रसुवा बाढ़ के नुकसान की भरपाई करेगा ‘क्लाइमेट फंड’? नेपाल ने मांगी आर्थिक मदद, सामने आई बड़ी चुनौती

The CSR Journal Magazine
नेपाल के रसुवा जिले में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों की जान ले ली है। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन नेपाल सरकार अब इस आपदा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहायता मांग रही है। भोटेकोशी नदी में आई इस बाढ़ को जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताया जा रहा है। इसी आधार पर नेपाल ने लॉस और डैमेज फंड से आर्थिक मदद की मांग की है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: नेपाल का तर्क

नेपाल सरकार का कहना है कि उसका कार्बन उत्सर्जन विश्व के अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, नेपाल का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन मात्र 0.54 टन है, जबकि वैश्विक औसत 4.67 टन है। नेपाल के जलवायु परिवर्तन प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. महेश्वर ढकाल ने कहा कि इसके बावजूद, देश जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभाव झेल रहा है।

नेपाल की अपील: एक जलवायु संतुलन में योगदान देने वाला देश

नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह तर्क रखा है कि उसे केवल जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। देश ने पर्वत, जंगल और जैव विविधता के संरक्षण के माध्यम से वैश्विक जलवायु संतुलन में योगदान दिया है। नेपाल ने सहायता के लिए कोष के बोर्ड को एक पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने अपने अधिकारों की बात की है।

आर्थिक सहायता की संभावित राशि

हालांकि, नेपाल को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी, यह निर्धारित नहीं है। कोष के पूर्व सह-अध्यक्ष रिचर्ड शर्मन के अनुसार, नेपाल को अधिकतम 2 करोड़ डॉलर यानी लगभग 3 अरब रुपये तक मिल सकते हैं। लेकिन यह राशि बाढ़ से हुए नुकसान की तुलना में बहुत कम है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण में ही करीब 50 अरब नेपाली रुपये का खर्च आएगा।

विज्ञान के आधार पर चाहिए मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल को सहायता पाने के लिए यह साबित करना होगा कि रसुवा की बाढ़ जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई है। इसके लिए व्यापक आकलन की आवश्यकता है ताकि नुकसान और कारणों का सही मूल्यांकन किया जा सके। इस आपदा को असाधारण और विशेष मानते हुए नेपाल ने मदद की अपील की है।

लॉस और डैमेज फंड की स्थिति

लॉस और डैमेज फंड की आर्थिक स्थिति भी एक बड़ी चुनौती है। इस कोष ने 134 देशों से 50 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक की सहायता के प्रस्ताव मांगे थे, जबकि 100 से अधिक देश करीब 3 अरब डॉलर की सहायता मांग चुके हैं। कोष ने 82 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, उसके पास केवल 40 करोड़ डॉलर ही उपलब्ध हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos