Uttar Pradesh में स्मार्ट मीटर का बड़ा फैसला, जानें क्यों हुआ उलटफेर?

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों पर उपभोक्ता भारी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे, जिससे योगी सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। अत्यधिक बिल, अचानक बिजली कटने की घटनाएं और सेवा बहाली में देरी जैसी शिकायतों ने सरकार को मजबूर किया कि वह प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने का निर्णय ले। प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़कों पर पड़े मीटर और सरकार के खिलाफ नारे सुनाई देने लगे। यह परिस्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई क्योंकि विपक्ष को एक मजबूत मुद्दा हाथ लग गया।

स्मार्ट मीटर योजना का इतिहास

यह योजना तीन साल पहले शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य रियल-टाइम खपत की जानकारी, ऑनलाइन बिलिंग और बिजली चोरी पर लगाम लगाना था। लगभग 70 लाख घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए, और नए कनेक्शन के लिए इसे अनिवार्य किया गया। इस प्रणाली में उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज करना पड़ता था, फिर बिजली का उपयोग करना होता था। लेकिन जैसे ही बिल आए, उपभोक्ता महसूस करने लगे कि उनपर ज्यादा बोझ डाला जा रहा है। कई क्षेत्रों में शिकायतें और आरोप तेज हो गए।

बिजली कटने के मामले और जनाक्रोश

जब बैलेंस खत्म होता था, तो बिजली बिना किसी पूर्व सूचना के काट ली जाती थी, जिससे उपभोक्ताओं में आक्रोश फैल गया। शिकायतें आईं कि बैलेंस निगेटिव होते ही बिजली कटने के बाद भी 24 से 72 घंटे तक सेवा बहाल नहीं की जाती। लोगों ने प्रदर्शन कर मीटर उखाड़कर फेंकने जैसी घटनाएं भी कीं। उपभोक्ताओं ने बताया कि पहले महीने का बिल 600 रुपये आता था, लेकिन अब हर हफ्ते इतनी राशि खर्च होने लगी।

सरकार का राहत पैकेज और नया दिशा-निर्देश

जनाक्रोश को देखते हुए सरकार ने अप्रैल में कई राहत बातें घोषित कीं। पुरानी व्यवस्था के अनुसार बैलेंस खत्म होने पर अधिकतम तीन दिन तक बिजली न काटने का निर्णय लिया गया। इस दौरान पांच स्तर के SMS अलर्ट सिस्टम को भी लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद भी विरोध थमता नहीं दिखा, जिसके चलते सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड मोड में बदलने का निर्णय लिया।

नई सुविधा और आम लोगों पर असर

अब उपभोक्ता पहले की तरह बिजली उपयोग करने के बाद बिल का भुगतान करेंगे। बकाया राशि के भुगतान की सुविधा 10 किश्तों में दी गई है। इसके अतिरिक्त, बिल हर महीने की 10 तारीख को जारी होगा और भुगतान के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। नए कनेक्शन पोस्टपेड में भी चालू किए जा सकेंगे। इस तरह, यह बदलाव लाखों लोगों को सीधा प्रभावित करेगा।

सरकार की रणनीति और आगामी चुनाव

यह पूरी स्थिति योगी सरकार के लिए महत्वपूर्ण बन गई है क्योंकि इस साल के अंत में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। जनता की नाराजगी को देखते हुए, सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है। लोगों के मन में प्रीपेड स्मार्ट मीटर की संदेह और आशंकाएं कितनी दूर हो पाएंगी, यह देखना अब बाकी है।

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