Supreme Court की सख्ती: लग्जरी लिटिगेशन पर फटकार, अमीरों की मनमानी नहीं चलेगी

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावशाली लोगों की ‘लग्जरी लिटिगेशन’ (शौकिया मुकदमेबाजी) पर नाराजगी जताई है। जब आम लोगों को अपनी अर्जी पर सुनवाई के लिए सालों तक इंतजार करना पड़ता है, तब ऐसे समय में अमीरों की ये आदत न्याय व्यवस्था में गंभीर समस्याएं पैदा कर रही है। कोर्ट ने एक्ट्रेस रेहाना खान और उनके वकील रिजवान सिद्दीकी की याचिका खारिज करते हुए दोनों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों पक्ष ‘साफ नीयत’ के साथ अदालत में नहीं आए थे।

कोर्ट का टाइम बर्बाद करने वाला मामला

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि दोनों पक्षों ने पिछले 11 सालों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्याय की उम्मीद से लड़ाई जारी रखी है। लेकिन कोर्ट में पेश होकर जब उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट तरीके से नहीं रखी, तो यह साफ हो गया कि उनका मकसद कुछ और है। बेंच ने कहा कि इस तरह की अदालती प्रक्रिया से असली जरूरतमंदों को न्याय की कतार में और भी देर होगी।

सुप्रीम कोर्ट का फटकार

बेंच ने दोनों पक्षों के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनका यह काम अदालत की गरिमा के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि यदि किसी को गंभीरता से कुछ कहना है, तो वह अपनी बात मुख्य मुद्दे पर रखे। कोर्ट ने ये भी बताया कि हर पक्ष ने ऐसी दलीलें दीं जो इस बात को छिपाने का प्रयास थीं कि उन्हें क्या सही करना था।

न्यायालय नहीं है मॉक ड्रामा का मंच

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्यवाही में ड्रामा या दिखावे का कोई स्थान नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ ने बेंच में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत कोई ऑडिटोरियम नहीं है, जहां मुकदमे एक शो के समान लगें। असलियत में, यह एक गंभीर मुद्दा है जो दो पक्षों की आपसी लड़ाई को दर्शाता है।

समय की बर्बादी से असली मामलों को नुकसान

दूसरे मामलों में न्याय की दरख्वास्त करने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि इस तरह की लग्जरी लिटिगेशन से असली केसों में सुनवाई में देरी हो रही है। बेंच ने दोहराया कि कोर्ट का समय कीमती है और इसे इस तरह के बेजा मुकदमों में बर्बाद नहीं किया जा सकता। इस कारण से उन मामलों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो असल में गंभीर और जरूरी हैं।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ये संदेश स्पष्ट किया है कि न्यायालय का राजस्व और संसाधन उन लोगों के लिए हैं, जो उनपर सही ठिकाने के लिए भरोसा करते हैं। अमीरों के लिए सुविधाएं और मनमानी का यह दौर अब समाप्त किया जाएगा, क्योंकि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्याय सबके लिए समान है।

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