धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी, छत्रपति शिवाजी और समर्थ रामदास पर दिए विवादित बयान को लेकर हलचल

The CSR Journal Magazine
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी को लेकर अपने बयान पर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि मीडिया ने उनकी बातों का गलत मतलब निकाला है। रविवार को नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे। उनका कहना था कि महाराज का स्थान हिंदू राष्ट्र और स्वराज की अवधारणा में सर्वोच्च है।

क्या था विवादित बयान?

धीरेंद्र शास्त्री ने नागपुर में एक कार्यक्रम में दावा किया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे और उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज अपने मुकुट के साथ गुरु समर्थ रामदास स्वामी के पास गए थे, जहां गुरु ने उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद जिम्मेदारियों का निर्वहन ही सच्ची सेवा है। इस बयान ने कई लोगों को नाराज कर दिया था।

दी माफी, कहा- कोई गलत इरादा नहीं था

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शास्त्री ने कहा, “अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं। मेरा इरादा तो सिर्फ महाराज की भक्ति का जिक्र करना था।” उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। शास्त्री ने यह भी जोड़ते हुए कहा कि उनकी सभी भक्तों से अपील है कि वे आपस में विवाद न करें।

राजनीतिक घमासान भी हुआ तेज

धीरेंद्र शास्त्री के चार बच्चों को लेकर दिए बयान पर भी विवाद हुआ। उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक बच्चे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को देना चाहिए। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा करना राष्ट्रवादी बनाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे हमेशा सनातनी विचारधारा के हों, जिससे समाज का विकास हो सके।

धीरेंद्र शास्त्री की भविष्य की योजनाएँ

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे भविष्य में विवाह करने की योजना बना रहे हैं और उनका लक्ष्य हिंदू आबादी में वृद्धि करना है। उन्होंने खुद को भी इस दिशा में सक्रिय रहने का संकेत दिया। उनके ये बयान समाज में एक नई बहस को जन्म दे रहे हैं, जिसमें धार्मिक और सामाजिक मुद्दे को ध्यान में रखा गया है।

लेंसकार्ट विवाद पर भी की आलोचना

इसके अलावा, शास्त्री ने लेंसकार्ट कंपनी को भी चेतावनी दी है, जिसके तहत उन्होंने कहा कि कंपनी अपने कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीकों के साथ काम करने से मना कर रही है। उन्होंने कहा, “कोई तिलक या मंगलसूत्र पहनकर काम पर नहीं आ सकता। ऐसा करना भारतीय संस्कृति का अपमान है।” उनके इस बयान ने फिर से धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम किया है।

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