Nepal Flood: मुर्दाघर भरे, अब भी 5300 लोग लापता

The CSR Journal Magazine

भयानक बाढ़ ने मचाई तबाही

नेपाल में एक महीने पहले आई बाढ़ ने भयंकर नुकसान पहुंचाया है। नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, इस आपदा में 1,453 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि 5,285 लोग अब भी लापता हैं। बचाव कार्यों में 13,795 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नुवाकोट, रसुवा और धाडिंग जैसे इलाकों में लोग अब भी होल्डिंग सेंटर में रह रहे हैं।

लापता लोगों की पहचान मुश्किल

बाढ़ के कारण कई गांवों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। भोटेकोशी नदी ने जो तबाही मचाई, उससे बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा। सुरक्षा एजेंसियों ने लगभग 11 हजार लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की है। हालांकि, बहुत से घायलों का अभी भी इलाज चल रहा है। सबसे कठिनाई मृतक पहचानने में आ रही है। केवल 112 शवों की पहचान हुई है, बाकी का पता अभी नहीं चल पाया है।

मुर्दाघर की स्थिति अत्यंत खराब

नेपाल के मुर्दाघरों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। अधिकारियों ने इस विपदा के चलते 1,421 अनजान शवों की जानकारी ऑनलाइन दी है, लेकिन इसके बाद भी कई परिवार अपने प्यारों की तलाश में भटक रहे हैं। शवों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है। इसलिए कई अनजान लाशों को सुरक्षित रूप से दफनाने का निर्णय लिया गया है।

DNA प्रोफाइलिंग से पहचान का प्रयास

नेपाल पुलिस लापता लोगों की पहचान के लिए DNA प्रोफाइलिंग का सहारा ले रही है। पुलिस ने 1,329 DNA सैंपल और लापता लोगों के रिश्तेदारों से 2,060 सैंपल लिए हैं। स्थानीय पुलिस का मानना है कि इसके माध्यम से लापता लोगों और बरामद शवों के बीच संबंध स्थापित किया जा सकेगा।

सड़क कनेक्टिविटी बहाल करने की कोशिशें

बाढ़ के बाद सड़कों की स्थिति भी खराब है। अधिकारियों ने सड़क कनेक्टिविटी बहाल करने की दिशा में बेली ब्रिज लगाने का काम शुरू कर दिया है। देवीघाट पर आर्मी द्वारा बनाए गए पुल ने गलछी-बिदुर मार्ग को खोल दिया है। हालांकि, स्याब्रुबेसी से रसुवागढ़ी तक की मुख्य सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। नई सड़क बनाने के लिए सर्वे भी शुरू हो चुका है।

राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कतें

क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत सामग्री का वितरण भी प्रभावित हो रहा है। रसुवा के धुनचे में खाद्य सामग्री का स्टॉक जमा है, जबकि कुछ गांव अब भी हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अस्थायी मार्गों पर निर्भर हैं। प्रशासन इस स्थिति को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। खासकर, अक्टूबर के मध्य तक गलछी-स्याब्रुबेसी सेक्शन पर यातायात को बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

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