यूसीसी: असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह की घोषणा पर उठाए गंभीर सवाल

The CSR Journal Magazine
एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की घोषणा पर कड़ा सवाल उठाया है। ओवैसी ने कहा कि यह कानून गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश है। उनकी नजर में, इस पहल का उद्देश्य सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाना है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा, “भाजपा ने खुद यूसीसी के लिए एक विधि आयोग नियुक्त किया था, जिसने कहा था कि यह न तो जरूरी है और न ही वांछित।” उन्होंने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि भारत की विविधता इसकी आत्मा है।

यूसीसी की वास्तविकता

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि यूसीसी का मतलब समानता नहीं, बल्कि मुसलमानों पर अंकुश लगाने का एक सफेद जाल है। उन्होंने कहा, “भाजपा के अपने राज्य ऐसे कानून पारित करते हैं जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संपत्ति की बिक्री पर रोक लगाते हैं। उनका उद्देश्य लोगों के बीच भेदभाव उत्पन्न करना है।” ओवैसी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह तथाकथित ‘लव जिहाद’ कानून लागू कर मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाती है।

भाजपा के सहयोगियों पर ओवैसी की टिप्पणी

ओवैसी ने भाजपा के सहयोगी दलों को भी चेतावनी दी है कि उन्हें अपनी स्वतंत्र आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह भाजपा के सहयोगियों के लिए यह दिखाने का समय है कि वे सिर्फ एक छोटी भाजपा नहीं हैं।” इसके साथ ही, ओवैसी ने अमित शाह के अहंकार और उनकी नीतियों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया है। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह 2019 में सीएए और एनआरसी विरोधी आंदोलन हुआ था, जब प्रधानमंत्री को यह स्वीकार करना पड़ा कि कोई एनआरसी नहीं होगा।

एसआईआर की दुर्दशा

असदुद्दीन ओवैसी ने एसआईआर का भी जिक्र किया और कहा कि वर्तमान समय में आम लोगों को कागजात के साथ सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इससे खासकर अल्पसंख्यक, एससी-एसटी और प्रवासियों को बहुत परेशानी हो रही है। ओवैसी ने आशंका जताई कि एनआरसी इससे भी अधिक दुर्बल साबित होगा। उनके मुताबिक, असम का एनआरसी एक अच्छा उदाहरण है कि इस तरह के कानून कितने विनाशकारी हो सकते हैं।

कागजात के ढेर में नागरिकता?

ओवैसी ने कहा कि एनआरसी लागू होने पर हर नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में लगना पड़ेगा। उन्होंने इस सवाल को उठाया कि “एक देश में जहाँ 80 करोड़ लोग राशन के लिए निर्भर हैं, क्या आप चाहते हैं कि वे कागजात ढूंढें और अपनी नागरिकता साबित करें?” ओवैसी ने यह बताया कि यह सरकार लोगों को किसी न किसी बाबू की दया पर निर्भर रहकर जीने का प्रयास कर रही है, जो कि समाज के लिए उचित नहीं है।

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