मुंबई को मिलेगा पहला समर्पित मैंग्रोव पार्क, दिवाली से पहले खुलने की उम्मीद; ₹33.43 करोड़ में तैयार हुआ गोराई का उद्यान
मुंबई के प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वालों और स्कूली बच्चों के लिए अच्छी खबर है। शहर के गोराई इलाके में तैयार किया गया भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी मैंग्रोव पार्क जल्द ही आम लोगों के लिए खोला जा सकता है। लगभग 33.43 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस उद्यान का उद्घाटन पिछले छह महीने से अधिक समय से लंबित है। अब अधिकारियों की ओर से संकेत मिले हैं कि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले 10 से 15 दिनों के भीतर इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया जा सकता है। इससे दिवाली की छुट्टियों में बच्चों और परिवारों को मुंबई के समुद्री तटीय पर्यावरण को करीब से समझने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अभी उद्घाटन की अंतिम तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
छह महीने से तैयार, फिर भी जनता को प्रवेश का इंतजार
गोराई के बोरिवली पश्चिम क्षेत्र में स्थित यह उद्यान महाराष्ट्र वन विभाग के मैंग्रोव प्रकोष्ठ की ओर से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य केवल एक नया पर्यटन स्थल तैयार करना नहीं, बल्कि मुंबई के तटीय पर्यावरण, खारफुटी के जंगलों और उनसे जुड़े जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्क का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद इसे आम जनता के लिए नहीं खोला जा सका है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया कि अगले 10 से 15 दिनों में उद्घाटन की संभावना है। मैंग्रोव प्रकोष्ठ के प्रमुख एन. आर. प्रवीण ने हाल में उद्यान का निरीक्षण भी किया है। स्थानीय विधायक संजय उपाध्याय ने भी इसे जल्द शुरू किए जाने की बात कही है। इससे पहले मई 2026 में भी उद्घाटन की तारीख घोषित की गई थी, लेकिन आवश्यक ढांचागत और अन्य कार्यों के पूरा होने से जुड़ी चिंताओं के कारण कार्यक्रम टाल दिया गया था। बाद में अप्रैल और मई में भी इसके जल्द खुलने की खबरें आईं, लेकिन आम लोगों को प्रवेश नहीं मिल सका। अब एक बार फिर उम्मीद जगी है कि प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह उद्यान जनता के लिए उपलब्ध होगा। पर्यावरण प्रेमियों ने लंबे समय तक उद्यान बंद रहने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से बने पर्यावरणीय स्थलों का लाभ लोगों को समय पर मिलना चाहिए। इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि उद्घाटन के साथ ही प्रवेश, सुरक्षा, टिकट और संचालन से जुड़ी व्यवस्था भी स्पष्ट कर दी जाए।
740 मीटर लंबा पैदल मार्ग होगा प्रमुख आकर्षण
इस उद्यान का सबसे खास आकर्षण मैंग्रोव के बीच बनाया गया लगभग 740 मीटर लंबा ऊंचा पैदल मार्ग है। इसके जरिए पर्यटक खारफुटी के जंगलों के बीच से गुजरते हुए आसपास की प्राकृतिक संरचना को करीब से देख सकेंगे। मार्ग को इस तरह तैयार किया गया है कि लोगों को जंगल का अनुभव मिले और मैंग्रोव वनस्पति को नुकसान पहुंचाए बिना प्रकृति का अवलोकन किया जा सके। पार्क में प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी देने के लिए कई सुविधाएं विकसित की गई हैं।
1. मैंग्रोव के बीच पैदल भ्रमण- लगभग 740 मीटर लंबे ऊंचे मार्ग से पर्यटक खारफुटी की जड़ों, पौधों और तटीय जंगल के प्राकृतिक वातावरण को करीब से देख सकेंगे। यह अनुभव सामान्य उद्यानों से अलग होगा।
2. पक्षी अवलोकन केंद्र- यहां पक्षियों को देखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इससे पक्षी प्रेमियों, प्रकृति फोटोग्राफरों और विद्यार्थियों को तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक आवास को समझने में मदद मिलेगी।
3. प्रकृति व्याख्या केंद्र- इस केंद्र का उद्देश्य मैंग्रोव, समुद्री तटीय जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देना है। परियोजना से जुड़ी रिपोर्टों में पुस्तकालय, कार्यशाला कक्ष, दृश्य-श्रव्य कक्ष और सूचना केंद्र जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख है।
4. तकनीक से मिलेगी प्रकृति की जानकारी- स्पर्श आधारित आभासी वास्तविकता प्रणाली के माध्यम से मैंग्रोव वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी देने की योजना है। इससे बच्चों के लिए पर्यावरण शिक्षा अधिक रोचक हो सकती है।
क्या होगा प्रकृति व्याख्या केंद्र में?
इस परियोजना में दो मंजिला प्रकृति व्याख्या केंद्र भी शामिल है। मार्च 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सूचना केंद्र, पुस्तकालय, कार्यशालाओं के लिए कक्ष, दृश्य-श्रव्य सुविधा और स्मृति-चिह्न की दुकान जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान है। छत पर भोजनालय की सुविधा का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केंद्र की बिजली संबंधी जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत सौर ऊर्जा से पूरा करने की योजना है। इससे पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को इमारत के संचालन में भी शामिल करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इन सभी सुविधाओं के वास्तविक संचालन और पर्यटकों के लिए उपलब्धता की पुष्टि पार्क खुलने के समय की जाने वाली आधिकारिक घोषणा से ही होगी।
मैंग्रोव जंगल मुंबई के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मैंग्रोव यानी खारफुटी ऐसे तटीय वन हैं जो खारे या मिश्रित खारे पानी वाले क्षेत्रों में विकसित होते हैं। इनकी जड़ें मिट्टी को बांधने, तटीय भूमि के कटाव को कम करने और अनेक जीव-जंतुओं को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मुंबई जैसे घनी आबादी वाले तटीय महानगर के लिए इन जंगलों का महत्व और बढ़ जाता है। शहर का विकास, सड़कों और इमारतों का विस्तार तथा तटीय क्षेत्रों पर बढ़ता दबाव प्राकृतिक आवासों के संरक्षण को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। ऐसे में मैंग्रोव के महत्व को समझना केवल पर्यावरणविदों का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जरूरी है। मैंग्रोव की जड़ें पानी के साथ आने वाले गाद और तलछट को रोकने में मदद करती हैं। ये तटीय पारिस्थितिकी को सहारा देते हैं और मछलियों, केकड़ों, मोलस्क तथा अनेक पक्षियों के लिए भोजन और आश्रय उपलब्ध कराते हैं। इन वनों में कार्बन का भंडारण भी होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने के व्यापक प्रयासों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनती है। इसलिए गोराई में विकसित उद्यान का महत्व केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है। यदि इसे पर्यावरण शिक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से प्रभावी ढंग से संचालित किया गया, तो यह लोगों को शहर के प्राकृतिक संसाधनों से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
विद्यार्थियों और परिवारों के लिए बनेगा नया शैक्षणिक स्थल
मुंबई में बच्चों के मनोरंजन के लिए अनेक उद्यान और पर्यटन स्थल हैं, लेकिन किसी प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को समझने का अवसर अलग तरह का अनुभव देता है। गोराई मैंग्रोव पार्क में विद्यार्थी यह जान सकेंगे कि तटीय वन कैसे विकसित होते हैं, उनकी जड़ें सामान्य पेड़ों से किस तरह अलग होती हैं और छोटे जीवों से लेकर पक्षियों तक के जीवन में इनकी क्या भूमिका है। प्रकृति विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में भ्रमण की सुविधा इस परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा बताई गई है। ऐसे भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को पुस्तकों में पढ़ी गई पर्यावरण संबंधी अवधारणाओं को वास्तविक परिवेश में देखने और समझने का अवसर मिल सकता है। परिवारों के लिए भी यह स्थान प्रकृति के बीच समय बिताने और बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का माध्यम बन सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह पारंपरिक मनोरंजन पार्क नहीं, बल्कि एक संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र पर आधारित पर्यावरणीय स्थल है। इसलिए यहां आने वाले लोगों से शांति बनाए रखने, कचरा नहीं फैलाने और वनस्पतियों तथा वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपेक्षा होगी।
33.43 करोड़ रुपये की परियोजना, लेकिन देरी पर उठे सवाल
गोराई मैंग्रोव पार्क को लगभग 33.43 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इसका निर्माण महाराष्ट्र वन विभाग के मैंग्रोव प्रकोष्ठ ने किया है। परियोजना का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है। इसे महाराष्ट्र राज्य इको-टूरिज्म बोर्ड से भी मंजूरी मिलने की जानकारी प्रकाशित रिपोर्टों में दी गई है। परियोजना पूरी होने के बाद भी लंबे समय तक उद्यान बंद रहने से सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठे हैं। अक्टूबर में प्रकाशित रिपोर्टों में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद लोगों को इसका लाभ मिलने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, इससे पहले मई में उद्घाटन टालने के दौरान जरूरी ढांचागत काम और सुरक्षा की तैयारी को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। ऐसे में प्रशासन के सामने दो जिम्मेदारियां हैं। पहली, उद्यान को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से जनता के लिए खोलना। दूसरी, यह सुनिश्चित करना कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने से उसी प्राकृतिक पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, जिसकी रक्षा के लिए यह परियोजना तैयार की गई है।
कहां है गोराई मैंग्रोव पार्क और कैसे पहुंच सकते हैं?
स्थान: गोराई, बोरिवली पश्चिम, मुंबई।
नजदीकी प्रमुख स्थल: गोराई जेट्टी।
पता: 6RMF+GV7, गोराई 3, बोरिवली पश्चिम, मुंबई, महाराष्ट्र 400091।
गोराई पहुंचने के लिए बोरिवली पश्चिम की ओर से सड़क मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। गोराई जेट्टी इस इलाके का प्रमुख पहचान स्थल है। हालांकि, पार्क तक पहुंचने का सबसे सुविधाजनक मार्ग, प्रवेश द्वार, पार्किंग व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी विस्तृत जानकारी उद्घाटन के समय जारी होने वाले आधिकारिक निर्देशों से जांचना उचित होगा।
ध्यान दें: 27 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पार्क अभी जनता के लिए खुला नहीं है। दिवाली से पहले खुलने की संभावना जताई गई है, लेकिन अंतिम तारीख, प्रवेश शुल्क और समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले नवीनतम घोषणा जरूर जांचें।
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