केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागॉन ड्रग जब्त की गई है, जिसकी कुल कीमत ₹182 करोड़ है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की सराहना की है और कहा कि मोदी सरकार नशामुक्त भारत के लिए प्रतिबद्ध है।
जिहादी ड्रग का मतलब
कैप्टागॉन को जिहादी ड्रग के नाम से भी जाना जाता है। यह एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट है, जो 1960 के दशक में विकसित किया गया था। इसके प्रभावों के चलते इसका उपयोग संघर्ष क्षेत्रों में बढ़ा है, जहां इसके सेवन से लोग लंबे समय तक जाग सकते हैं और तनाव वाली परिस्थितियों में लड़ाई जारी रख सकते हैं।
ऑपरेशन रेजपिल: एक रणनीतिक मिशन
MHA ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन रेजपिल का उद्देश्य भारत को ड्रग तस्करी का ट्रांजिट रूट बनने से रोकना है। NCB को एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से सूचना मिली थी कि भारत में कैप्टागॉन की तस्करी हो रही है। इस सूचना के आधार पर नई दिल्ली के नेब सराय इलाके में एक मकान की पहचान की गई।
तलाशी के दौरान बडी बरामदगी
11 मई को इस मकान की तलाशी के दौरान एक कमर्शियल चपाती-काटने वाली मशीन में लगभग 31.5 किलो कैप्टागॉन टैबलेट छिपी मिली। यह मशीन सऊदी अरब के जेद्दाह में एक्सपोर्ट करने के लिए निर्धारित थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मकान का किरायेदार एक सीरियाई नागरिक था, जो भारत में गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था।
गुजरात में छापे की कार्रवाई
सीरियाई नागरिक से मिली सूचना के आधार पर NCB ने 14 मई को गुजरात के मुंद्रा में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलो कैप्टागॉन पाउडर जब्त किया। यह कंटेनर सीरिया से मंगाया गया था, जिसमें भेड़ की ऊन बताई गई थी। कंटेनर की जांच में तीन बैग मिले, जिनमें ड्रग भरी हुई थी।
खाड़ी के देशों तक पहुंचने की कोशिश
शुरुआती जांच से पता चला है कि जब्त किया गया सामान खाड़ी क्षेत्र, खासकर सऊदी अरब और मध्य-पूर्वी देशों में भेजा जाना था। इस बड़ी कार्रवाई से न केवल ड्रग तस्करों को करारा झटका लगा है, बल्कि इससे भारत में ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ सख्त संदेश भी गया है।
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