मुंबई वॉटर मेट्रो को मिली रफ्तार, ₹6,066 करोड़ से बनेगा बड़ा जल परिवहन नेटवर्क, पहले चरण में 16 जलमार्ग और 26 टर्मिनल
मुंबई महानगर क्षेत्र में सड़क और रेल परिवहन के बढ़ते दबाव के बीच जलमार्ग को सार्वजनिक परिवहन के एक नए विकल्प के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हो गई है। महाराष्ट्र की प्रस्तावित मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना को अब जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। करीब ₹6,066 करोड़ की व्यापक परियोजना के तहत पहले चरण में 16 जलमार्गों पर 26 यात्री टर्मिनल विकसित और उन्नत किए जाने हैं। महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड ने इसके लिए परियोजना प्रबंधन, डिजाइन, खरीद संबंधी सहायता और निर्माण निगरानी से जुड़े परामर्शदाता की नियुक्ति के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की है। यह परियोजना केवल मुंबई शहर तक सीमित नहीं रहेगी। इसका उद्देश्य मुंबई महानगर क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों को समुद्री और खाड़ी जलमार्गों के माध्यम से जोड़ना है। प्रस्तावित नेटवर्क में मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण, वसई और मीरा-भायंदर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इससे सड़क और उपनगरीय रेल पर निर्भर यात्रियों को कुछ मार्गों पर वैकल्पिक जल परिवहन उपलब्ध कराने की योजना है।
पहले चरण में 16 जलमार्गों पर काम
मुंबई वॉटर मेट्रो के पहले चरण में कुल 16 मार्ग शामिल किए गए हैं। इनमें 8 मौजूदा जलमार्गों के उन्नयन के साथ-साथ 8 नए जलमार्ग विकसित करने की योजना है। इन मार्गों के साथ कुल 26 यात्री टर्मिनलों को विकसित या उन्नत किया जाएगा। टर्मिनलों पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं के साथ नौवहन और आपातकालीन व्यवस्थाएं भी विकसित की जानी हैं। महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड द्वारा नियुक्त किया जाने वाला परियोजना प्रबंधन सलाहकार टर्मिनलों की डिजाइन और इंजीनियरिंग से लेकर निर्माण कार्य की निगरानी तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालेगा। इसके अलावा विभिन्न सरकारी और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय, निर्माण की गुणवत्ता, समयबद्ध प्रगति और तकनीकी पहलुओं की निगरानी भी इसी व्यवस्था का हिस्सा होगी। निविदा दस्तावेजों के मुताबिक सलाहकार को टर्मिनल, नौवहन और आपातकालीन बुनियादी ढांचे के विकास और उन्नयन से जुड़े काम में परियोजना प्रबंधन के साथ डिजाइन तथा खरीद संबंधी तकनीकी सहायता भी देनी होगी। सितंबर 2026 में जारी निविदा की समयसीमा बढ़ाकर 28 सितंबर की गई थी और निविदाएं 29 सितंबर को खोली जानी थीं।
26 टर्मिनलों से बढ़ेगी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
वॉटर मेट्रो का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसके यात्री टर्मिनल होंगे। इन्हें केवल नाव पकड़ने की जगह के रूप में नहीं, बल्कि दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने वाले केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। पहले की परियोजना योजना में टर्मिनलों को जमीन पर बने मेट्रो स्टेशनों की तरह यात्री सुविधाओं से लैस करने और उन्हें दूसरे परिवहन साधनों से जोड़ने पर जोर दिया गया था। 26 टर्मिनलों के माध्यम से दक्षिण मुंबई, पश्चिमी उपनगरों, ठाणे क्रीक और नवी मुंबई समेत महानगर क्षेत्र के कई हिस्सों के बीच जल संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे तक जलमार्ग आधारित संपर्क को भी व्यापक योजना में महत्व दिया गया है। हालांकि, 26 टर्मिनलों का आंकड़ा पहले चरण से संबंधित है। पूरी मुंबई वॉटर मेट्रो योजना का दायरा इससे कहीं बड़ा है।
पूरी योजना में 340 किलोमीटर का जलमार्ग नेटवर्क
जुलाई 2026 में सामने आई व्यापक परियोजना योजना के अनुसार मुंबई क्षेत्र में करीब 340 किलोमीटर लंबा जलमार्ग नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें 33 जलमार्ग, 44 टर्मिनल और लगभग 203 इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड पोत शामिल किए जाने की योजना बताई गई है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹6,066 करोड़ है। इसका अर्थ है कि पहले चरण के 16 जलमार्ग और 26 टर्मिनल व्यापक नेटवर्क की शुरुआती कड़ी हैं। परियोजना के आगे बढ़ने के साथ मार्गों और टर्मिनलों की संख्या में विस्तार किया जाना है। परियोजना के तहत पर्यावरण के लिहाज से अपेक्षाकृत स्वच्छ इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड नावों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके अलावा महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में करीब ₹150 करोड़ के निवेश से आधुनिक इलेक्ट्रिक नाव निर्माण केंद्र विकसित करने की योजना भी सामने आई है।
सड़क के समानांतर मिलेगा नया परिवहन विकल्प
मुंबई में रोजाना लाखों लोग काम, कारोबार, शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक यात्रा करते हैं। सड़क मार्ग पर लगातार बढ़ते वाहनों के कारण कई प्रमुख मार्गों पर यात्रा का समय बढ़ता है। दूसरी ओर, उपनगरीय रेल और मेट्रो नेटवर्क पर भी लगातार यात्रियों का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में जल परिवहन का इस्तेमाल सड़क और रेल के समानांतर एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में किया जा सकता है। खास तौर पर ऐसे इलाकों में जहां समुद्री खाड़ी या अन्य नौवहन योग्य जलमार्ग मौजूद हैं, वहां कुछ यात्राओं को जलमार्ग की ओर स्थानांतरित करने की संभावना है। सरकार की व्यापक योजना का उद्देश्य जल परिवहन को रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी इस्तेमाल करना है। केंद्र की प्रस्तावित राष्ट्रीय वॉटर मेट्रो नीति 2026 में भी जलमार्ग आधारित शहरी परिवहन को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के हिस्से के रूप में विकसित करने, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड पोतों को बढ़ावा देने तथा बस, रेल और अन्य परिवहन साधनों के साथ बहु-माध्यमीय संपर्क विकसित करने पर जोर दिया गया है।
मुंबई के जलमार्गों की अपनी अलग चुनौती
मुंबई में वॉटर मेट्रो चलाना जमीन पर मेट्रो या सड़क बनाने से अलग चुनौतीपूर्ण होगा। मुंबई के प्रस्तावित मार्गों में समुद्री खाड़ी, ज्वारीय क्षेत्र, नदी, बंदरगाह क्षेत्र और कुछ हिस्सों में खुले समुद्र से जुड़े जलक्षेत्र शामिल हो सकते हैं। इसलिए हर मार्ग के लिए अलग तकनीकी अध्ययन जरूरी होगा। जलमार्ग की गहराई, समुद्र तल की संरचना, गाद की मात्रा, ज्वार-भाटा, मानसून के दौरान पानी की स्थिति और मौसम का असर जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जाना होगा। नियमित नौवहन के लिए जहां जरूरत होगी, वहां जलमार्ग की क्षमता और नौवहन संबंधी सुविधाओं को भी विकसित करना पड़ेगा। मुंबई की परिस्थितियां कोच्चि से अलग हैं। कोच्चि वॉटर मेट्रो का बड़ा हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित बैकवॉटर क्षेत्र में संचालित होता है, जबकि मुंबई में अलग-अलग प्रकार के जलक्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों की योजना है। इसी कारण विशेषज्ञों ने मुंबई के लिए मार्गवार तकनीकी अध्ययन और अलग परिचालन व्यवस्था की जरूरत बताई है।
टर्मिनल से लेकर आपातकालीन व्यवस्था तक पर जोर
परियोजना का उद्देश्य केवल नावें चलाना नहीं है। इसके लिए पूरे परिवहन तंत्र का बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। इसमें यात्री टर्मिनल, जेट्टी, नौवहन सहायता, आपातकालीन सुविधाएं, यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं और पोतों के लिए चार्जिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए जा रहे वॉटर मेट्रो ढांचे में भी टर्मिनल, जेट्टी, चार्जिंग एवं ईंधन संबंधी सुविधाओं, नौवहन सहायता, यात्री सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ विकसित करने पर जोर दिया गया है। मुंबई परियोजना में इन व्यवस्थाओं का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां मानसून, तेज ज्वार-भाटा और समुद्री मौसम परिवहन संचालन को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नियमित यात्री सेवा के लिए केवल जलमार्ग तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सुरक्षित और विश्वसनीय संचालन के लिए मजबूत व्यवस्था भी जरूरी होगी।
मुंबई से आगे पूरे महानगर क्षेत्र को जोड़ने की कोशिश
वॉटर मेट्रो की सबसे बड़ी विशेषता इसका महानगरीय दायरा है। मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण, वसई और मीरा-भायंदर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को जलमार्ग से जोड़ने पर महानगर क्षेत्र में परिवहन के नए विकल्प तैयार हो सकते हैं। इससे कुछ ऐसे यात्रियों को भी फायदा हो सकता है जिनके लिए मौजूदा सड़क या रेल मार्ग सीधा संपर्क उपलब्ध नहीं कराते। खास तौर पर मुंबई और नवी मुंबई के बीच बढ़ते आवागमन को देखते हुए जलमार्ग संपर्क को भविष्य की परिवहन व्यवस्था का एक हिस्सा माना जा रहा है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के साथ बेहतर जल संपर्क विकसित करना भी व्यापक योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
2031 तक बड़े यात्री आधार का लक्ष्य
व्यापक परियोजना संबंधी रिपोर्टों में वर्ष 2031 तक करीब 7.5 करोड़ यात्रियों को लाभ पहुंचाने का अनुमान भी सामने आया है। यह आंकड़ा परियोजना के पूरे नेटवर्क और उसके संभावित उपयोग से संबंधित है, न कि केवल पहले चरण के 16 जलमार्गों से। परियोजना के सफल होने के लिए यात्रियों के लिए किराया, सेवा की नियमितता, सुरक्षा, समय की बचत और दूसरे परिवहन साधनों से आसान संपर्क महत्वपूर्ण होंगे। यदि टर्मिनलों को मेट्रो, बस और रेल नेटवर्क से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो जल परिवहन केवल पर्यटकों के लिए सेवा न रहकर रोजाना यात्रा करने वालों के लिए भी उपयोगी विकल्प बन सकता है।
महत्वपूर्ण तैयारी और परामर्श
फिलहाल परियोजना महत्वपूर्ण तैयारी और परामर्श के चरण में आगे बढ़ रही है। पहले चरण के लिए परियोजना प्रबंधन और तकनीकी निगरानी व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके बाद मार्गों, टर्मिनलों, नौवहन सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े डिजाइन तथा निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। कुल मिलाकर, ₹6,066 करोड़ की मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना मुंबई के परिवहन ढांचे में जलमार्ग को एक व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन विकल्प के रूप में शामिल करने की कोशिश है। पहले चरण के 16 जलमार्ग और 26 टर्मिनल इस बड़े नेटवर्क की शुरुआती कड़ी हैं, जबकि अंतिम व्यापक योजना 340 किलोमीटर, 33 मार्गों, 44 टर्मिनलों और करीब 203 इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड पोतों तक पहुंचने की है। परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जलमार्गों की तकनीकी चुनौतियों, मानसून और ज्वार-भाटा, सुरक्षा, टर्मिनल कनेक्टिविटी और नियमित यात्री सेवा को कितनी प्रभावी ढंग से संभाला जाता है।
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