैं। गोरेगांव पश्चिम स्थित मोतीलाल नगर के पुनर्विकास के तहत 3,702 पात्र आवासीय परिवारों को 1,600 वर्ग फुट कारपेट क्षेत्र वाले नए घर देने की योजना है। वहीं, लोअर परेल की BDD चॉल के 557 पात्र परिवारों को 6 नवंबर 2026 को नए घरों की चाबियां सौंपने का कार्यक्रम निर्धारित है। दोनों परियोजनाएं मुंबई में पुराने आवासीय परिसरों की जगह आधुनिक आवास और बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। हालांकि, मोतीलाल नगर की योजना अभी निर्माण और समझौते की प्रक्रिया से जुड़े चरणों में है, जबकि BDD चॉल की कुछ पुनर्वास इमारतें तैयार हो चुकी हैं।

मोतीलाल नगर में 3,702 परिवारों को 1,600 वर्ग फुट के घर

गोरेगांव पश्चिम में स्थित मोतीलाल नगर-1, मोतीलाल नगर-2 और मोतीलाल नगर-3 का पुनर्विकास महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) की मुंबई मंडल योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। लगभग 143 एकड़ में फैली इस परियोजना को मुंबई के बड़े समूह पुनर्विकास कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। अप्रैल 2026 में प्रस्तुत संशोधित विकास योजना के अनुसार, यहां के 3,702 पात्र आवासीय लाभार्थियों को 1,600 वर्ग फुट कारपेट क्षेत्र के घर दिए जाएंगे। यह पहले प्रस्तावित 1,600 वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र से अलग है। कारपेट क्षेत्र वह उपयोगी आंतरिक फर्श क्षेत्र होता है, जिसे घर के वास्तविक इस्तेमाल योग्य हिस्से के रूप में मापा जाता है। इसलिए इस बदलाव का लाभ घर के अंदर उपलब्ध जगह के लिहाज से महत्वपूर्ण है। परियोजना में 328 पात्र व्यावसायिक लाभार्थियों को लगभग 987 वर्ग फुट क्षेत्र की नई दुकानें देने का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, झुग्गी बस्तियों के लगभग 1,600 निवासियों के पुनर्वास के लिए 300 वर्ग फुट के घरों की योजना बताई गई है। इन सभी श्रेणियों की पात्रता और आवंटन संबंधित नियमों तथा आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार तय होंगे।

लगभग एक लाख करोड़ रुपये की परियोजना, तीन चरणों में होगा काम

मोतीलाल नगर का पुनर्विकास निर्माण एवं विकास एजेंसी मॉडल के तहत किया जा रहा है। इसमें म्हाडा परियोजना की निगरानी और भूमि से संबंधित जिम्मेदारियां संभाल रही है, जबकि अडानी समूह की विकास एजेंसी को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों के बीच जुलाई 2025 में समझौता हुआ था। अप्रैल 2026 में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, परियोजना में लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान बताया गया। यह पूरी परियोजना का अनुमानित निवेश है, न कि केवल पुनर्वास घरों के निर्माण की लागत। योजना को तीन चरणों में पूरा करने और निर्माण शुरू होने के बाद लगभग सात वर्षों में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। वास्तविक समयसीमा निर्माण की प्रगति और आवश्यक अनुमतियों पर निर्भर करेगी। म्हाडा के लिए इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विकास के बदले उसे निर्मित आवासीय क्षेत्र उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य में उसके आवास भंडार में वृद्धि हो सकती है।

केवल बड़े घर नहीं, पूरी बस्ती को आधुनिक बनाने की योजना

मोतीलाल नगर को केवल पुरानी इमारतों के स्थान पर नई इमारतें खड़ी करने वाली परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके लिए एकीकृत बस्ती विकास की योजना बनाई गई है। इसमें विद्यालय, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, बाजार, व्यावसायिक परिसर, हरित क्षेत्र, खेल के मैदान, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाएं, सांस्कृतिक केंद्र और व्यायाम की जगहें विकसित करने का प्रस्ताव है। योजना का उद्देश्य यह है कि निवासियों को दैनिक जरूरतों के लिए बहुत दूर न जाना पड़े। इसी सोच को 15 मिनट के शहर की अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, इन सुविधाओं की उपलब्धता, निर्माण का क्रम और उनके शुरू होने की समयसीमा परियोजना के चरणों के अनुसार तय होगी।

1,600 वर्ग फुट के घरों पर विवाद भी रहा

मोतीलाल नगर के पुनर्विकास में घरों का क्षेत्रफल लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। शुरुआत में 1,600 वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र के घरों की बात थी, जबकि निवासियों के समूहों ने इससे अधिक क्षेत्रफल की मांग की थी। कुछ निवासी संगठनों ने 2,000 से 2,400 वर्ग फुट कारपेट क्षेत्र वाले घरों की मांग उठाई थी। संशोधित योजना में 3,702 पात्र परिवारों के लिए 1,600 वर्ग फुट कारपेट क्षेत्र का प्रावधान किया गया। इसके बावजूद कुछ निवासियों की मांगों और पात्रता संबंधी दावों को लेकर असंतोष बना रहा। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि क्षेत्रफल को लेकर सभी निवासियों की आपत्तियां समाप्त हो चुकी हैं। म्हाडा के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि पुनर्वास समझौते स्पष्ट हों, प्रत्येक पात्र परिवार के अधिकार सुरक्षित रहें और निर्माण की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।

मोतीलाल नगर के निवासियों के लिए समझौता क्यों महत्वपूर्ण?

नवंबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, म्हाडा पात्र निवासियों के साथ स्थायी वैकल्पिक आवास समझौते का कानूनी मसौदा तैयार कर रही है। इसे स्थायी वैकल्पिक आवास समझौता कहा जाता है। इसमें पुनर्वास के तहत मिलने वाले घर, पात्रता, आवंटन और निवासियों के अधिकारों से संबंधित शर्तें स्पष्ट की जाती हैं। म्हाडा मुंबई मंडल के मुख्य अधिकारी मिलिंद बोरीकर के अनुसार, मसौदा तैयार करने के बाद उसे विधि विभाग की जांच और प्राधिकरण की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाना है। इसके बाद निवासियों के सामने समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। योजना में खाली जमीन पर पहले पुनर्वास इमारतें बनाने और उसके बाद निवासियों को चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित करने की रणनीति अपनाने की बात कही गई है। इससे सभी परिवारों को एक साथ घर खाली करने की स्थिति से बचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस समय मोतीलाल नगर के सभी परिवारों को नए घरों की चाबियां मिलने की कोई घोषित तारीख सामने नहीं आई है।

BDD चॉल के 557 परिवारों को 6 नवंबर को मिलेंगी चाबियां

मोतीलाल नगर की दीर्घकालीन योजना के साथ ही लोअर परेल की BDD चॉल पुनर्विकास परियोजना में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आने वाला है। म्हाडा की मुंबई मंडल योजना के तहत एन.एम. जोशी मार्ग-लोअर परेल स्थित BDD चॉल के 557 पात्र परिवारों को 6 नवंबर 2026 को नए घरों की चाबियां सौंपने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे दक्षिण मुंबई के यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित होना है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों चाबियां सौंपे जाने की योजना है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की उपस्थिति भी प्रस्तावित है। इन परिवारों को 500 वर्ग फुट कारपेट क्षेत्र वाले दो शयनकक्ष, बैठक और रसोई वाले घर दिए जाएंगे। पात्र लाभार्थियों को ये घर बिना कीमत लिए स्वामित्व के आधार पर दिए जा रहे हैं। पुराने समय में कई परिवार लगभग 160 वर्ग फुट की छोटी चॉल इकाइयों में रहते थे, जहां एक ही घर में दो या तीन पीढ़ियों का गुजारा होता था।

नई इमारतों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

लोअर परेल की नई पुनर्वास इमारतों में अग्निशमन व्यवस्था, यात्री लिफ्ट, अग्निशमन लिफ्ट, सीसीटीवी, रसोई में ग्रेनाइट का चबूतरा, आधुनिक नल फिटिंग और वाहन खड़े करने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इमारतों को भूकंपरोधी तकनीक के अनुसार तैयार किया गया है। साझा सुविधाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी भी म्हाडा ने 12 वर्षों तक संभालने की योजना बनाई है। एन.एम. जोशी मार्ग परियोजना में कुल 32 पुरानी चॉलों के 2,560 आवासीय और गैर-आवासीय धारक शामिल हैं। पहले चरण में सात पुनर्वास इमारतों और एक अस्पताल की इमारत का प्रावधान है। इनमें से तीन इमारतों में 557 घर तैयार होने के बाद उनके आवंटन की तैयारी की गई है। शेष चार इमारतों में 684 घरों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य फरवरी 2027 बताया गया है। दूसरे चरण में 15 चॉलों के लगभग 1,200 धारकों की पात्रता भी तय की गई है।

मुंबई के पुनर्विकास में आगे की चुनौती

मोतीलाल नगर और BDD चॉल की परियोजनाएं मुंबई में आवास पुनर्विकास के दो अलग-अलग चरणों को दर्शाती हैं। एक ओर मोतीलाल नगर में हजारों परिवारों के लिए बड़े घरों और आधुनिक बस्ती की योजना को समझौतों तथा निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। दूसरी ओर, लोअर परेल में तैयार पुनर्वास घरों का कब्जा पात्र परिवारों को देने की तैयारी है। इन योजनाओं की सफलता केवल नए घरों के आकार से नहीं तय होगी। समय पर निर्माण, पात्रता संबंधी विवादों का समाधान, पुनर्वास के दौरान उचित व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और निवासियों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। यदि इन पहलुओं पर प्रभावी ढंग से काम होता है, तो मुंबई के पुराने आवासीय क्षेत्रों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं वाली बस्तियों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

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