वर्सोवा से गोरेगांव तक सफर होगा आसान, 4.5 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर से 40 मिनट का रास्ता 10-15 मिनट में

The CSR Journal Magazine

मुंबई में ट्रैफिक से बड़ी राहत की तैयारी, वर्सोवा-बंगुर नगर एलिवेटेड कॉरिडोर से घटेगा सफर का समय, 40 की जगह 15 मिनट में पहुंचेंगे बांद्रा से गोरेगांव

मुंबई में पश्चिमी उपनगरों के बीच रोजाना आवागमन करने वाले लाखों लोगों के लिए आने वाले वर्षों में सड़क यातायात को लेकर बड़ी राहत की उम्मीद है। वर्सोवा से बांद्रा और आगे गोरेगांव तक सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली मुंबई कोस्टल रोड (उत्तर) परियोजना के तहत वर्सोवा इंटरचेंज से बंगुर नगर तक बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह मार्ग पश्चिमी उपनगरों में यातायात के दबाव को कम करने के साथ-साथ वर्सोवा, लोखंडवाला, माध, मिल्लत नगर और गोरेगांव जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के बीच आवाजाही को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई करीब 4.5 किलोमीटर होगी और इसमें आठ लेन का प्रावधान रहेगा। परियोजना पूरी होने के बाद मौजूदा मार्गों पर लगने वाले लंबे जाम से यात्रियों को काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल यातायात की स्थिति के आधार पर वर्सोवा और गोरेगांव के बीच सफर में 40 से 50 मिनट तक लग सकते हैं। नए मार्ग के चालू होने के बाद इस दूरी को लगभग 10 से 15 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय यातायात, प्रवेश-बाहर के बिंदुओं और मार्ग के संचालन पर निर्भर करेगा।

बांद्रा से गोरेगांव तक बनेगा बेहतर संपर्क

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका संपर्क महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम यानी एमएसआरडीसी की बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक परियोजना से किया जाना है। दोनों परियोजनाओं के एक-दूसरे से जुड़ने के बाद बांद्रा से वर्सोवा और वहां से गोरेगांव की ओर जाने वाले वाहनों के लिए अधिक सुगम और निरंतर सड़क संपर्क उपलब्ध हो सकेगा। वर्तमान में पश्चिमी उपनगरों में उत्तर-दक्षिण दिशा में आने-जाने वाले वाहनों को कई प्रमुख जंक्शनों और व्यस्त सड़कों से गुजरना पड़ता है। खासकर वर्सोवा, अंधेरी, जोगेश्वरी, गोरेगांव और लिंक रोड के आसपास पीक आवर्स में यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है। नई ऊंची सड़क इस दबाव को मुख्य जमीनी सड़कों से हटाकर एक अलग यातायात गलियारे में ले जाने में मदद करेगी।
परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पश्चिमी उपनगरों में पिछले कुछ वर्षों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। लोखंडवाला, वर्सोवा, माध, ओशिवारा, अंधेरी और गोरेगांव जैसे इलाकों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग कार्यालयों, व्यापारिक क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों तक यात्रा करते हैं। ऐसे में सड़क क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रमुख इलाकों को सीधे जोड़ना मुंबई की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BMC ने निर्माण की गति पर दिया जोर

परियोजना की प्रगति की हाल में BMC के अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने समीक्षा की। समीक्षा के दौरान संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को काम की गति बनाए रखने तथा विभिन्न निर्माण गतिविधियों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य परियोजना के निर्धारित समय-सीमा के भीतर अलग-अलग हिस्सों का काम पूरा करना है। इतने बड़े शहरी बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में केवल मुख्य पुल या एलिवेटेड सड़क का निर्माण ही चुनौती नहीं होता। इसके साथ पिलर, रैंप, जंक्शन, सड़क संपर्क, जल निकासी, उपयोगिता लाइनों का स्थानांतरण, यातायात प्रबंधन और आसपास की मौजूदा सड़कों के साथ समन्वय जैसे कई काम भी करने पड़ते हैं। इसलिए निर्माण कार्य को अलग-अलग हिस्सों में एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। BMC के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्माण के दौरान पहले से व्यस्त पश्चिमी उपनगरों की सड़कों पर यातायात को नियंत्रित रखना होगा। निर्माण गतिविधियों के कारण मौजूदा यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम करना आवश्यक होगा।

8 लेन की सड़क से बढ़ेगी क्षमता

करीब 4.5 किलोमीटर लंबे आठ लेन वाले इस एलिवेटेड मार्ग का उद्देश्य केवल यात्रा का समय कम करना नहीं, बल्कि सड़क की यातायात क्षमता बढ़ाना भी है। वर्तमान में वर्सोवा से गोरेगांव के बीच यातायात का एक बड़ा हिस्सा जमीनी सड़कों पर निर्भर करता है। एक ही मार्ग पर स्थानीय यातायात, लंबी दूरी के वाहन, सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहन आने के कारण कई जगह गति धीमी हो जाती है। एलिवेटेड कॉरिडोर के चालू होने के बाद ऐसे वाहनों को वैकल्पिक तेज मार्ग उपलब्ध होगा। इससे नीचे की मौजूदा सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है। इसका लाभ उन यात्रियों को भी मिल सकता है जिन्हें नए कॉरिडोर का सीधे इस्तेमाल नहीं करना है, क्योंकि मुख्य सड़क नेटवर्क पर यातायात का दबाव घटने से यात्रा की गति में सुधार हो सकता है।

किन इलाकों को मिलेगा सीधा लाभ?

वर्सोवा और बंगुर नगर के बीच बनने वाला यह मार्ग पश्चिमी उपनगरों के कई महत्वपूर्ण इलाकों को प्रभावित करेगा। वर्सोवा और लोखंडवाला से आने-जाने वाले लोगों के अलावा माध, मिल्लत नगर और गोरेगांव क्षेत्र के यात्रियों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। माध क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए गोरेगांव और आगे बांद्रा की दिशा में सड़क संपर्क लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। इसी तरह लोखंडवाला और वर्सोवा से गोरेगांव की ओर जाने वाले वाहन मौजूदा लिंक रोड और अन्य प्रमुख मार्गों पर निर्भर रहते हैं। इन इलाकों में यातायात का दबाव कम होने से स्थानीय आवाजाही भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है। बंगुर नगर की ओर पहुंचने के बाद यह कॉरिडोर पश्चिमी उपनगरों के आगे के सड़क नेटवर्क से जुड़ सकेगा। इससे गोरेगांव और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले वाहनों के लिए भी एक अतिरिक्त विकल्प तैयार होगा।

बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक से जुड़ने पर बढ़ेगा महत्व

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक के साथ इसका संभावित जुड़ाव है। बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक पश्चिमी तट के समानांतर सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने के बाद बांद्रा से वर्सोवा के बीच समुद्र के ऊपर तेज संपर्क उपलब्ध होने की योजना है। जब बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक और वर्सोवा-बंगुर नगर एलिवेटेड कॉरिडोर दोनों परिचालन में आ जाएंगे, तब बांद्रा से गोरेगांव की दिशा में जाने वाले वाहनों को लगातार और अपेक्षाकृत तेज मार्ग मिल सकता है। मौजूदा समय में बांद्रा से गोरेगांव जाने वाले यात्रियों को कई व्यस्त सड़क खंडों और जंक्शनों से गुजरना पड़ता है। नई परियोजनाओं का नेटवर्क इस यात्रा को अधिक सीधा बनाने की दिशा में काम करेगा। योजना के अनुसार दोनों परियोजनाओं को 2028 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निर्माण पूरा होता है और आवश्यक संपर्क मार्ग भी समय पर तैयार हो जाते हैं, तो 2029 से बांद्रा से गोरेगांव के बीच तेज और अधिक निरंतर सड़क संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है।

केवल समय की बचत नहीं, ईंधन की भी बचत संभव

यात्रा समय में कमी का सीधा असर वाहन संचालन की लागत पर भी पड़ सकता है। जाम में लंबे समय तक वाहन खड़े रहने या धीमी गति से चलने पर ईंधन की खपत बढ़ती है। यदि नए कॉरिडोर के कारण यात्रा अधिक सुचारु होती है, तो निजी वाहनों के साथ-साथ माल और सेवा वाहनों के परिचालन समय में भी कमी आ सकती है। हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ परियोजना शुरू होने के बाद यातायात के व्यवहार पर निर्भर करेगा। यदि बड़ी संख्या में वाहन एलिवेटेड कॉरिडोर पर स्थानांतरित होते हैं, तो जमीनी सड़कों पर भीड़ कम हो सकती है। वहीं, नए मार्ग से उत्पन्न अतिरिक्त यातायात को संभालने के लिए प्रवेश और निकास बिंदुओं की पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।

निर्माण के साथ यातायात प्रबंधन भी बड़ी चुनौती

मुंबई जैसे घनी आबादी वाले महानगर में किसी बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है। निर्माण क्षेत्र के आसपास पहले से मौजूद सड़कें, दुकानों और आवासीय इलाकों की आवाजाही, पैदल यात्रियों की सुरक्षा तथा उपयोगिता सेवाओं को ध्यान में रखना पड़ता है। इसलिए परियोजना को समय पर पूरा करने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण अवधि के दौरान यातायात प्रबंधन प्रभावी रहे। यदि अलग-अलग निर्माण गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय रखा जाता है तो मौजूदा यातायात पर पड़ने वाला असर नियंत्रित किया जा सकता है।

मुंबई के उत्तर-दक्षिण सड़क नेटवर्क को मिलेगा नया विकल्प

वर्सोवा-बंगुर नगर एलिवेटेड कॉरिडोर को केवल एक स्थानीय सड़क परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह मुंबई के पश्चिमी हिस्से में तैयार हो रहे बड़े सड़क नेटवर्क का हिस्सा है। बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक, मुंबई कोस्टल रोड के उत्तरी विस्तार और पश्चिमी उपनगरों के विभिन्न संपर्क मार्गों के साथ इसके जुड़ने से एक व्यापक परिवहन गलियारा तैयार होने की संभावना है। इसका उद्देश्य पश्चिमी उपनगरों में वाहनों को अधिक विकल्प देना और मौजूदा प्रमुख सड़कों पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है। आने वाले वर्षों में जब ये परियोजनाएं एक-दूसरे से जुड़ेंगी, तब बांद्रा, वर्सोवा और गोरेगांव के बीच सड़क यात्रा की तस्वीर बदल सकती है।
फिलहाल परियोजना के निर्माण को निर्धारित समय-सीमा में आगे बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। बीएमसी की ओर से निर्माण गतिविधियों को समानांतर रूप से जारी रखने पर जोर दिए जाने से संकेत है कि परियोजना को तय समय में पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यदि 2028 के अंत तक प्रस्तावित परियोजनाएं पूरी हो जाती हैं, तो 2029 से पश्चिमी उपनगरों के यात्रियों को बांद्रा से गोरेगांव तक अधिक तेज, सीधा और सुविधाजनक सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।

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