तुकाराम मुंढे का सर्जिकल स्ट्राइक- महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी के तहत तीन महीने में 3000 से ज्यादा छापे

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तुकाराम मुंढे का महा-एक्शन: 3 महीने में 3,000 छापे, डोमिनोज-मैकडॉनल्ड्स से लेकर हाई कोर्ट कैंटीन तक हड़कंप

महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा (फूड सेफ्टी) के नियमों का उल्लंघन करने वालों और मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर और वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने एक अभूतपूर्व और आक्रामक अभियान छेड़ दिया है। मई 2026 में पदभार संभालने के बाद से, पिछले तीन महीनों में उनके नेतृत्व में पूरे राज्य में 3,000 से अधिक औचक छापेमारी और निरीक्षण किए गए हैं। इस व्यापक ‘क्रैकडाउन’ ने न केवल स्थानीय खाद्य व्यवसायियों बल्कि डोमिनोज, पिज्जा हट और मैकडॉनल्ड्स जैसे वैश्विक और प्रतिष्ठित फास्ट-फूड ब्रांडों के साथ-साथ पांच सितारा होटलों, प्रतिष्ठित क्रिकेट क्लबों और मुंबई की सदियों पुरानी डेयरियों में भी हड़कंप मचा दिया है। ‘सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र’ के मिशन के साथ काम कर रहे तुकाराम मुंढे के इस एक्शन की गूंज अब देशव्यापी बहस का रूप ले चुकी है।

जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’: किसी को नहीं बख्शने का संकल्प

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर, 51 वर्षीय IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे अपनी ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। करीब 21 साल के अपने करियर में 25 से अधिक तबादलों का सामना करने वाले मुंढे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनका अंदाज बदलने वाला नहीं है। मई 2026 में खाद्य विभाग की कमान मिलने के बाद उन्होंने राज्य के नागरिकों की थाली को सुरक्षित बनाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, तुकाराम मुंढे के इस अभियान के तहत 3 महीनों में 3,000 से अधिक जगहों पर छापे मारे गए हैं। उनके इस ताबड़तोड़ एक्शन का दायरा केवल सड़क किनारे की दुकानों या छोटे ढाबों तक सीमित नहीं है। मुंढे ने स्पष्ट संदेश दिया है, “जो लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें नियामक (रेगुलेटर) की सख्त कार्रवाई का सामना करना ही होगा। आप यहां लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहे हैं और इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

वैश्विक ब्रांड्स पर गिरी गाज: डोमिनोज, पिज्जा हट और मैकडॉनल्ड्स के लाइसेंस निलंबित

मुंढे की टीमों ने जब मुंबई और पुणे सहित पूरे महाराष्ट्र के बड़े फूड आउटलेट्स पर छापेमारी शुरू की, तो हैरान कर देने वाली कमियां सामने आईं। जांच के दौरान डोमिनोज के चार आउटलेट्स और पिज्जा हट के एक आउटलेट में गंभीर स्वच्छता उल्लंघन और एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल पाए जाने पर उनके फूड लाइसेंस तुरंत निलंबित कर दिए गए। इतना ही नहीं, मुंबई के एक मैकडॉनल्ड्स आउटलेट पर भी कार्रवाई की गई, जहां रसोई के भीतर जीवित कीड़े-मकोड़े (कॉकरोच) और सड़ता हुआ खाना पाया गया था। इन छापों में मुंबई का एक ब्रिटिश कालीन प्रतिष्ठित क्रिकेट क्लब, 70 साल पुरानी आइसक्रीम पार्लर और करीब 110 साल पुरानी ऐतिहासिक ‘पारसी डेयरी’ भी FDA की रडार से नहीं बच सकीं। VIP और रसूखदार प्रतिष्ठानों पर इस तरह के निष्पक्ष एक्शन ने आम जनता के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास को काफी मजबूत किया है।

जब हाई कोर्ट की कैंटीन में ही मार दिया छापा

इस महा-अभियान के दौरान एक बेहद चर्चित और दिलचस्प वाकया बॉम्बे हाई कोर्ट से जुड़ा है। दरअसल, तुकाराम मुंढे ने मुंबई के एक नामी फाइव स्टार होटल का लाइसेंस नियमों के उल्लंघन के चलते रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ होटल मालिक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या FDA केवल निजी होटलों पर ही आक्रामक है या सरकारी परिसरों और मंत्रालयों की भी जांच की जाती है? सख्त मिजाज IAS अधिकारी ने इस टिप्पणी को एक चुनौती के रूप में लिया। अगले ही कुछ घंटों के भीतर, मुंढे की विशेष टीम ने बॉम्बे हाई कोर्ट की अपनी कैंटीन में ही औचक छापा मार दिया। इस औचक निरीक्षण में अदालत की कैंटीन के भीतर दो ऐसी रसोइयां (किचन) संचालित होती पाई गईं, जिनके पास वैध फूड लाइसेंस तक नहीं था। FDA ने नियमों के मुताबिक तुरंत कार्रवाई करते हुए बिना लाइसेंस वाले इन हिस्सों को सील कर दिया और अदालत परिसर को अनुपालन नोटिस थमा दिया। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि मुंढे के राज में कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह कोई बड़ा कॉर्पोरेट घराना हो या खुद न्यायपालिका का परिसर।

