Waynad में बार-बार क्यों होते हैं भूस्खलन? जानिए टनल परियोजना, भारी बारिश और भूगोल का पूरा कनेक्शन

The CSR Journal Magazine
वायनाड में हाल ही में हुए भूस्खलन ने अत्यधिक चिंता बढ़ा दी है। इस हादसे में तीन लोगों की जान गई और सात लोग घायल हुए हैं। यह घटना प्रशासन और लोगों के बीच गहरी चर्चा का विषय बन गई है। राज्य के कृषि मंत्री टी सिद्दीक ने इसे “मानव निर्मित आपदा” बताया है, जिसका संबंध 2,134 करोड़ रुपये की अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी टनल परियोजना से है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान निकले मलबे का सही तरीके से निपटान नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह भूस्खलन बना। प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

क्या है भूस्खलन का कारण?

मंगलवार को वायनाड के कल्लाडी इलाके में मलप्पुरम-वायनाड टनल परियोजना के निर्माण स्थल पर भूस्खलन हुआ। CCTV फुटेज में देखा गया कि कैसे भारी बारिश के कारण मिट्टी खिसक गई और मलबा एक टैंकर को बहाकर ले गया। इस घटना ने लोगों के जीवन में संकट खड़ा कर दिया और राहत अभियान शुरू करना पड़ा। प्रशासन की टीमों ने फायर एंड रेस्क्यू सर्विस और एनडीआरएफ के साथ मिलकर चारों ओर से राहत कार्य चलाया।

टी सिद्दीक का आरोप क्या है?

कृषि मंत्री टी सिद्दीक का कहना है कि यह हादसा केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं हो सकता। उनके मुताबिक़, मिट्टी और मलबे का गैर वैज्ञानिक तरीके से डंपिंग करना ही इस त्रासदी का मुख्य कारण है। उन्होंने सांसदों की पूर्ववर्ती बैठकों में इस मुद्दे को उठाया था और आवश्यक कदम उठाने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन कुछ नहीं किया गया।

2,134 करोड़ रुपये की इस टनल परियोजना का उद्देश्य

अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी टनल परियोजना केरल की प्रमुख सड़क परियोजनाओं में से एक है। इसकी लागत 2,134 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य कोझिकोड और वायनाड के बीच यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाना है। इस परियोजना के बाद भूस्खलन प्रभावित थामरास्सेरी घाट रोड पर निर्भरता कम होगी। इससे लोगों को एक वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा, जिससे यात्रा में समय की बचत होगी।

टनल की आकृति और निर्माण का प्रबंधन

यह परियोजना लगभग 8.73 किलोमीटर लंबी है और इसमें ट्विन ट्यूब टनल बनाई जा रही है। दोनों दिशाओं के लिए अलग-अलग लेन बनाई जाने की योजना है, और यह भारत की तीसरी सबसे लंबी टनल होगी। इसके निर्माण से अनाक्कमपोयिल और मेप्पाडी के बीच की दूरी घटकर 20 से 22 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे यात्रा का समय 45 से 60 मिनट तक कम होने की उम्मीद है। यह काम ईपीसी मॉडल पर किया जा रहा है।

भूस्खलन की समस्या पर जियोलॉजिकल सर्वे

वायनाड का इलाका पहाड़ी और संवेदनशील है, जिससे भूस्खलन का हमेशा खतरा बना रहता है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, वायनाड की 51 प्रतिशत भूमि पहाड़ी ढलानों पर स्थित है। यहां की भौगोलिक संरचना और भारी बारिश भूस्खलन के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। वायनाड का पठार 700 से 2,100 मीटर की ऊ

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