कमजोर मानसून का असर: कर्नाटक में 33% फसलें बर्बाद, Maharastra में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी

The CSR Journal Magazine
भारत समेत कई देशों में अल नीनो का प्रभाव साफ नजर आ रहा है। कमजोर मानसून के कारण दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में जलाशयों का जल स्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में सूखे के हालात ने खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। कर्नाटक में 240 में से 226 तालुके सूखाग्रस्त हैं, जिससे लगभग 33% फसलें बर्बाद होने का अनुमान है।

तमिलनाडु में चावल की कीमतों में उछाल

कावेरी डेल्टा में पानी की कमी के चलते धान की खेती का रकबा एक लाख एकड़ से ज्यादा घट गया है। इस कमी के कारण चावल की कुछ किस्मों की कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं। किसानों को इस संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो रही है।

किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी

महाराष्ट्र में सूखे और कर्ज के दबाव के बीच सात दिनों में चार किसानों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं। सूखे की स्थिति कर्नाटक के 94.1%, आंध्र प्रदेश के 56.4% और महाराष्ट्र के 86.4% तालुकों में बताई गई है। तेलंगाना के करीब 45.6% मंडल भी सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद चिंताजनक है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अल नीनो का असर

देश के 178 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर क्षमता से 31% कम रह गया है। सबसे भयावह असर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना पर पड़ा है। पेन्नार बेसिन में 72.3% और कावेरी बेसिन में 60.5% पानी की कमी दर्ज की गई है। तमिलनाडु का अलियार जलाशय लगभग शून्य पर आ गया है, जबकि तेलंगाना से जुड़े प्रमुख बांध अपनी सामान्य क्षमता के आधे से भी नीचे हैं।
दुनिया के कई हिस्सों में अल नीनो का असर देखने को मिल रहा है। इंडोनेशिया में जंगलों की आग से तबाही मची है, जहां जनवरी से अब तक करीब 8.95 लाख हेक्टेयर जमीन जल चुकी है। धुएं से सुमात्रा और कालीमंतन में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, प्रशांत महासागर में 22 तूफान और 12 चक्रवात आए हैं, जिनमें से 10 बेहद शक्तिशाली थे।

भारत में मानसूनी बारिश में कमी

भारत में मानसूनी बारिश औसत से 13% कम रही है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश करीब 26% कम, जबकि दक्षिणी राज्यों में 24% कम दर्ज की गई है। इससे खेती और फसलों की पैदावार पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो अकेला जिम्मेदार नहीं है।

अटलांटिक महासागर में चक्रवातों की कमी

अटलांटिक महासागर में चक्रवाती गतिविधियां कमजोर रही हैं। यहां अब तक आठ उष्णकटिबंधीय तूफान बने हैं, और केवल एक तूफान ने अमेरिका में दस्तक दी। यह स्थिति भी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का संकेत देती है।

चीन-जापान में बाढ़ और भूस्खलन

चीन और जापान में तूफानों के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। गर्म समुद्री पानी तूफानों को ज्यादा ऊर्जा देता है, जिससे इसके शक्तिशाली होने का खतरा बढ़ता है। इस स्थिति ने भी स्थानीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

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