रात के अंधेरे में बड़ा रेल हादसा टला: रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस से टकराई ट्रैक्टर-ट्रॉली

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वंदे भारत एक्सप्रेस से ट्रैक्टर की टक्कर ने उड़ाए यात्रियों के होश, रात के समय हुआ हादसा, यात्रियों में मचा हड़कंप

झारखंड के हजारीबाग जिले में शुक्रवार देर शाम एक बेहद भयावह रेल हादसा होते-होते बचा। रांची से पटना की ओर जा रही हाई-स्पीड रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22350) चरही और बेस रेलवे स्टेशन के बीच ट्रैक पर अचानक आए एक लकड़ी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली से सीधे टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रेन के इंजन के आगे का हिस्सा (नोज कोन) क्षतिग्रस्त हो गया। घने अंधेरे के बीच अचानक हुए इस हादसे से ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों के होश उड़ गए और पूरी ट्रेन में चीख-पुकार के साथ हड़कंप मच गया। हालांकि, लोको पायलट की सूझबूझ और मुस्तैदी के कारण एक बड़ी तबाही टल गई और सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

रात के सन्नाटे में तेज धमाका, सहम गए यात्री

चश्मदीद यात्रियों और रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, वंदे भारत एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर रांची से खुलकर पटना की ओर बेहद तेज रफ्तार में दौड़ रही थी। शाम के करीब 6:00 बजे जब ट्रेन चरही और बेस स्टेशन के बीच स्थित एक अंधेरे और सुनसान खंड से गुजर रही थी, तभी अचानक रेलवे ट्रैक पर एक बिना फाटक वाले कच्चे रास्ते से लकड़ी लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली आ गई। तेज गति से आ रही वंदे भारत के लोको पायलट ने ट्रैक्टर को पटरी पर देखते ही तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए, लेकिन गति अधिक होने के कारण ट्रेन सीधे ट्रैक्टर की भारी-भरकम ट्रॉली से जा टकराई। टक्कर लगते ही एक जोरदार धमाका हुआ और पूरी ट्रेन में एक भयानक झटका महसूस किया गया। रात के सन्नाटे में अचानक हुए इस जोरदार झटके और तेज आवाज से यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

डिब्बों में मची चीख-पुकार, 41 मिनट तक थमी रहीं सांसें

ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों ने बताया कि झटका इतना तेज था कि कई लोग अपनी सीटों से आगे की ओर झुक गए और बर्थ पर रखा सामान नीचे गिर गया। बोगियों के भीतर बैठे यात्रियों को लगा कि ट्रेन पटरी से उतर गई है। कुछ ही सेकंड में कोच के भीतर डरे-सहमे यात्रियों की चीखें सुनाई देने लगीं। लोको पायलट ने मुस्तैदी दिखाते हुए गाड़ी को पूरी तरह रोक दिया। दुर्घटना के तुरंत बाद वंदे भारत एक्सप्रेस करीब 41 मिनट तक उसी घने अंधेरे और सुनसान जंगल वाले इलाके में खड़ी रही। इस दौरान यात्रियों के दिलों की धड़कनें बढ़ी रहीं। लोग मोबाइल की टॉर्च जलाकर खिड़कियों से बाहर झांकने लगे और यह जानने की कोशिश करने लगे कि आखिर माजरा क्या है। कुछ ही समय बाद जब लोको पायलट और ट्रेन स्टाफ ने घोषणा कर सभी को आश्वस्त किया कि सभी सुरक्षित हैं और ट्रेन पटरी पर ही है, तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली।

मौके पर पहुंचे अधिकारी, इंजन का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली के परखच्चे उड़ गए और वंदे भारत के फाइबर से बने अगले हिस्से (फ्रंट नोज) को भारी नुकसान पहुंचा। घटना की सूचना मिलते ही धनबाद रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी टीम और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। रेलवे की तकनीकी टीम ने सबसे पहले यह सुनिश्चित किया कि ट्रेन के पहिए पटरी से नीचे तो नहीं उतरे हैं। गनीमत यह रही कि इतने जोरदार इंपैक्ट के बावजूद वंदे भारत के पहिए पूरी तरह सुरक्षित ढंग से पटरी पर टिके रहे। ट्रैक पर बिखरी हुई लकड़ियों और क्षतिग्रस्त ट्रैक्टर के मलबे को रेलवे कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए हटाया। इसके बाद पूरे सुरक्षा मानकों और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की गई। करीब 41 मिनट की कड़ी मशक्कत और रूट क्लियर होने के बाद ट्रेन को हजारीबाग टाउन स्टेशन की ओर रवाना किया गया, जहां दोबारा उसकी बारीकी से जांच की गई।

अन्य ट्रेनों के परिचालन पर पड़ा असर

इस अचानक हुए हादसे के कारण धनबाद रेल मंडल के इस संवेदनशील रूट पर ट्रेनों का परिचालन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। वंदे भारत एक्सप्रेस के दुर्घटनास्थल पर खड़े रहने के कारण पीछे से आ रही कोडरमा-बरकाकाना पैसेंजर ट्रेन को हजारीबाग टाउन स्टेशन पर करीब आधे घंटे तक रोक कर रखना पड़ा। जब वंदे भारत एक्सप्रेस हजारीबाग टाउन स्टेशन से सुरक्षित आगे प्रस्थान कर गई, उसके बाद ही पैसेंजर ट्रेन को बरकाकाना की ओर रवाना किया जा सका।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, जांच के आदेश

इस भीषण टक्कर ने भारतीय रेलवे के सबसे प्रीमियम और हाई-स्पीड रूटों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा और संवेदनशील सवाल यह है कि इतनी देर रात बिना फाटक वाले कच्चे रास्ते से लकड़ी से लदी एक भारी-भरकम ट्रैक्टर-ट्रॉली आखिर हाई-स्पीड ट्रैक के इतने पास कैसे पहुंच गई? क्या वहां कोई अवैध खनन या लकड़ियों की तस्करी की जा रही थी? मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन और धनबाद रेल मंडल काफी सख्त रुख अपना रहा है।

फरार ट्रैक्टर चालक की तलाश

घटना के तुरंत बाद ट्रैक्टर का चालक मौका पाकर अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से फरार हो गया। स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त टीमें ट्रैक्टर के मालिक और फरार चालक की शिनाख्त करने के लिए छापेमारी कर रही हैं। रेलवे ने मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। यह घटना एक बड़ा सबक है कि हाई-स्पीड ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए रेलवे ट्रैकों के आसपास फेंसिंग (घेराबंदी) और मानव रहित या अवैध कच्चे रास्तों पर कड़ी निगरानी रखना कितना अनिवार्य हो चुका है। यदि लोको पायलट ने समय रहते इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाए होते, तो देश एक बेहद बड़े और दर्दनाक रेल हादसे का गवाह बन सकता था।

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