कागजों की गलती ने छीन ली कमाई, गेहूं बेचने के लिए दर-दर भटक रहे जालौन के अन्नदाता

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में इस समय गेहूं की सरकारी खरीद का काम जारी है, लेकिन सैकड़ों किसान अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। विडंबना यह है कि किसानों के खेतों में तो गेहूं लहलहा रहा है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड (ई-पड़ताल) में वहां मूली, मटर या सब्जियां दर्ज हैं। इस तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसान सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं और सरकारी केंद्रों पर अपना गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं।

आकर्षक स्थिति में गेहूं, पर कागजों में रुकावट

जालौन जिले के किसान वर्तमान में एक बड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं। उनके खेतों में गेहूं तैयार है और फसल का रंग भी सुनहरा है, लेकिन सरकारी खरीद केंद्रों पर इसे बेचने में उन्हें मुश्किल हो रही है। असल में, खसरा रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण किसान अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं।

कागजों की दिक्कत से बढ़ी परेशानी

किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद के लिए आवश्यक कागजात सही होने चाहिए, लेकिन खसरा रिकॉर्ड में उनकी फसल दूसरी फसल के रूप में दर्ज है। जालौन के कोंच, माधौगढ़ और जालौन तहसीलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ लेखपालों द्वारा की गई डिजिटल क्रॉप सर्वे (ई-पड़ताल) में भारी गलतियां हुई हैं। उदाहरण के तौर पर, जालौन के अंखेरा गांव के किसानों के खेतों में गेहूं की फसल खड़ी है, लेकिन सरकारी खसरे में उसे ‘मूली’ या ‘सब्जी’ दिखा दिया गया है।

पंजीकरण में बाधा

इस वर्ष सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं कि पोर्टल पर पंजीकरण केवल तभी होगा जब खतौनी और डिजिटल सर्वे में फसल का मिलान होगा। रिकॉर्ड में गेहूं न होने के कारण सॉफ्टवेयर किसानों का आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा। इस स्थिति ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीरता से प्रभावित किया है। राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं मिलने पर किसान व्यथित हो रहे हैं।

प्रशासन का हस्तक्षेप, लेकिन समाधान नहीं

स्थानीय प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे तहसील जाकर अपने खसरा रिकॉर्ड को सुधारें। प्रशासन का कहना है कि ऐसा करने से उनकी समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन किसान इस प्रक्रिया में समय और मेहनत लगाने को तैयार नहीं हैं। उनकी मेहनत का फल न मिलना उन्हें मानसिक परेशानी में डाल रहा है।

उम्मीदें और चुनौतियाँ

किसानों की उम्मीदें अब धुंधली होती जा रही हैं। जहां उन्हें अपनी मेहनत की फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन और अन्य चुनौतियाँ भी उनके सामने हैं। गेहूं की फसल का उत्पादन हमेशा से उनकी जीवनरेखा रहा है, लेकिन इस बार स्थिति काफी जटिल हो गई है। यह स्थिति न केवल कृषि क्षेत्र के लिए बल्कि जिलों की आर्थिक स्थिरता के लिए भी चिंताजनक है।

सरकार के निर्देश, लेकिन किसके लिए?

सरकारी अधिकारी बार-बार किसानों से राहत दिलाने के वादे कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। किसान कागजों की गलती के कारण सरकारी खरीद केंद्रों में जाकर निराश लौट रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर गेहूं न बिक पाने के कारण किसान परेशान हैं। उन्हें डर है कि उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई की उपज को मजबूरन बिचौलियों और निजी व्यापारियों को कम दाम (MSP से नीचे) पर बेचना पड़ेगा। किसानों का आरोप है कि उन्होंने इसकी शिकायत तहसील स्तर पर की है, लेकिन सुधार की प्रक्रिया बहुत धीमी है, जिससे कटाई के सीजन में उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

किसानों की आवाज, अधिकार की मांग

किसान इस स्थिति को लेकर मुखर हो रहे हैं। वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि उनकी मेहनत का सही उसका मूल्य मिल सके। अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आगामी फसल बिक्री और भी प्रभावित हो सकती है, जिससे किसान को और भी नुकसान होगा। यदि समय रहते इन गलतियों को नहीं सुधारा गया, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आगे की योजना और संभावनाएं

किसानों को सरकार और प्रशासन के समर्थन की आवश्यकता है ताकि वे अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें। स्थानीय संगठनों और समूहों को भी उनके अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए। यदि यह समस्या जल्द नहीं सुलझाई गई, तो आने वाले समय में इसका असर और भी गहरा हो सकता है। यह स्थिति राजस्व विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाती है, जहाँ बिना जमीनी हकीकत देखे ‘ई-पड़ताल’ के आंकड़े भर दिए गए। हालांकि जिलाधिकारी ने अब इन विसंगतियों को दूर करने के लिए भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के निर्देश दिए हैं, लेकिन देरी के कारण किसान मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos