UP मऊ में एक्सपायरी वैक्सीन से चार पशुओं की मौत, डॉक्टर और MLC के बीच तीखी नोकझोंक

The CSR Journal Magazine
मऊ के कुतुबपुर गांव में चार पशुओं की मौत और दो अन्य के बीमार पड़ने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इस मामले में सुभासपा एमएलसी बिच्छेलाल राजभर ने पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा। जब वे पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे पशु चिकित्सक से मिले, तो उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई। वायरल वीडियो में एमएलसी के साथ मौजूद कुछ लोग डॉक्टर को बांधने की बात करते सुनाई दे रहे हैं। डॉक्टर ने भी कहा, ‘मैं पहले भी सस्पेंड रह चुका हूं, एक बार फिर सस्पेंड कराइये।’ यह स्थिति पशुपालकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

पशुओं की मौत का कारण क्या है?

कुतुबपुर गांव में 26 अक्टूबर को पशुओं को टीका लगाए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की शिकायतें आईं। इंदाली देवी की दो भैंसें और अन्य पशुपालकों के पशुओं की भी मौत हुई। इंदाली देवी ने बताया कि उनकी भैंसों की कीमत 80 हजार से एक लाख रुपये तक है। इस घटना ने तीन परिवारों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि ये भैंसें उनके दूध के कारोबार का हिस्सा थीं।

डॉक्टर और MLC के बीच की बहस, पुलिस का हस्तक्षेप

जब एमएलसी बिच्छेलाल राजभर ने घटना की जानकारी ली, तो डॉक्टर के साथ उनकी बहस शुरू हो गई। डॉक्टर ने कहा कि वह अपने उच्चाधिकारियों के आदेश पर आए हैं और इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। इस दौरान कुछ लोग डॉक्टर को बांधने के लिए उकसाते रहे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस मामले में पुलिस भी पहुंची, लेकिन डॉक्टर ने आरोप लगाया कि एमएलसी के समर्थकों ने उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जब पुलिस आई, तब उन्होंने किसी तरह अपनी जान बचाई। यह घटना पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।

टीकाकरण अभियान की समयसीमा पर सवाल, फार्मासिस्ट और निजी चिकित्सक पर कार्रवाई

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीपी सिंह कुशवाहा ने बताया कि जिले में खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान 8 सितंबर को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद 26 अक्टूबर को वैक्सीन का इस्तेमाल कैसे हुआ, यह एक बड़ा सवाल है। विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि वैक्सीन कहां से आई और उसकी वैधता की जांच किसने की। शिकायत के अनुसार, निजी पशु चिकित्सक राजकुमार राजभर ने पशुपालकों की मर्जी के खिलाफ जाकर वैक्सीन लगाई। इसके साथ ही, कोपागंज राजकीय पशु चिकित्सा केंद्र के फार्मासिस्ट राजेंद्र यादव पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने निजी व्यक्ति को वैक्सीन उपलब्ध कराई। पुलिस ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

मौत का असली कारण क्या है?

डॉक्टरों की एक टीम ने मृत पशुओं का पोस्टमार्टम किया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई गई है, लेकिन असली कारण का पता विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। यह भी जानना जरूरी है कि क्या इन पशुओं की मौत वैक्सीन से संबंधित है। कुतुबपुर की घटना में केवल टीका लगाने वाले व्यक्ति की भूमिका तक सीमित रहना उचित नहीं होगा। वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया, उसकी एक्सपायरी डेट, भंडारण और वितरण की जांच जरूरी है। यदि एक्सपायरी वैक्सीन का इस्तेमाल हुआ है, तो जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।

पशुपालकों को आर्थिक नुकसान की भरपाई

पशुओं की मौत से प्रभावित परिवारों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई का सवाल भी बना हुआ है। जनप्रतिनिधियों का अधिकारियों से जवाब मांगना उनका अधिकार है, लेकिन किसी सरकारी कर्मचारी को बांधने के लिए उकसाना गंभीर मामला है। अब पुलिस की जांच और विभागीय रिपोर्ट का इंतजार है।

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