UP कांग्रेस में Priyanka Gandhi की वापसी: प्रदर्शन पर सवाल, दो अहम बैठकें

The CSR Journal Magazine
लखनऊ: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रियता यूपी की राजनीति में एक बार फिर देखने को मिल रही है। दिसंबर 2023 से औपचारिक रूप से यूपी प्रभारी नहीं होने के बावजूद, प्रियंका ने पिछले 10 दिनों में यूपी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ दो महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। इन बैठकों में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद जैसे कई नेता शामिल रहे। राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक समीक्षा से ज्यादा प्रियंका की बढ़ती दखल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बदलाव की बयार

हाल ही में अविनाश पांडे की जगह राजेंद्र पाल गौतम को यूपी प्रभारी बनाया गया है। इसके साथ ही, अजय राय की जगह आराधना मिश्रा मोना को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है। आराधना मिश्रा को प्रियंका का करीबी माना जाता है, जिससे यह संदेश गया है कि यूपी से जुड़े बड़े फैसलों में अंतिम राजनीतिक राय प्रियंका की होगी। यह बदलाव कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर विधानसभा चुनावों के मद्देनजर।

प्रियंका का राजनीतिक सफर

प्रियंका गांधी को जनवरी 2019 में कांग्रेस का महासचिव बनाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। सितंबर 2020 में उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया गया। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने दो बड़े चुनाव लड़े, लेकिन नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे। 2019 में प्रियंका ने लोकसभा चुनाव में जोरदार प्रचार किया, लेकिन पार्टी को केवल एक सीट रायबरेली मिली। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब राहुल गांधी अमेठी सीट हार गए।

2022 का चुनाव: एक बड़ा झटका

2022 विधानसभा चुनाव प्रियंका गांधी की रणनीति और चेहरे पर लड़ा गया। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान चलाया गया, जिसमें महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट दिए गए। कांग्रेस ने 399 सीटों पर अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया, लेकिन परिणाम कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहे। 403 सीटों में पार्टी केवल 2 सीटें जीत सकी, और 380 से अधिक उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

प्रियंका की वापसी और कांग्रेस का प्रदर्शन

23 दिसंबर 2023 को प्रियंका को यूपी प्रभारी पद से मुक्त कर दिया गया और अविनाश पांडे को जिम्मेदारी दी गई। इसके लगभग चार महीने बाद हुए 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन किया। कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटें जीत लीं। पार्टी का वोट शेयर बढ़कर करीब 9.46 प्रतिशत पहुंच गया। अमेठी सीट भी बीजेपी से वापस छीन ली गई।

राजनीतिक संदेश क्या है?

यूपी कांग्रेस में यह माना जा रहा है कि भले ही संगठनात्मक पद किसी और के पास हो, लेकिन प्रियंका की भूमिका रणनीति, गठबंधन, सीट चयन और चुनावी अभियान के बड़े फैसलों में पहले से कहीं ज्यादा अहम रहने वाली है। समर्थक कहते हैं कि प्रियंका ने संघर्ष किया, जबकि आलोचकों का कहना है कि उनके नेतृत्व में 2022 में कांग्रेस ने सबसे खराब प्रदर्शन किया था।

सड़क पर संघर्ष और पहचान

हालांकि चुनावी नतीजे निराशाजनक रहे, प्रियंका ने हाथरस कांड, लखीमपुर खीरी हिंसा और सोनभद्र हिंसा जैसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप कर कांग्रेस को सड़क पर संघर्ष करने वाली पार्टी के रूप में पेश किया। उन्होंने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की भी कोशिश की और महिला भागीदारी को राजनीति के बड़े विमर्श का हिस्सा बनाया। लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी बूथ स्तर का संगठन रहा। इस दौरान जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह और ललितेश पति त्रिपाठी जैसे कई चेहरे पार्टी छोड़कर चले गए।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos