मुंबई में मुंढे का खौफ: एक रेड रोज़ से बदल रहे खाने के नियम

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मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! तुकाराम मुंढे का एक्शन हुआ वायरल

मुंबई के रेस्तराओं और फूड मार्केट में इन दिनों खाद्य सुरक्षा को लेकर ‘एक रेड रोज’ (एक लाल गुलाब) और नियमों की सख्ती सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रही है। दरअसल, यह पूरा मामला महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर और बेहद कड़क छवि वाले IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे के उस ताबड़तोड़ एक्शन से जुड़ा है, जिसने मायानगरी मुंबई समेत पूरे राज्य के खान-पान उद्योग में हड़कंप मचा दिया है। मई 2026 में FDA कमिश्नर का पदभार संभालने के बाद से तुकाराम मुंढे ने मिलावटखोरों, गंदगी में खाना बनाने वाले होटलों और नियमों की अनदेखी करने वाले बड़े-बड़े ब्रांड्स पर ऐसा हंटर चलाया है कि सोशल मीडिया पर जनता उनके इस ऐतिहासिक सुधार अभियान को ‘एक रेड रोज’ (एक बड़े बदलाव का प्रतीक) और ‘सिंघम रिटर्न्स’ के रूप में देख रही है।

मुंबई में बदला होटलों का ढर्रा; ‘सिंघम’ IAS तुकाराम मुंढे के डर से रेस्तरां मालिकों ने खुद बदले रसोई के नियम

मायानगरी मुंबई और समूचे महाराष्ट्र में इस समय एक ही सरकारी विभाग सबसे ज्यादा सुर्खियों में है और वह है ‘अन्न व औषध प्रशासन’ (FDA)। अमूमन शांत रहने वाले इस विभाग की कमान जब से 2005 बैच के जांबाज IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे के हाथों में आई है, तब से राज्य के बड़े-बड़े होटल व्यवसायियों, मिलावटखोरों और नामचीन ब्रांड्स की नींद उड़ी हुई है। पिछले तीन महीनों में मुंढे द्वारा की गई ताबड़तोड़ छापेमारी और बिना किसी राजनीतिक दबाव के लिए गए फैसलों ने मुंबई में खाने-पीने के नियमों को हमेशा के लिए बदल दिया है।

3 महीने, 1100 से अधिक छापे और ₹50 करोड़ से ज्यादा का माल जब्त

तुकाराम मुंढे ने 26 मई 2026 को महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर का पद संभाला था। उन्होंने अपनी कार्यप्रणाली से साबित कर दिया कि जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए उनके पास कोई जगह नहीं है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार FDA ने मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसी जगहों पर 1,131 से अधिक होटलों और प्रतिष्ठानों पर सीधे छापे मारे हैं। इस पूरी राज्यव्यापी कार्रवाई के दौरान लगभग 50 से 55 करोड़ रुपये मूल्य का मिलावटी सामान और असुरक्षित खाद्य भंडार जब्त कर नष्ट किया गया है। नियमों का मखौल उड़ाने वाले 165 से अधिक होटलों और क्लबों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। अकेले मुंबई में मैकडॉनल्ड्स, ऐतिहासिक रेडियो क्लब, खार जिमखाना और मशहूर के. रुस्तम आइसक्रीम पार्लर जैसे 56 नामचीन संस्थानों पर कड़ा एक्शन लिया गया है।

क्या है सोशल मीडिया पर वायरल ‘एक रेड रोज’ का सच?

इंटरनेट और सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर मुंबई में खाने के नियम बदलने को लेकर जो ‘एक रेड रोज’ का संदर्भ वायरल हो रहा है, वह दरअसल तुकाराम मुंढे के उस सख्त दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वह हर रेस्तरां को ग्राहकों के लिए ‘सुरक्षित और साफ-सुथरा’ बनाने का संदेश दे रहे हैं। यह एक्शन उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के प्रति एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन चुका है। मुंढे की इस मुहिम का असर यह है कि अब मुंबई के छोटे वेंडर्स से लेकर फाइव-स्टार होटल तक अपनी रसोइयों की डीप-क्लीनिंग (गहन सफाई) करा रहे हैं। इतना ही नहीं, तुकाराम मुंढे के खौफ का आलम यह है कि मुंबई के बड़े होटलों ने एफडीए और FSSAI के पूर्व अधिकारियों को बतौर ‘निजी सलाहकार’ (प्राइवेट कंसलटेंट) काम पर रखना शुरू कर दिया है। ये सलाहकार मुंढे की किसी भी अचानक होने वाली छापेमारी से पहले होटलों की रसोई का मॉक ऑडिट (नकली जांच) करते हैं, ताकि सफाई और मानकों में कोई कमी न रह जाए।

जब हाईकोर्ट की कैंटीन पर ही लगा दिया ताला!

