योगिनी एकादशी 2026: भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, नहीं तो टूट सकता है व्रत और नहीं मिलेगा पूरा पुण्य

The CSR Journal Magazine
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का अपना अलग स्थान है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026 को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होगी और 11 जुलाई 2026 को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा साधक को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और दान-पुण्य जैसे कार्य भी करते हैं।
ऐसा भी माना जाता है कि सच्चे मन से इस व्रत का पालन करने पर व्यक्ति के संचित पापों का प्रभाव कम होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

व्रत के दौरान इन 4 गलतियों से बचना जरूरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

1. तुलसी के पत्ते न तोड़ें

एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता भी व्रत करती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी दल पहले से ही तोड़कर रख लेना चाहिए। साथ ही कई परंपराओं में इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने से भी परहेज किया जाता है।

2. तामसिक भोजन से करें परहेज

व्रत के दौरान लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा चावल खाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। व्रती सामान्य सात्विक और व्रत के अनुकूल आहार का ही सेवन करते हैं।

3. सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का करें उपयोग

धार्मिक परंपरा के अनुसार, एकादशी व्रत में साधारण नमक का सेवन नहीं किया जाता। यदि फलाहार किया जा रहा हो तो केवल सेंधा नमक का उपयोग करना उचित माना जाता है।

4. क्रोध और विवाद से रहें दूर

योगिनी एकादशी केवल भोजन संबंधी नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि मन और वाणी की शुद्धता पर भी जोर देती है। इस दिन क्रोध करना, किसी का अपमान करना, कटु शब्द बोलना या विवाद में पड़ना उचित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता है कि संयम और शांत व्यवहार से ही व्रत का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।

पूजा-विधि और जरूरी बातें

योगिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है। भगवान को पीले पुष्प, फल और तुलसी दल (पहले से तोड़े गए) अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु विष्णु मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ तथा योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रवण करते हैं। दिनभर संयम, सात्विक आचरण और भक्ति भाव बनाए रखना इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में व्रत के नियमों में कुछ अंतर हो सकता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos