बहराइच की जलवर्षा अम्मा ने मिट्टी से बनाई अनोखी डेहरी, अनाज और आभूषण सुरक्षित

The CSR Journal Magazine
बहराइच जिले के मिर्जापुर गांव से एक अनोखी खबर आई है। 60 वर्षीय जलवर्षा अम्मा ने मिट्टी और भूसे से एक ऐसी डेहरी बनाई है, जो न केवल देखने में खूबसूरत है, बल्कि इसकी कार्यक्षमता भी अद्भुत है। आधुनिकता की इस दौड़ में, जब लोग कंक्रीट के मकानों और प्लास्टिक के बक्सों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जलवर्षा अम्मा की यह कारीगरी हमें हमारी पुरानी परंपराओं की याद दिलाती है। यह डेहरी अनाज और आभूषण को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन तरीका है, जो आज के विज्ञान को भी चुनौती देती है।

5 क्विंटल अनाज की सुरक्षा

जलवर्षा अम्मा की यह मिट्टी की डेहरी लगभग 5 क्विंटल अनाज स्टोर करने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें रखा अनाज बिना किसी केमिकल के दो साल तक सुरक्षित रहता है। अम्मा ने इसमें एक गुप्त स्थान बनाया है, जिसे देखकर आज के इंजीनियर भी दंग रह जाएंगे। इस गुप्त स्थान में लोग सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि अपनी जरूरी नकदी और आभूषण भी छिपाकर रखते थे। यह तकनीक इतनी प्रभावी है कि बाहर से देखने पर किसी को भी इसका आभास नहीं होता था।

दो पार्टीशन वाली डेहरी की खासियत

जलवर्षा अम्मा के घर में एक और डेहरी है, जो दो पार्टीशन के साथ बनाई गई है। इस डेहरी के अंदर एक मजबूत मिट्टी की दीवार है, जो इसे दो हिस्सों में बांटती है। एक हिस्से में अनाज सुरक्षित रखा जाता है, जबकि दूसरे हिस्से में सरसों और अन्य तिलहन। इसमें अनाज निकालने के लिए एक छोटा सा छिद्र भी बनाया गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर सामान आसानी से बाहर निकाला जा सके। यह तकनीक भी अम्मा की सूझबूझ का एक और उदाहरण है।

मिट्टी और भूसे की शानदार कारीगरी

जलवर्षा अम्मा ने इस डेहरी को बनाने की तकनीक के बारे में बताया कि इसे चिकनी मिट्टी और भूसे को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके अंदर की पेंदी और दीवारों को इस तरह बनाया गया है कि यह सालों-साल मजबूत बनी रहे। दीमक और सीलन का इस पर कोई असर नहीं होता। यह पारंपरिक तकनीक आज भी उतनी ही प्रभावी है, जितनी पहले थी।

म्यूजियम जैसी अनमोल धरोहर

आज के समय में, जब लोग एल्युमिनियम और प्लास्टिक के ड्रमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जलवर्षा अम्मा की यह डेहरी एक मिसाल पेश करती है। यह किसी बड़े ऐतिहासिक म्यूजियम में रखी गई प्राचीन कलाकृति से कम नहीं है। 60 साल की उम्र में अम्मा द्वारा बनाई गई यह डेहरी ग्रामीण परिवेश की समृद्ध थाती को उजागर करती है। यह दर्शाती है कि कम संसाधनों में भी बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आधुनिकता और परंपरा का संगम

जलवर्षा अम्मा की यह कारीगरी न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह हमारे बुजुर्गों की बुद्धिमत्ता का प्रतीक भी है। आज के युवा पीढ़ी को इससे सीखने की जरूरत है कि कैसे पारंपरिक तरीके से भी आधुनिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इस तरह की कारीगरी हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और हमें याद दिलाती है कि हमारे पूर्वज कितने कुशल थे।

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