32 वर्षीय कविता कुमारी ने 6 मिनट में 1600 मीटर दौड़कर रचा इतिहास, बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष की अनूठी मिसाल

The CSR Journal Magazine

साड़ी पहनकर दौड़ने वाली कविता कुमारी की अद्भुत कहानी, दर्द और संघर्ष की एक प्रेरणादायक मिसाल

झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड स्थित सोसो गांव की रहने वाली 32 वर्षीय कविता कुमारी (महतो) इन दिनों सोशल मीडिया और पूरे देश में अपने अदम्य साहस और हौसले को लेकर सुर्खियों में हैं। एक माँ जब अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए ठान लेती है, तो दुनिया की कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। कविता कुमारी ने इसे सच साबित कर दिखाया है। उनके पास न तो कोई स्पोर्ट्स गियर था और न ही कोई महंगी सुख-सुविधाएं, लेकिन उनके पास एक माँ का कभी न हारने वाला जज्बा था।

मजबूरी को बनाया मजबूती

करीब तीन साल पहले एक लंबी बीमारी के कारण कविता के पति का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद पूरे परिवार और दो मासूम बच्चों की परवरिश के साथ-साथ बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी अचानक कविता के कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी से जूझ रही कविता ने ईंट भट्ठे और सिक्योरिटी गार्ड के रूप में भी काम किया ताकि घर का चूल्हा जल सके। लेकिन वह अपने बच्चों को एक स्थिर और बेहतर जिंदगी देना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने होमगार्ड (गृह रक्षा वाहिनी) भर्ती को अपना लक्ष्य चुना।

रोज़ाना 8 किलोमीटर का कठिन अभ्यास

सरकारी नौकरी पाने के इस सपने को पूरा करने के लिए कविता ने कड़ी मेहनत शुरू की। हर सुबह तड़के 4 बजे, जब दुनिया सो रही होती थी, कविता उठकर घर के सारे कामकाज निपटाती थीं। इसके बाद वह अपने घर से करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान में दौड़ का अभ्यास करने पहुंचती थीं। बेहद गरीब होने के कारण उनके पास रनिंग शूज (दौड़ने वाले जूते), ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अपनी रोज़मर्रा की पारंपरिक साड़ी पहनकर ही गांव के कच्चे और पथरीले रास्तों पर अभ्यास करना जारी रखा।

मैदान में कौंध गई बिजली: 10 मिनट की दौड़ 6 मिनट में पूरी की

रामगढ़ में चल रहे होमगार्ड भर्ती के फिजिकल ट्रायल के दौरान मैदान में जो हुआ, उसने वहां मौजूद अधिकारियों और अन्य अभ्यर्थियों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी के बीच कविता जब साड़ी पहनकर दौड़ने के लिए ट्रैक पर उतरीं, तो हर कोई हैरान था। दौड़ के नियमों के अनुसार महिला अभ्यर्थियों को 1600 मीटर की दूरी 10 मिनट के भीतर पूरी करनी थी। जैसे ही सीटी बजी, कविता ने नंगे पैर और साड़ी के पल्लू को संभालते हुए ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सब देखते रह गए। उन्होंने इस कठिन चुनौती को महज 6 मिनट में पूरा कर लिया और उत्कृष्ट अंकों के साथ फिजिकल टेस्ट पास किया। वह किसी मेडल या शोहरत के लिए नहीं, बल्कि अपने बच्चों के वजूद और रोटी के लिए दौड़ रही थीं।

देश भर से मिल रहा है सलाम और सम्मान

साड़ी में नंगे पैर दौड़ती कविता का यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया। इस जांबाज माँ के हौसले को देखकर लोग सोशल मीडिया पर भावुक हो रहे हैं और उन्हें “सच्ची वीरांगना” बता रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि और अटूट इच्छाशक्ति से प्रभावित होकर एक स्थानीय रनिंग ग्रुप और स्पोर्ट्स एकेडमी के सदस्यों ने कविता के घर जाकर उन्हें सम्मानित भी किया है।
कविता कुमारी की यह कहानी बताती है कि ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।’

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