मुलुंड पूर्व में BMC के PAP प्रोजेक्ट के मजदूर शिविर में भीषण आग, गैस सिलेंडरों में धमाके; सभी कामगार सुरक्षित
मुंबई के मुलुंड पूर्व इलाके में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के प्रोजेक्ट प्रभावित लोगों (PAP) के लिए बनाए जा रहे आवासीय प्रोजेक्ट के परिसर में बने मजदूर शिविर में अचानक भीषण आग लग गई। आग निर्माण स्थल पर बने ग्राउंड प्लस वन मंजिला श्रमिक शिविर में लगी थी। आग की लपटें तेजी से फैलने के बाद वहां रखे कई गैस सिलेंडरों में धमाके होने की जानकारी सामने आई, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार, शिविर में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और घटना में अब तक किसी के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है।
मुलुंड मधील PAP प्रकल्पा मध्ये अग्नितांडव !
@mulund_info @SpeakOut16 @abpmajhatv @LoksattaLive https://t.co/Kis5c7moJn
— Adv. Sagar Devre | ॲड सागर देवरे (@MeeSagarDevre) October 8, 2026
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आग मुलुंड पूर्व के टाटा नगर क्षेत्र में, नवघर रोड पर पुरवा नगर इमारत के पीछे स्थित निर्माणाधीन स्थल पर लगी। यह स्थान BMC के PAP प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों के रहने के लिए मौके पर ग्राउंड प्लस वन मंजिला अस्थायी मजदूर शिविर बनाया गया था। गुरुवार दोपहर इसी शिविर में आग लगने की सूचना मुंबई अग्निशमन दल के नियंत्रण कक्ष को मिली।
दोपहर करीब 1:54 बजे मिली आग की सूचना
मुंबई अग्निशमन दल के अनुसार, आग की सूचना दोपहर करीब 1 बजकर 54 मिनट पर मिली। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां घटनास्थल के लिए रवाना की गईं। अधिकारियों ने शुरुआती स्तर पर इस घटना को लेवल-1 आग के रूप में दर्ज किया। करीब 2 बजकर 5 मिनट पर आग को लेवल-1 के रूप में घोषित किया गया था। इसके बाद दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और स्थिति को नियंत्रण में लेने का काम शुरू किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत अपेक्षाकृत छोटे स्तर पर हुई थी, लेकिन श्रमिक शिविर में मौजूद ज्वलनशील सामान और गैस सिलेंडरों के कारण आग ने तेजी से गंभीर रूप ले लिया। बाद में कम से कम सात गैस सिलेंडरों में विस्फोट होने की जानकारी सामने आई। सिलेंडरों में धमाके होने के कारण आग की तीव्रता बढ़ गई और आसपास के लोगों में भी चिंता फैल गई। हालांकि, आधिकारिक रूप से आग लगने का अंतिम कारण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है और इसकी जांच की जा रही है।
गैस सिलेंडरों में धमाकों से बढ़ी दहशत
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, आग के दौरान तेज आवाजें सुनाई दीं। बाद में सामने आई रिपोर्टों में इन आवाजों को गैस सिलेंडरों में हुए विस्फोट से जोड़ा गया। निर्माणाधीन परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए बनाए गए अस्थायी शिविरों में खाना पकाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए गैस सिलेंडर रखे जाने की संभावना रहती है। ऐसे में आग लगने के बाद सिलेंडरों तक लपटें पहुंचना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के दौरान कम से कम सात गैस सिलेंडर फटने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है। हालांकि, सिलेंडरों के रखे जाने की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और आग वहां तक किस तरह पहुंची, इसका विस्तृत विवरण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।
सभी कामगारों को सुरक्षित निकाला गया
घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि मजदूर शिविर में रहने वाले लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी occupants को सुरक्षित तरीके से शिविर से बाहर निकाला गया और अब तक किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। आग लगने के समय निर्माण स्थल पर कितने कामगार मौजूद थे, इसकी अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। इसी तरह यह भी जांच का विषय है कि आग लगने के समय शिविर में खाना पकाने की गतिविधि चल रही थी या किसी अन्य कारण से आग शुरू हुई। दमकल और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही इस संबंध में आधिकारिक तस्वीर साफ होगी।
कई एजेंसियां मौके पर पहुंचीं
घटना की गंभीरता को देखते हुए सिर्फ मुंबई अग्निशमन दल ही नहीं, बल्कि पुलिस, महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (MSEDCL), BMC के संबंधित कर्मचारी और 108 एंबुलेंस सेवा को भी मौके पर तैनात किया गया। इससे आग पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ किसी संभावित आपात स्थिति के लिए चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। दमकल कर्मियों ने आग को फैलने से रोकने और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने पर ध्यान दिया। निर्माणाधीन स्थल होने के कारण वहां विभिन्न प्रकार की निर्माण सामग्री, अस्थायी ढांचे और श्रमिकों के रहने की व्यवस्था मौजूद थी। ऐसे स्थानों पर आग तेजी से फैलने की आशंका रहती है, इसलिए दमकल विभाग के लिए आग को सीमित क्षेत्र में रखना महत्वपूर्ण था।
निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मुलुंड की यह घटना एक बार फिर निर्माण स्थलों पर श्रमिकों के लिए बनाए जाने वाले अस्थायी शिविरों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती है। निर्माण परियोजनाओं में बड़ी संख्या में मजदूर अस्थायी शिविरों में रहते हैं। कई बार इन शिविरों में खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर, बिजली के अस्थायी कनेक्शन, लकड़ी या अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद रहती है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में कुछ ही मिनटों में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। विशेष रूप से तब जोखिम बढ़ जाता है जब मजदूरों के रहने की जगह निर्माण स्थल के बिल्कुल पास हो। किसी दुर्घटना की स्थिति में आग के साथ-साथ धुआं, सिलेंडर विस्फोट और निर्माण सामग्री गिरने जैसे खतरे भी सामने आ सकते हैं। इसलिए ऐसे शिविरों में अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था, गैस सिलेंडरों का उचित भंडारण, आपातकालीन निकासी मार्ग और नियमित सुरक्षा जांच बेहद जरूरी होती है।
आग कैसे लगी, इसकी जांच जारी
फिलहाल आग के वास्तविक कारण को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। शुरुआती जानकारी में आग को छोटे स्तर से शुरू होने की बात कही गई है, जिसके बाद यह फैल गई। गैस सिलेंडरों में हुए धमाकों ने आग की स्थिति को और गंभीर बनाया। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि आग की शुरुआत गैस सिलेंडर से ही हुई थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि आग सबसे पहले किस हिस्से में लगी, उस समय वहां कौन-कौन से उपकरण या सामग्री मौजूद थी, बिजली की वायरिंग की स्थिति कैसी थी और गैस सिलेंडरों को किस तरह रखा गया था। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि निर्माण स्थल पर निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
PAP परियोजना के कारण भी महत्वपूर्ण है घटनास्थल
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आग जिस परिसर में लगी, वहां BMC की ओर से प्रोजेक्ट प्रभावित लोगों यानी PAP के लिए आवासीय निर्माण कार्य किया जा रहा है। ऐसे प्रोजेक्ट का उद्देश्य विभिन्न विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए आवास उपलब्ध कराना होता है। निर्माणाधीन परियोजना में बड़ी संख्या में श्रमिकों की मौजूदगी के कारण उनके रहने की व्यवस्था भी परियोजना परिसर में की गई थी। इस घटना के बाद संबंधित एजेंसियों के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान श्रमिकों और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा से समझौता न हो। खासकर अस्थायी श्रमिक शिविरों की सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा किए जाने की जरूरत पर ध्यान दिया जा सकता है।
आसपास के इलाके में मचा हड़कंप
आग और सिलेंडरों में हुए धमाकों की खबर फैलते ही मुलुंड पूर्व के आसपास के इलाकों में भी लोगों के बीच चिंता बढ़ गई। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, आग और धुएं को आसपास के कई स्थानों से देखा जा सकता था। सोशल मीडिया पर भी घटनास्थल से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सामने आने लगीं, जिनमें निर्माणाधीन परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने भी आग को लेकर चिंता जताई।
फिलहाल जनहानि नहीं, लेकिन सुरक्षा जांच जरूरी
मुलुंड की इस आग में अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं होना राहत की बात है। श्रमिक शिविर में गैस सिलेंडर मौजूद होने और उनमें कई विस्फोट होने के बावजूद सभी लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना महत्वपूर्ण है। लेकिन घटना ने यह जरूर दिखाया है कि निर्माण स्थलों पर अस्थायी आवासीय शिविर कितने संवेदनशील हो सकते हैं। अब आगे की जांच में आग लगने के वास्तविक कारण, गैस सिलेंडरों के भंडारण, विद्युत व्यवस्था, श्रमिक शिविर की संरचना और उपलब्ध अग्नि सुरक्षा साधनों की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा। यदि जांच में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार एजेंसियों या ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।
फिलहाल दमकल विभाग और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई के बाद स्थिति नियंत्रण में है। आग लगने का अंतिम कारण और नुकसान का पूरा आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में अभी तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store – https://apps.apple.com/in/ app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/

