AI और टेलीग्राम के सहारे रचा फर्जी री-नीट पेपर का खेल, 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार

The CSR Journal Magazine
भीलवाड़ा में री-नीट परीक्षा के नाम पर फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने 19 वर्षीय आकाश चौधरी को गिरफ्तार कर उसके एक नाबालिग साथी को भी डिटेन किया है। आरोपी ने गूगल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कथित री-नीट पेपर तैयार कर टेलीग्राम ग्रुप के जरिए छात्रों को बेचा। पुलिस जांच में सामने आया है कि सात छात्रों ने यह फर्जी पेपर खरीदा था, जिससे आरोपी ने करीब 18 हजार रुपए कमाए। मामले की जांच जारी है और कई अहम जानकारियां सामने आने की संभावना है।

रातों-रात अमीर बनने की चाह में रचा फर्जीवाड़ा

देशभर में नीट परीक्षा और पेपर लीक को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भीलवाड़ा निवासी आकाश चौधरी के मन में आसान कमाई का विचार आया। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने इंटरनेट पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री, संभावित प्रश्नों और नोट्स की मदद से एक कथित री-नीट प्रश्नपत्र तैयार किया। इसके बाद उसने इसे असली पेपर बताकर बेचने की योजना बनाई। आरोपी को लगा कि परीक्षा को लेकर छात्रों और अभिभावकों में बनी अनिश्चितता का फायदा उठाकर वह कम समय में बड़ी रकम कमा सकता है। इसी लालच में उसने फर्जी पेपर तैयार कर ऑनलाइन प्रचार शुरू कर दिया।

‘पेपर माफिया’ नाम से बनाया टेलीग्राम ग्रुप

आकाश ने टेलीग्राम पर ‘पेपर माफिया’ नाम से एक ग्रुप बनाया और उसमें कोचिंग संस्थानों से जुड़े छात्रों सहित कुल 54 सदस्यों को जोड़ लिया। पुलिस के अनुसार ग्रुप में राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों के छात्र भी शामिल थे। आरोपी का एक नाबालिग साथी नए सदस्यों को जोड़ने, संदेश प्रसारित करने और ग्रुप के संचालन में उसकी मदद करता था। ग्रुप में री-नीट परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों से पैसे लिए जाते थे। पुलिस का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर छात्रों को भ्रमित करने की यह सुनियोजित कोशिश थी।

सात छात्रों से वसूले 18 हजार रुपए

पूछताछ में सामने आया कि ग्रुप के 54 सदस्यों में से सात लोगों ने कथित पेपर खरीदने के लिए भुगतान किया था। आरोपी ने एक छात्र से चार हजार रुपए तक लिए, जबकि अन्य से दो से तीन हजार रुपए वसूले गए। इस तरह उसने लगभग 18 हजार रुपए की अवैध कमाई की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और नीट से संबंधित नोटबुक बरामद की हैं। इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस नेटवर्क का विस्तार अन्य राज्यों तक तो नहीं था।

वीपीएन से पहचान छिपाई, लेकिन पुलिस ने दबोचा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आकाश ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का इस्तेमाल किया और अमेरिकी सर्वर के जरिए टेलीग्राम ग्रुप संचालित कर रहा था। उसे विश्वास था कि इस तकनीक के जरिए वह पुलिस की नजरों से बच जाएगा। हालांकि खुफिया निगरानी के दौरान ‘पेपर माफिया’ नाम का ग्रुप पुलिस के संज्ञान में आ गया।
इसके बाद सदर पुलिस और साइबर टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पटेलनगर क्षेत्र में जाल बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय ने मुख्य आरोपी को 22 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कितने छात्रों को गुमराह किया गया।

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