सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, 21 मीडिया ग्रुप्स ने उठाए पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट और इससे जुड़े नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने दाखिल की है। DNPA का कहना है कि नए कानून में पत्रकारिता को छूट न मिलने से खोजी पत्रकारिता, खबरों की रिपोर्टिंग और गोपनीय स्रोतों की पहचान सुरक्षित रखने में कठिनाई हो सकती है।

कानून के कई प्रावधानों पर उठे सवाल

याचिका में DNPA ने कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की है। एसोसिएशन ने डेटा कानून के तहत निजी जानकारी के इस्तेमाल के लिए सहमति की शर्त, RTI कानून में बदलाव और सरकार को दी गई जानकारी मांगने की शक्तियों पर सवाल उठाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

किसने किया याचिका दाखिल?

DNPA ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में देश के 21 प्रमुख न्यूज पब्लिशर्स शामिल हैं, जैसे मुकेश अंबानी का नेटवर्क18, गौतम अडाणी का NDTV, इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स इंटरनेट। इन मीडिया समूहों का मानना है कि नए कानून से प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

केंद्र का डेटा सुरक्षा कानून

केंद्र सरकार ने डिजिटल माध्यमों पर लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए यह कानून बनाया है। इसके तहत डिजिटल पर्सनल डेटा का इस्तेमाल करने वाले संगठनों पर नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी तय की गई है। लेकिन, न्यूज पब्लिशर्स का कहना है कि मीडिया संस्थानों को छूट न मिलने से पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर खतरा मंडरा रहा है।

याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

याचिका में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चिंता जताई गई है। पहला, सहमति की शर्त से पत्रकारिता प्रभावित होगी। DNPA का कहना है कि किसी व्यक्ति की निजी जानकारी का इस्तेमाल करने से पहले उसकी सहमति लेना आवश्यक होने से खोजी पत्रकारिता में बाधा आएगी।

खबरें हटाने का दबाव

दूसरा, प्रकाशित खबरें हटाने का दबाव बन सकता है। याचिका में कहा गया है कि कानून के तहत व्यक्ति अपनी सहमति वापस लेकर निजी जानकारी मिटाने की मांग कर सकता है। इससे प्रकाशित खबरें हटाने या उनमें बदलाव करने की मांग की जा सकती है।

गोपनीय स्रोतों की सुरक्षा

तीसरा, पत्रकारों के गोपनीय स्रोतों की पहचान उजागर होने का खतरा है। DNPA ने सरकार को संगठनों से जानकारी मांगने की शक्तियां दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। इससे भ्रष्टाचार, कॉर्पोरेट गड़बड़ियों और चुनावी अनियमितताओं की जानकारी देने वाले लोगों पर भी असर पड़ सकता है।

RTI कानून में बदलाव

चौथा, न्यूज पब्लिशर्स ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून की धारा 8(1)(j) में किए गए बदलाव को भी चुनौती दी है। याचिका में आशंका जताई गई है कि इससे सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों से जुड़ी जानकारी तक जनता की पहुंच प्रभावित हो सकती है।

सरकार की शक्तियों पर सवाल

पांचवां, याचिका में कहा गया है कि DPDP कानून के तहत सरकार संगठनों से जानकारी मांग सकती है और जनहित के आधार पर सूचना तक पहुंच रोक सकती है। DNPA का तर्क है कि इन शक्तियों के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट सीमाएं होनी चाहिए।

क्या होगा अगली सुनवाई में?

अब देखना यह है कि अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर क्या फैसला लेता है। क्या पत्रकारिता की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? यह सवाल सभी के मन में है।

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