सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बांके बिहारी मंदिर में दान का एक-एक पैसा मंंदिर के खजाने में जमा हो

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मंदिर को प्राप्त होने वाला हर दान केवल दान-पात्रों या ऑनलाइन माध्यमों से ही मंदिर के खजाने में जमा होना चाहिए। इस आदेश का उद्देश्य दान की पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना है।

प्रबंधन समिति को स्पष्ट दिशा-निर्देश

जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंदिर प्रबंधन समिति को हर संभव कदम उठाने के लिए कहा है ताकि गड़बड़ियों की आशंका खत्म की जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में यदि सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति का कोई दखल पाया गया तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। यह निर्देश मंदिर के प्रशासन से जुड़े एक बड़े विवाद के संदर्भ में दिए गए हैं।

कानूनी ढांचे का निर्माण, हर सुविधा के लिए बनी कमेटी

यह विवाद तब प्रारंभ हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025’ को लागू किया। इसका मकसद मंदिर के प्रबंधन को एक कानूनी ढांचे के तहत लाना था, जो कि पहले से चल रही 1939 की प्रबंधन योजना को बदलने का प्रयास कर रहा था। इस योजना के अंतर्गत दर्शन, धार्मिक प्रथाओं और मंदिर के वित्त से जुड़े प्रावधान शामिल थे। अगस्त 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी का कार्य श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना था, जैसे पीने का पानी, शेल्टर और वॉशरूम। इसके अलावा, मंदिर और उसके आस-पास के क्षेत्र के विकास की योजना बनाना भी इस कमेटी की जिम्मेदारी थी।

फंड के उपयोग पर उठे सवाल, दान की प्रक्रिया पर कड़ी नजर

हाल ही में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकील श्याम दीवान ने मंदिर के फंड के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फंड का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए जो अनुचित हो। अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि क्या प्रॉपर्टी खरीदना कमेटी के अधिकारों में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को यह आदेश दिया है कि भक्तों द्वारा दान किया गया पैसा सीधे मंदिर से जुड़े लोगों के पास न जाए, बल्कि सबसे पहले देवता के नाम पर जमा होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी दान पारदर्शी तरीके से देवता के खजाने में पहुंचें।

भगदड़ की चिंताएं और सुझाव

सुनवाई के दौरान, दीवान ने पहले हुई भगदड़ का हवाला देते हुए दर्शन की व्यवस्था को रेगुलेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टिकटिंग या ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग किया जाए। इस पर अदालत ने ध्यान देने का आश्वासन दिया।

भक्तों का धन देवता को अर्पित

अदालत ने स्पष्ट किया कि दान का पहले देवता को अर्पित होना आवश्यक है। जस्टिस बागची ने कहा कि कोई भी सेवायत या पुजारी देवता के धन को तब तक अपने अधिकार में नहीं ले सकता जब तक कि यह पहले देवता को अर्पित नहीं किया गया हो। इस प्रकार का निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि पारदर्शिता और धार्मिक संवेदनशीलता बनी रहे।

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