‘नकली पनीर’ पर पूर्ण प्रतिबंध और मुफ्त पानी की अनिवार्यता

छापेमारी के साथ-साथ महाराष्ट्र एफडीए ने राज्य की खाद्य संस्कृति को सुधारने के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसले लागू किए हैं।
नकली (एनालॉग) पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध: बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाले वनस्पति तेल और रसायनों से बने कृत्रिम या ‘एनालॉग पनीर’ को पूरे महाराष्ट्र में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं या निर्माताओं को 6 महीने तक की जेल और ₹1 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
मुफ्त सुरक्षित पेयजल: महाराष्ट्र के सभी होटलों और रेस्टोरेंट्स के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने ग्राहकों को मुफ्त और सुरक्षित पीने का पानी (Safe Drinking Water) उपलब्ध कराएं। पानी के नाम पर ग्राहकों से जबरन वसूली करने वाले प्रतिष्ठानों पर अब सख्त आर्थिक दंड लगाया जा रहा है।
बार-बार इस्तेमाल होने वाले तेल पर कड़ा रुख: रेस्टोरेंट्स को कड़ी चेतावनी दी गई है कि एक ही खाद्य तेल को बार-बार गर्म करके खाना पकाने पर ₹10 लाख तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि यह सेहत के लिए अत्यंत खतरनाक और कैंसरकारी होता है।

बॉलीवुड के ‘सिंघम’ और ‘नायक’ से तुलना; सेलिब्रिटीज को भी नोटिस

सोशल मीडिया पर तुकाराम मुंढे इस समय जबरदस्त ट्रेंड कर रहे हैं और जनता उन्हें असल जिंदगी का ‘सिंघम’ और फिल्म ‘नायक’ का अनिल कपूर बता रही है। आम जनता का उन्हें इस कदर समर्थन प्राप्त है कि नई दिल्ली में आयोजित एक हालिया कार्यक्रम के दौरान प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया और देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की मांग तक कर डाली। मशहूर फिल्ममेकर कुणाल कोहली ने तो इंस्टाग्राम पर मजाकिया लहजे में यहां तक लिख दिया कि मुंढे साहब को अब भारतीय घरों के फ्रीज और किचन पर भी छापा मारना चाहिए, जहां सालों पुराने एक्सपायर्ड सामान संभालकर रखे मिल जाएंगे!

जनता के प्यार के बीच मुंढे बिल्कुल जमीन से जुड़े हुए

उन्होंने एक साक्षात्कार में बेहद सादगी से कहा, “मैं कोई सेलिब्रिटी नहीं हूँ। मैं केवल एक फूड सेफ्टी कमिश्नर हूँ और अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ।”सिर्फ व्यवसायी ही नहीं, बल्कि उनके रडार पर बॉलीवुड के बड़े सितारे भी आ चुके हैं। हाल ही में महाराष्ट्र FDA ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया है। इन सितारों पर राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड का अप्रत्यक्ष (सरोगेट) विज्ञापन करने का आरोप है। FDA ने इनसे पुख्ता सबूत मांगे हैं कि वे जिस ‘इलायची’ का प्रचार कर रहे हैं, क्या वह वाकई तंबाकू उत्पादों से अलग एक वास्तविक उत्पाद है या यह महज प्रतिबंधित पान मसाले को बढ़ावा देने का एक हथकंडा है।

उद्योग जगत में बेचैनी, कानूनी लड़ाई और मुंढे का अडिग रुख

तुकाराम मुंढे की इस अभूतपूर्व और तीव्र कार्रवाई से जहां आम जनता बेहद खुश है, वहीं रेस्टोरेंट और होटल उद्योग जगत (Industry) में भारी खलबली और बेचैनी का माहौल है। कई व्यापारिक संगठनों ने इस कड़े रुख का विरोध करते हुए कहा है कि नियमों के अनुपालन के लिए उन्हें थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। कुछ व्यवसायी इस कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट भी पहुंचे हैं और FDA पर अत्यधिक सख्ती (High-handedness) का आरोप लगाया है। एक मामले में अदालत ने एक रेस्टोरेंट के सुधार कर लेने के बावजूद उसका सस्पेंशन जारी रखने पर FDA पर ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया।इन कानूनी अड़चनों और उद्योग जगत के दबाव के बावजूद, तुकाराम मुंढे के कदम पीछे नहीं हटे हैं। उन्होंने साफ किया कि यदि अदालत की ओर से कोई टिप्पणी आती है तो उसे वे बेहद गंभीरता से लेते हैं और जहाँ सुधार की गुंजाइश होती है, वहाँ विभाग सुधार करता है, लेकिन इसका मतलब यह कटई नहीं है कि मिलावटखोरों को ढील दी जाएगी।

महाराष्ट्र के बाहर भी चला मुंढे मॉडल

मुंढे के इस कड़े रुख का असर अब महाराष्ट्र के बाहर उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी दिखने लगा है, जहां स्थानीय प्रशासन ने भी मिलावटखोरों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैंपल कलेक्ट करने और सीजिंग की कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले तीन महीनों में हुई 3,000 से अधिक छापेमारी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक प्रशासनिक इच्छाशक्ति का उदाहरण है। तुकाराम मुंढे की इस मुहिम ने यह साबित कर दिया है कि यदि कोई अधिकारी ठान ले, तो बड़े से बड़े ब्रांड को भी घुटने टेकने पड़ते हैं और जनता की सेहत के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोका जा सकता है। महाराष्ट्र के इस खाद्य सुरक्षा मॉडल की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है।

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