क्या भारत में गरीब बच्चे बढ़ रहे हैं अपराध की ओर? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

The CSR Journal Magazine
भारत में बच्चे अपराध की ओर अग्रसर हो रहे हैं या इसके पीछे कुछ और कारण हैं? सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह सवाल उठाया। अदालत का मानना है कि सिर्फ गरीबी ही किशोर अपराध का कारण नहीं है, बल्कि परिवार की स्थिति, शिक्षा और वातावरण भी महत्वपूर्ण हैं।

गरीबी और किशोर अपराध का संबंध

भारत में 2024 में किशोर अपराध के कुल 34,878 मामले दर्ज हुए, जिनमें सबसे ज्यादा 16 से 18 साल के किशोरों की हिस्सेदारी 77.7% रही। यदि हम गरीबी पर ध्यान दें, तो क्या यह सच में बच्चों को अपराध की ओर धकेलती है? यह प्रश्न आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है।

नीति निर्धारण में चेतावनी, कौन हैं जिम्मेदार?

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने बताया कि किशोर न्याय प्रणाली में ऐसे कई प्रावधान हैं जो बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन इसे सही तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कई बार बच्चों के खराब व्यवहार के पीछे उनके सामाजिक और आर्थिक हालात होते हैं। परिवार का माहौल, पढ़ाई की स्थिति और समाज में भेदभाव जैसे कारण भी किशोरों को गलत राह दिखा सकते हैं।

NCRB की रिपोर्ट पर नजर, अपराध की दुनिया में कदम रखने के कारण

NCRB की 2024 रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बच्चों पर हुए अपराध के मामलों में वृद्धि हुई है। हालांकि, NCRB भी गरीबी को सीधे तौर पर अपराध का कारण नहीं मानता। बच्चों के शिक्षा स्तर और पारिवारिक स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि अधिकतर अपराध प्रभावित बच्चे योग्यतम परिस्थितियों से आते हैं। नाबालिगों का संबंध केवल फंडामेंटल जरूरतों से नहीं है। कोई बच्चा सिर्फ उसकी आर्थिक स्थिति से अपराधी नहीं बनता। उसके आसपास का माहौल, परिवार की स्थिति, शिक्षा और दोस्तों का प्रभाव भी प्रमुख भूमिका निभाता है।

शहरों की तरफ तेजी से पलायन, सुधार और रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता

शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते कई परिवारों को अपनी पारंपरिक व्यवस्थाओं को छोड़ना पड़ा है। इससे बच्चों की पारिवारिक और सामाजिक सुरक्षा कमजोर हुई है, जिससे उन्हें गलत संगत में जाने का खतरा बढ़ता है। अदालत ने कहा कि बच्चों को एक अपराधी के रूप में देखने की बजाय उनकी परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। सरकार की जिम्मेदारी है कि बच्चे को सुधारने और समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कदम उठाए।

किशोरों के आधुनिक व्यवहार, क्या वास्तव में बदल रही है तस्वीर?

सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी उस समय आई, जब एक अन्य पीठ ने तकनीक और बच्चों के बदलते व्यवहार पर चर्चा की थी। बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना जरूरी है, जैसे सोशल मीडिया और वर्चुअल इंटरैक्शन। हालाँकि, आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि किशोर अपराध के मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन यह भी देखा गया है कि आधिकारिक डेटा में केवल गरीब बच्चों को ही अपराधी नहीं समझा जा सकता। इसे सही तरीके से समझने की जरूरत है।

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