पानी को लेकर अमित शाह ने 10 दिन में कराए 2 समझौते, सवा करोड़ लोगों को फायदा होगा

The CSR Journal Magazine
राजस्थान सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर 10 दिनों में दो महत्वपूर्ण जल समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों से राज्य की लगभग 1.20 करोड़ की आबादी को पानी की व्यवस्था में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल पीने के पानी की उपलब्धता को बढ़ाएगा बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। राजस्थान में जल संकट एक गंभीर समस्या है, तथा यहां बारिश की कमी और भूजल स्तर में गिरावट चल रही है।

नर्मदा का विवाद हुआ सुलझा

इन समझौतों में पहला है यमुना जल समझौता और दूसरा नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद को लेकर हुआ समझौता। यह नर्मदा विवाद, जो पिछले 47 वर्षों से चल रहा था, अब सुलझ गया है। चार राज्यों—राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र—के बीच वित्तीय अनिश्चितता खत्म होने से जल संकट का समाधान संभावित है।

जल संकट के क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

नर्मदा घाटी परियोजना के माध्यम से पश्चिमी राजस्थान के जालोर, बाड़मेर, पाली और सिरोही जिलों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा। इससे यहां की भूजल स्तर में सुधार होने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों के किसान भी सिंचाई की समस्या से निजात पाएंगे। यह समझौता राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

संख्यात्मक लाभ और जल समझौते की विशेषताएँ

इन समझौतों से संबंधित कई तथ्य हैं। जैसे कि, राजस्थान ने दस दिनों में 1.20 करोड़ लोगों के लिए पानी की व्यवस्था की। नर्मदा परियोजना का लाभ पश्चिमी राजस्थान को और यमुना जल समझौता का लाभ शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा। कृषि क्षेत्र को इससे सुधार की काफी संभावनाएँ हैं।

अनिश्चितता खत्म, विकास की नई उम्मीद

1979 से चल रहे नर्मदा विवाद की वजह से चार राज्यों के बीच अनगिनत मुकदमें थे। लेकिन इस समझौते के तहत इन चारों राज्यों के लिए वित्तीय समाधान निकाला गया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र को 1650 करोड़ रुपये की एक बार की भुगतान राशि देनी होगी। इसके साथ राजस्थान को 616.74 MCM पानी मिलेगा, जिससे जनसंख्या को सीधा लाभ होगा।

यमुना का पानी भी मिलेगा, आशा की किरण

हाल ही में, राजस्थान ने हरियाणा के साथ यमुना जल समझौता भी किया। इस समझौते के अनुसार, हरियाणा से पानी का प्रवाह जुलाई से लेकर अक्टूबर के बीच होगा। राजस्थान को 580 MCM पानी मिलेगा, जिसे सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के लिए लाभकारी माना गया है। इसके तहत जलाशयों के निर्माण और बेहतर जल प्रबंधन प्रणाली की योजना भी शामिल है।

पानी के बंटवारे का इतिहास

1994 में यमुना नदी के पानी के बंटवारे पर विभिन्न राज्यों के बीच समझौता किया गया था, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी और जल बंटवारे की स्पष्टता न होने के कारण राजस्थान को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल पाया। लेकिन अब यह स्थिति बदलने की संभावना है और करोड़ों लोगों को पानी की कमी से राहत मिलेगी।

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