तुकाराम मुंढे के एक्शन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करते हैं। हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान FDA से पूछा था कि क्या सिर्फ निजी होटलों पर ही कार्रवाई की जा रही है? इसके तुरंत बाद मुंढे की टीम ने बॉम्बे हाईकोर्ट परिसर की कैंटीन और मंत्रालय (सचिवालय) की कैंटीनों पर सरप्राइज रेड कर दी। जांच में वहां गंभीर स्वच्छता उल्लंघन और वैध लाइसेंस की कमी पाई गई, जिसके बाद मुंढे ने हाईकोर्ट परिसर की दो कैंटीनों को तुरंत बंद करने का आदेश दे दिया। इस बेबाक कदम ने पूरे प्रशासनिक और न्यायिक गलियारे को हैरान कर दिया।

दूध, मिठाई के बाद अब ‘खाने के तेल’ और ‘अखबार’ पर नजर

तुकाराम मुंढे का यह अभियान केवल होटलों की रसोई तक सीमित नहीं है। उन्होंने हाल ही में ‘सुरक्षित भोजन, सुरक्षित महाराष्ट्र’ अभियान के तहत खाने के तेल के कारोबार पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि खुले तेल की अवैध बिक्री, पुराने टिन-कंटेनरों का दोबारा इस्तेमाल और तेल को बार-बार गर्म करके बेचने जैसी जानलेवा प्रथाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, मुंढे ने सड़क किनारे स्ट्रीट फूड बेचने वालों को अखबारों में खाना पैक करने या परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उनका कहना है कि अखबार की स्याही में लेड (सीसा) जैसे खतरनाक रसायन होते हैं, जो गर्म या तैलीय भोजन में पिघलकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां पैदा कर सकते हैं। साथ ही चाइनीज फूड, कॉटन कैंडी और पाव भाजी में उपयोग होने वाले हानिकारक आर्टिफिशियल रंगों के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लिया जा रहा है।

फिल्मी सितारों को भी नहीं बख्शा

खाद्य सुरक्षा के नियमों को हर स्तर पर लागू करने के लिए मुंढे ने प्रतिबंधित उत्पादों (जैसे गुटखा या पान मसाला) का परोक्ष विज्ञापन (सरोगेट एडवरटाइजिंग) करने वाले बॉलीवुड के बड़े अभिनेताओं शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को एफडीए की तरफ से नोटिस थमा दिया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि विज्ञापन और खाद्य सुरक्षा के नियम आम नागरिक से लेकर सेलिब्रिटी तक, सबके लिए एक समान हैं।

21 साल का करियर और 25 ट्रांसफर: अटूट है हौसला

तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के ऐसे IAS अधिकारी हैं, जो अपनी बेदाग ईमानदारी और सख्त मिजाज के कारण अपने 21 साल के करियर में 25 बार ट्रांसफर का सामना कर चुके हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके राजस्थान ट्रांसफर होने की झूठी अफवाह भी उड़ी थी, जिसका खुद मुंढे ने खंडन किया और कहा कि वे महाराष्ट्र में अपना काम जारी रखेंगे। इस बार राज्य सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी तुकाराम मुंढे को मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ‘फ्री हैंड’ यानी खुली छूट दे दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

जनता से अपील: इसे बनाएं जन आंदोलन

तुकाराम मुंढे का मानना है कि केवल रेगुलेटरी एक्शन (सख्त कार्रवाई) से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि इसके लिए 100% सेल्फ-कंप्लायंस (स्वयं नियमों का पालन करना) और जनता की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने मुंबई और महाराष्ट्र के नागरिकों से अपील की है कि वे अस्वच्छ जगहों पर खाना खाने से बचें और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन या मिलावट दिखाई दे, तो तुरंत एफडीए से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएं ताकि त्वरित एक्शन लिया जा सके।

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