इन्हें खुद खाओ: महाराष्ट्र में रिश्वत के आरोप में भीड़ ने किया FDA अधिकारी का घेराव

The CSR Journal Magazine

महाराष्ट्र में रिश्वतखोरी की हद; एक्सपायर्ड फूड पर घिरे FDA अधिकारी को भीड़ ने जबरन बिस्कुट ठूंसने की कोशिश की

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले से जनता के गुस्से और सिस्टम की लापरवाही की एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के एक स्थानीय बाजार में एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदार को बचाने और उसके बदले कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के एक अधिकारी को गुस्साई भीड़ ने बंधक बना लिया। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में आक्रोशित लोगों की भारी भीड़ अधिकारी को चारों तरफ से घेरकर खड़ी नजर आ रही है। इस दौरान लोगों ने अधिकारी के सामने जब्त किए गए एक्सपायर्ड बिस्कुट के पैकेट फेंक दिए और बेहद गुस्से में चिल्लाते हुए कहा— “इन्हें खुद खाओ!” बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी; भीड़ में शामिल कुछ बेहद नाराज लोगों ने अधिकारी के मुंह में जबरन वे एक्सपायर्ड बिस्कुट ठूंसने का प्रयास भी किया।

मासूम बच्चे के बीमार होने से भड़का था विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब बाजार की एक स्थानीय पान दुकान से खरीदे गए नमकीन स्नैक्स मिक्स्चर (Savoury Snack Mix) को खाने के बाद एक दो वर्षीय मासूम बच्चे की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई। स्नैक खाने के कुछ ही देर बाद बच्चे को गंभीर चक्कर आने लगे और उसकी हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में डरे हुए परिजनों ने बच्चे को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटना से बच्चे के परिजनों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश फैल गया। इसके बाद नागरिकों ने सजगता दिखाते हुए तत्काल छत्रपति संभाजीनगर स्थित FDA कार्यालय से संपर्क साधा और दुकानदार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। जनता की इस गंभीर शिकायत के आधार पर विभागीय कार्रवाई के तहत एक FDA अधिकारी औचक निरीक्षण (Inspection) करने के लिए संबंधित दुकान पर पहुंचा।

निरीक्षण के दौरान रिश्वत और ‘सेटिंग’ के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी के दुकान पर पहुंचने से ठीक पहले ही दुकानदार ने उस दूषित और एक्सपायर्ड स्नैक मिक्स्चर के पूरे स्टॉक को दुकान से हटा दिया था, जिसे खाकर बच्चा बीमार हुआ था। हालांकि, जब अधिकारी ने दुकान के अंदर गहन तलाशी ली, तो वहां भारी मात्रा में एक्सपायर्ड बिस्कुट के पैकेट्स बरामद हुए, जिन्हें धड़ल्ले से ग्राहकों को बेचा जा रहा था। असली विवाद इसके बाद शुरू हुआ। मौके पर मौजूद भीड़ ने देखा कि अधिकारी ने एक्सपायर्ड बिस्कुट तो जब्त कर लिए, लेकिन उसने आरोपी दुकानदार के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने सीधा आरोप लगाया कि अधिकारी ने दुकानदार से कथित रूप से मोटी रिश्वत ली और मामले को रफा-दफा (सेटल) करने की कोशिश करने लगा। जैसे ही लोगों को भनक लगी कि अधिकारी भ्रष्ट आचरण अपनाकर मिलावटखोर दुकानदार को संरक्षण दे रहा है, वहां मौजूद जनता का सब्र का बांध टूट गया।

“अगर यह सुरक्षित है, तो खाकर दिखाओ”

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि देखते ही देखते दर्जनों लोगों की भारी भीड़ ने भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारी को घेर लिया। लोग अपने हाथों में एक्सपायर्ड बिस्कुट के पैकेट्स लहरा रहे थे। भीड़ ने अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर ये एक्सपायर्ड बिस्कुट खाने के लिए सुरक्षित हैं और दुकानदार निर्दोष है, तो वह खुद इन्हें खाकर दिखाए। हंगामे के बीच कुछ युवकों ने पैकेट खोलकर खराब हो चुके बिस्कुट अधिकारी के मुंह में डालने की कोशिश की। वीडियो में अधिकारी असहज, डरा हुआ और भीड़ के तीखे सवालों से बचता हुआ नजर आ रहा है। स्थानीय पुलिस और FDA के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की सूचना दे दी गई है, हालांकि अभी तक रिश्वत लेने के इन आरोपों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है और विभाग इसकी आंतरिक जांच कर रहा है।

सख्त राज्यव्यापी अभियान के बीच भ्रष्टाचार का बड़ा मामला

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के नवनियुक्त कमिश्नर और बेहद सख्त छवि वाले IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में पूरे राज्य में मिलावटखोरों के खिलाफ एक ऐतिहासिक महा-अभियान चल रहा है। हाल के हफ्तों में विभाग ने राज्य भर में भारी कार्रवाई की है।
ताबड़तोड़ छापेमारी: कोंकण, पुणे, मुंबई और संभाजीनगर संभागों में सैकड़ों नामी होटलों, रेस्तरां, ढाबों और ऑनलाइन डिलीवरी चेन (जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो) के ठिकानों पर छापे मारे गए हैं।
भारी जब्ती: अब तक करोड़ों रुपये के मिलावटी डेयरी उत्पाद, बासी खाद्य पदार्थ और प्रतिबंधित गुटखा नेटवर्क को जब्त किया जा चुका है।
लाइसेंस सस्पेंशन: खाद्य सुरक्षा मानकों (Food Safety Standards) का उल्लंघन करने पर कई बड़े आउटलेट्स के फूड लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं।
एक तरफ जहां राज्य का शीर्ष नेतृत्व भ्रष्टाचार और मिलावटखोरी पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति के तहत कड़े कानून जैसे मकोका (MCOCA) लगाने तक की बात कर रहा है, वहीं छत्रपति संभाजीनगर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर निचले अधिकारी अब भी चंद रुपयों की खातिर मासूमों की जिंदगी दांव पर लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

जब व्यवस्था सोती है, तब भीड़ कानून हाथ में लेती है

छत्रपति संभाजीनगर की यह घटना भारतीय प्रशासनिक और नियामक व्यवस्था के चेहरे पर एक गहरा तमाचा है। यह घटना दो अत्यंत गंभीर पहलुओं को उजागर करती है-
निचले स्तर पर व्याप्त भयानक भ्रष्टाचार: कोई दुकानदार एक्सपायर्ड सामान बेचकर किसी बच्चे को मौत के मुंह में धकेल देता है, और उसे पकड़ने आया सरकारी नुमाइंदा उसी से घूस खाकर उसे बचाने की तरकीबें ढूंढने लगता है। यह जनता के भरोसे की हत्या है।
भीड़तंत्र (Mobocracy) का खतरा: जनता का यह गुस्सा प्रशासनिक विफलता की पैदाइश है। जब आम आदमी को लगने लगता है कि शिकायत के बाद भी न्याय नहीं मिलेगा और सरकारी तंत्र बिक चुका है, तब वह खुद ‘जज’ और ‘जलाद’ बनने की कोशिश करता है। अधिकारी को बिस्कुट ठूंसना भले ही आक्रोश की अभिव्यक्ति हो, लेकिन कानून को हाथ में लेना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल और बेहद सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करे, ताकि जनता का नियम-कानून पर विश्वास बहाल हो सके और भविष्य में कोई भी नागरिक कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न करे।

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